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Hindi News ›   Education ›   PM Shri Narendra Modi takes review meeting of National Maritime Heritage Complex at Lothal Gujarat

NMH Complex: पीएम मोदी ने की एनएमएचसी की समीक्षा, बोले- इतिहास में समुद्री विरासत की उपेक्षा हुई, बदलाव जरूरी

Tue, 18 Oct 2022 06:30 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Tue, 18 Oct 2022 06:30 PM IST
सार

PM Narendra Modi Live: पीएम मोदी ने कहा कि सैकड़ों वर्षों की गुलामी के कालखंड में भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को उचित स्थान देने की बजाय उसकी उपेक्षा की गई। इसलिए बदलाव जरूरी है। 

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PM Shri Narendra Modi takes review meeting of National Maritime Heritage Complex at Lothal Gujarat
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Social Media

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 18 अक्तूबर को गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर स्थल पर निर्माण कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद शाम पांच बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पीएम मोदी ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत समारोह को संबोधित भी किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने हजारों वर्ष पहले की भारतीय सभ्यता को लेकर बात की। विशेषकर, गुजरात के कच्छ, लोथल में उस जमाने में होने वाले समुद्री कारोबार, बड़े-बड़े जहाजों के निर्माण आदि प्राचीन वैभव को पुन: लौटाने को लेकर प्रतिबद्धता जताई। पीएम मोदी ने कहा कि सैकड़ों वर्षों की गुलामी के कालखंड में भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को उचित स्थान देने की बजाय उसकी उपेक्षा की गई। इसलिए बदलाव जरूरी है।  

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हमारे इतिहास की अनेक गाथाओं को भूला दिया गया

प्रधानमंत्री ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे इतिहास की अनेक गाथाओं को भूला दिया गया है, उन्हें सुरक्षित करने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के रास्ते नहीं खोजे गए। हम इतिहास की उन घटनाओं से कितना कुछ सीख सकते थे। भारत की समुद्री विरासत भी एक ऐसा ही विषय है, जिनके बारे में बहुत कम चर्चा की गई। मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी एक सशक्त नौसेना का गठन किया और विदेशी आक्रांताओं को चुनौती दी। ये सब कुछ भारत के इतिहास का ऐसा गौरवपूर्ण अध्याय है, जिसे नजरअंदाज ही कर दिया गया।  

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प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने और देखने के लिए क्लिक करें 

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हमारे रिश्ते दुनिया की हर सभ्यता के साथ रहे

प्रधानमंत्री ने स्मरण कराया कि सदियों पहले के भारत का व्यापार-कारोबार दुनिया के एक बड़े हिस्से में छाया हुआ था। उन्होंने कहा कि हमारे रिश्ते दुनिया की हर सभ्यता के साथ रहे, तो इसके पीछे भारत की समुद्री शक्ति की बहुत बड़ी भूमिका थी। हजारों वर्ष पहले कच्छ में बड़े बड़े समुद्री जहाजों के निर्माण का पूरा उद्योग चला करता था। पीएम ने कहा कि भारत में बने पानी के बड़े- बड़े जहाज दुनियाभर में बेचे जाते थे विरासत के प्रति इस उदासीनता ने देश का बहुत बड़ा नुकसान किया। ये स्थिति बदली जानी जरूरी है।
 

वही वैभव, वही सामर्थ्य फिर जागृत किया जा रहा

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोथल सिर्फ सिंधु घाटी मान्यता का एक बड़ा व्यापारी केंद्र नहीं था, बल्कि ये भारत के समुद्री सामर्थ्य और समृद्धि का भी प्रतीक था। हजारों वर्ष पहले जिस लोथल को जिस तरीके से एक पोर्ट सिटी के रूप में विकसित किया गया था, वो आज भी बड़े-बड़े जानकारों को हैरान कर देता है। पीएम ने कहा कि लोथल में ये जो हेरिटेज कॉम्प्लेक्स बन रहा है, उसको ऐसे बनाया जा रहा है कि भारत का सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी इस इतिहास को आसानी से जान सके, समझ सके। इसमें अति आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके, बिल्कुल उसी युग को फिर से सजीव करने का प्रयास किया जा रहा है। मोदी ने कहा कि हजारों वर्ष पहले का वही वैभव, वही सामर्थ्य इस धरती पर फिर जागृत किया जा रहा है। मुझे विश्वास है कि ये दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का बहुत बड़ा केंद्र बनेगा। 

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