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Pingali Venkayya: तिरंगे के निर्माता पिंगली वैंकैया की जयंती आज, जानें उनके बारे में खास बातें

Tue, 02 Aug 2022 02:26 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Tue, 02 Aug 2022 02:26 PM IST
सार

पिंगली वेंकैया ने साल 1916 से लेकर 1921 तक दुनियाभर के देशों के झंडों का अध्ययन किया था। इसके बाद साल 1921 में उन्होंने भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का निर्माण किया था।

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Pingali Venkayya Birthday Know How Indian Flag Design Created and History Significance of National Flag
Pingali Venkayya Birthday - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

15 अगस्त, 2022 को देश अपना 76वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इसे देखते हुए भारत सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान की शुरुआत भी की है। वहीं, आज 02 अगस्त को उस महान इंसान की जयंती है, जिन्होंने हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को डिजाइन किया था। जी हां, हम बात कर रहे हैं महान स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया की। वर्ष 1876 में आंध्र प्रदेश में मछलीपट्टनम में जन्मे पिंगली वेंकैया ने कई स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर देश की आजादी में अहम योगदान दिया था। 
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05 वर्ष तक किया था अध्ययन
पिंगली वेंकैया ने साल 1916 से लेकर 1921 तक दुनियाभर के देशों के झंडों का अध्ययन किया था। इसके बाद साल 1921 में उन्होंने भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का निर्माण किया था। इसे बनाने का उद्देश्य देश के सभी लोगों को एक साथ जोड़ने का था। ताकि स्वतंत्रता के लिए पूरे देश को एकजुट किया जा सके। 
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गांधी जी का चरखा स्थापित था
वर्ष 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में महात्मा गांधी ने पिंगली वेंकैया द्वारा तैयार किए गए एक झंडे को स्वीकृति दी थी। इस झंडे में लाल और हरे रंग की पट्टी थी और इसके बीचों-बीच गांधी जी का चरखा स्थापित था। महात्मा गांधी के सुझाव पर ध्वज में सफेद रंग भी शामिल करवाया गया। साल 1931 तक कांग्रेस की हर बैठक में इसी झंडे का प्रयोग होता रहा था। इसके बाद इस झंडे के वर्तमान रंग (केसरिया, सफेद और हरा) सामने आए थे। इसमें आगे चलकर अशोक चक्र को भी जोड़ा गया। 
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जापानी भाषा के थे जानकार
पिंगली वेंकैया जापानी भाषा के काफी जानकार शख्स थे। वह इस परिपक्वता से जापानी बोलते थे कि लोग उन्हें जापान वेंकैया के नाम से भी पुकारते थे। हलांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि पिंगली एक जियोलॉजिस्ट थे और उन्होंने आंध्र प्रदेश नेशनल कॉलेज में लेक्चरर के तौर पर भी काम किया था। वहीं, अपनी युवा आयु में पिंगली ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सिपाही के तौर पर दक्षिण अफ्रीका में भी काम किया था। यहीं पिंगली गांधी के विचारों से बेहद प्रभावित हुए।


 

1963 में हुआ निधन
साल 1963 में 04 जुलाई की तारीख को पिंगली वेंकैया का निधन हो गया था। भारत सरकार ने 2009 में उनकी याद में डाक टिकट जारी किया तो वहीं, साल 2014 में ऑल इंडिया रेडियो के विजयवाड़ा स्टेशन का नाम पिंगली वेंकैया के नाम पर किया गया। पीएम मोदी ने उन्हें याद करते हुए आज लिखा है- मैं महान पिंगली वेंकैया को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। हमें तिरंगा देने के उनके प्रयासों के लिए हमारा देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा। इस पर हमें बहुत गर्व है। हम तिरंगे से शक्ति और प्रेरणा लेते हुए राष्ट्र की प्रगति के लिए कार्य करते रहें।
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