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SC: 40 प्रतिशत की विकलांगता नहीं बनेगी मेडिकल शिक्षा की राह में रोड़ा, जानें क्या रहा सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Tue, 15 Oct 2024 03:15 PM IST
मेघा झा
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा झा
Updated Tue, 15 Oct 2024 03:15 PM IST
सार
Supreme court : सुप्रीम कोर्ट ने 40 प्रतिशत तक की विकलांगता वाले छात्रों की एमबीबीएस करने की राह आसान हर दी है। मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने से रोकने के लिए विशेषज्ञ रिपोर्ट की जरूरत होगी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Supreme court : मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से 40 प्रतिशत तक के विकलांग लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। जब जस्टिस बीआर गवई, अरविंद कुमार और केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि 40 प्रतिशत की बेंचमार्क विकलांगता का होना किसी व्यक्ति को मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने से नहीं रोकता, जब तक कि विशेषज्ञ रिपोर्ट न हो कि उम्मीदवार एमबीबीएस करने में अक्षम है।
दरअसल, ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 1997 के तहत 40 प्रतिशत या उससे अधिक विकलांगता वाले छात्र को मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने से रोकता है। इस एक्ट को चुनौती देते हुए ओमकार नामक छात्र ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए पहले जस्टिस बीआर गवई, अरविंद कुमार और केवी विश्वनाथन की पीठ ने 18 सितंबर के अपने आदेश के लिए विस्तृत कारण बताए।
पीठ ने कहा, "केवल बेंचमार्क विकलांगता का होना किसी उम्मीदवार को एमबीबीएस कोर्स के लिए पात्र होने से अयोग्य नहीं ठहराएगा। उम्मीदवार की विकलांगता का आकलन करने वाले विकलांगता बोर्ड को निश्चित रूप से यह दर्ज करना चाहिए कि उम्मीदवार की विकलांगता कोर्स करने के रास्ते में आएगी या नहीं।" शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि विकलांगता बोर्ड को यह निष्कर्ष निकालने पर भी कारण बताना चाहिए कि उम्मीदवार कोर्स करने के योग्य नहीं है। इसके बाद मंगलवार को उम्मीदवार को एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश लेने की अनुमति मिल गई, क्योंकि मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि वह बिना किसी बाधा के मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर सकता है। पीठ ने कहा कि विकलांगता से पीड़ित उम्मीदवार की एमबीबीएस कोर्स करने की क्षमता की जांच विकलांगता मूल्यांकन बोर्ड द्वारा की जानी चाहिए।
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दरअसल, ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन 1997 के तहत 40 प्रतिशत या उससे अधिक विकलांगता वाले छात्र को मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने से रोकता है। इस एक्ट को चुनौती देते हुए ओमकार नामक छात्र ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए पहले जस्टिस बीआर गवई, अरविंद कुमार और केवी विश्वनाथन की पीठ ने 18 सितंबर के अपने आदेश के लिए विस्तृत कारण बताए।
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पीठ ने कहा, "केवल बेंचमार्क विकलांगता का होना किसी उम्मीदवार को एमबीबीएस कोर्स के लिए पात्र होने से अयोग्य नहीं ठहराएगा। उम्मीदवार की विकलांगता का आकलन करने वाले विकलांगता बोर्ड को निश्चित रूप से यह दर्ज करना चाहिए कि उम्मीदवार की विकलांगता कोर्स करने के रास्ते में आएगी या नहीं।" शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि विकलांगता बोर्ड को यह निष्कर्ष निकालने पर भी कारण बताना चाहिए कि उम्मीदवार कोर्स करने के योग्य नहीं है। इसके बाद मंगलवार को उम्मीदवार को एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश लेने की अनुमति मिल गई, क्योंकि मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि वह बिना किसी बाधा के मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर सकता है। पीठ ने कहा कि विकलांगता से पीड़ित उम्मीदवार की एमबीबीएस कोर्स करने की क्षमता की जांच विकलांगता मूल्यांकन बोर्ड द्वारा की जानी चाहिए।
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