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Polytechnic-ITI Fund: केंद्र ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा उपयोगिता प्रमाण पत्र, तभी जारी होगी राशि

Wed, 09 Feb 2022 09:56 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Wed, 09 Feb 2022 09:56 PM IST
सार

सदन में पूरक सवाल पूछते हुए शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने राजीव चंद्रशेखर के सवाल पर आपत्ति जताई और कहा कि महाराष्ट्र सरकार पर लगाए गए आरोप न तर्कसंगत है और न ही मान्य है।

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Polytechnic ITI Fund Centre asks Maharashtra govt to give utilisation certificates for fund release to polytechnics and ITI
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

केंद्रीय कौशल विकास राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने बुधवार को राज्यसभा में महाराष्ट्र सरकार से आईटीआई और पॉलिटेक्निक के लिए धन आवंटित किए जाने को लेकर उपयोगिता प्रमाण पत्र की मांग की। उन्होंने यह बात भाजपा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे के पूरक सवाल के जवाब में कही। 
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राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि महाराष्ट्र के आईटीआई और पॉलिटेक्निक के लिए धन आवंटित किए जा चुके हैं। हालांकि, वे अब तक उन पैसों को जारी नहीं करा पाए हैं। इसका कारण है कि राज्य सरकार इन संस्थानों के प्रतिदिन के प्रशासन की उत्तरदायी है। इसलिए राज्य सरकार को इसके लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करना होगा। इसके बाद ही संस्थानों को राशि जारी की जा सकेगी। 
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सहस्त्रबुद्धे ने इसके पीछे का कारण जानने के लिए सवाल किया और पूछा कि क्या महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ किसी भ्रष्टाचार के आरोप हैं? इसपर जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह काफी चिंता का विषय है कि अब तक राज्य सरकार द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं कराए गए हैं। क्योंकि यह विषय शिक्षा और कौशल संस्थानों से जुड़ें हैं जो हमारे युवाओं के जीवन को प्रभावित करते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर सदस्य के पास उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा न कराने के कारण के बारे में कोई जानकारी है तो मैं इसे अपने अपने पास जमा करने के लिए आमंत्रित करूंगा और खुद इस मामले पर गौर करूंगा।
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सदन में पूरक सवाल पूछते हुए शिवसेना सांसद अनिल देसाई ने राजीव चंद्रशेखर के सवाल पर आपत्ति जताई और कहा कि महाराष्ट्र सरकार पर लगाए गए आरोप न तर्कसंगत है और न ही मान्य है। शिवसेना सांसद की बात का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि माननीय सदस्य को उत्तेजित होने के बजाय महाराष्ट्र सरकार से उपयोगिता प्रमाण पत्र को जमा करने के लिए कहना चाहिए। ताकि संस्थानों के लिए राशि जारी हो सके।   

दरअसल, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के अधीन प्रशिक्षण महानिदेशालय आईटीआई की देखरेख करता है। इन्हें एनसीवीईटी के द्वारा विनयमित किया जाता है। वहीं, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेज उच्च शिक्षा, शिक्षा मंत्रालय के अधीन आते हैं। इन्हें एआईसीटीई के द्वारा विनयमित किया जाता है। हालांकि, इनके प्रशासन की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। आईआईटी की ओर से दो साल का वोकेशनल/कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। पॉलटेक्निक की ओर से तीन साल का डिप्लोमा तो वहीं,  इंजीनियरिंग कॉलेजों के द्वारा 4 साल की तकनीकी शिक्षा दी जाती है। 
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