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सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2021: प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री को लिखा खत, दिए ये अहम सुझाव

Mon, 31 May 2021 06:29 PM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Mon, 31 May 2021 06:29 PM IST
सार

  • प्रियंका गांधी ने सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं कक्षा की परीक्षा को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' को खत लिखा है।
  • उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं के संबंध में प्राप्त सुझावों को खत में शामिल कर शिक्षा मंत्री के साथ साझा किया है।

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Priyanka Gandhi writes to Education Minister  suggests various option for CBSE 12th Board Exam 2021
प्रियंका गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं कक्षा की परीक्षा को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' को खत लिखा है। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं के संबंध में प्राप्त सुझावों को खत में शामिल कर शिक्षा मंत्री के साथ साझा किया है। उन्होंने अपने खत में लिखा है, 'बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। इसलिए इन परिस्थितियों में सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं के आयोजन के वक्त मानवीय, मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक लागत को समझना उचित है।

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उन्होंने अपने खत में शिक्षा मंत्री से बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं के संबंध में छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं पर विचार करने का अनुरोध किया है। उन्होंने लिखा है कि बच्चे भारतीयों की भावी पीढ़ी हैं। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के अंतिम वर्ष में पहले ही भारी दबाव का सामना किया है। अधिकांश वक्त उनके स्कूल बंद ही रहे हैं। दोस्तों के साथ बातचीत में बच्चे फलते-फूलते हैं, लेकिन इस वक्त में उनकी दोस्तों से बातचीत भी बंद रही है।
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कई छात्र कोविड-19 से संक्रमित हुए हैं और कईयों ने अपने सगे-संबंधियों को खोया है। इन सब स्थितियों को देखते हुए  छात्रों और अभिभावकों को लगता है कि भीड़-भाड़ वाले परीक्षा केंद्रों में परीक्षा देना बेहद असुरक्षित है। कई बच्चों के घर में बीमार रिश्तेदार, वृद्ध दादा-दादी या बीमार माता-पिता हैं, ऐसे में परीक्षाओं के दौरान उन्हें भी खतरा होगा। प्रियंका गांधी ने अपने खत में सुझाव दिया है कि अन्य देशों की तरह बारहवीं कक्षा के छात्रों का भी आंतरिक मूल्यांकन होना चाहिए।  उनका कहना है कि बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं से पहले एक व्यापक रणनीति होनी चाहिए जिसके द्वारा परीक्षा से पहले छात्रों को टीका लगाया जाना चाहिए। उन्होंने अपने खत में परीक्षा आयोजित के छत्तीसगढ़ मॉडल को अपनाने के लिए विचार करने पर कहा है।

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