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Punjab: छात्रों ने पंजाबी विश्वविद्यालय में विश्वकोश दफनाने का किया विरोध, कहा- 'महान कोष' की किताबें फेंकी गई
Fri, 29 Aug 2025 09:09 AM IST
शाहीन परवीन
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शाहीन परवीन
Updated Fri, 29 Aug 2025 09:09 AM IST
सार
Punjabi University: पंजाबी विश्वविद्यालय के छात्रों ने विश्वकोश 'महान कोष' की किताबों को दफनाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि किताबों के बंडल फेंक दिए गए।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
Punjab Students Protest: पंजाबी विश्वविद्यालय के छात्रों ने गुरुवार को भाई काहन सिंह नाभ द्वारा लिखित पंजाबी विश्वकोश शब्दकोश महान कोष की पुनर्मुद्रित किताबों को विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा दफनाए जाने के खिलाफ विरोध किया।
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प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय के परिसर में गड्ढे खोदे गए और जब छात्र संगठन के सदस्य बीच में आए, तो 'महान कोष' की किताबों के बंडल फेंक दिए गए।
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छात्रों का आरोप: पंजाबी भाषा का अनादर
यादविंदर सिंह यादु और कुलदीप सिंह झिंजर के नेतृत्व में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर पंजाबी भाषा और विरासत का अनादर करने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा कि इस तरह से पुस्तकों को नष्ट करना "अपवित्रता" के समान है और पूरे दिन हंगामा किया।
विश्वविद्यालय ने पिछले कुछ वर्षों में 'महान कोष' का पुनर्प्रकाशन किया था, लेकिन विद्वानों ने नवीनतम संस्करण में कई गलतियां बताईं।
दोषपूर्ण विश्वकोश प्रतियों को लेकर सिख विद्वानों की चेतावनी
सिख बुद्धिजीवियों, भाषा विशेषज्ञों और सांस्कृतिक संगठनों ने बार-बार मांग की है कि दोषपूर्ण प्रतियों को वापस मंगाकर नष्ट कर दिया जाए।6 अगस्त को, डॉ. खुशहाल सिंह (केंद्री सिंह सभा), राजिंदर सिंह (खालसा पंचायत), डॉ. प्यारा लाल गर्ग (पूर्व रजिस्ट्रार, बीएफयूएचएस), परमजीत सिंह (सिख मिशनरी कॉलेज) और विद्वान अमरजीत सिंह धवन सहित एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले को लेकर पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि अगर विश्वविद्यालय ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो वे इस मामले को जनता के सामने ले जाएंगे।
त्रुटिपूर्ण प्रतियों का नष्ट करने का आश्वासन
बैठक में पंजाबी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने संधवान को आश्वासन दिया कि त्रुटिपूर्ण पुनर्मुद्रण को 15 दिनों के भीतर वापस मँगवाकर नष्ट कर दिया जाएगा।इसी आश्वासन के परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने पुस्तकों को दफनाना शुरू कर दिया।
भाई काहन सिंह नाभा द्वारा 1930 में पहली बार संकलित महान कोष को पंजाबी भाषा का पहला विश्वकोश माना जाता है, जिसमें अर्थ और व्याख्याओं सहित लगभग 80,000 शब्द शामिल हैं।
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