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HECI: भारतीय उच्च शिक्षा आयोग लागू होने से बढ़ सकता है निजीकरण, समिति ने जताई चिंता

Tue, 04 Feb 2025 07:15 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Tue, 04 Feb 2025 07:15 PM IST
सार

HECI: संसदीय समिति ने प्रस्तावित एचईसीआई पर चिंता जताई, जो यूजीसी और एआईसीटीई की जगह लेगा। यह ग्रामीण क्षेत्रों के संस्थानों को बंद करने और निजीकरण बढ़ाने का कारण बन सकता है। समिति ने संतुलित प्रतिनिधित्व और विकेन्द्रीकरण की सिफारिश की है।
 

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Proposed HECI could lead to closure of institutions in rural areas, fuel privatisation: Par panel
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

HECI: एक संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि प्रस्तावित भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (HECI), जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) जैसे मौजूदा नियामकों की जगह लेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। समिति का मानना है कि यह कमजोर बुनियादी ढांचे और संकाय की कमी वाले संस्थानों को बंद करने का कारण बन सकता है, जिससे निजीकरण को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिलेगा।

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राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली समिति ने सुझाव दिया कि नियामक संस्थानों की संरचना को सरल बनाना अधिक प्रभावी रहेगा। इसके अलावा, समिति ने शिक्षा मंत्रालय से यह सुनिश्चित करने को कहा कि नए नियामक निकाय में सभी राज्यों का उचित प्रतिनिधित्व हो और निर्णय लेने की प्रक्रिया अत्यधिक केंद्रीकृत न हो।

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HECI का उद्देश्य और चुनौतियां

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक एकल नियामक निकाय HECI की परिकल्पना की गई है। इसका काम शिक्षा से जुड़े विनियमन, मान्यता, वित्त पोषण और शैक्षणिक मानकों को तय करना होगा। हालांकि, समिति ने पाया कि वर्तमान में कई नियामकों के होने से मानकों में असंगति और निगरानी में कठिनाई आती है। विशेष रूप से, राज्य विश्वविद्यालय, जो 90% से अधिक छात्रों को शिक्षित करते हैं, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय विनियमों के बीच उलझ जाते हैं।

समिति ने यह भी उल्लेख किया कि प्रस्तावित HECI विधेयक केंद्र सरकार को अधिक शक्तियां देता है, लेकिन इसमें राज्यों की भागीदारी सीमित है। इस विधेयक के तहत HECI को यह अधिकार होगा कि वह डिग्री प्रदान करने की अनुमति दे या किसी संस्थान को मानकों पर खरा न उतरने पर बंद कर दे। समिति का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित संस्थानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि कई संस्थान संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।

HECI और मौजूदा नियामक संस्थाएं

नई शिक्षा नीति के तहत प्रस्तावित HECI मौजूदा UGC, AICTE और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की जगह लेगा। UGC गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा की निगरानी करता है, AICTE तकनीकी शिक्षा को नियंत्रित करता है, जबकि NCTE शिक्षक शिक्षा के लिए एक नियामक निकाय है। इससे पहले 2018 में भी HECI के गठन का प्रस्ताव आया था, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।

जब 2021 में धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला, तो HECI को अमल में लाने के प्रयासों को फिर से शुरू किया गया। NEP 2020 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उच्च शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए मौजूदा नियामक ढांचे में व्यापक सुधार की जरूरत है। इसके तहत, नियामक, मान्यता, वित्त पोषण और शैक्षणिक मानकों का निर्धारण अलग-अलग स्वतंत्र निकायों द्वारा किया जाना चाहिए।

समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तावित HECI सभी राज्यों की भागीदारी सुनिश्चित करे और शिक्षा प्रणाली को संतुलित और प्रभावी बनाए।

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