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PPC 2025: अभिनेता विक्रांत और भूमि ने शेयर किए क्रिएटिविटी के टिप्स, फेल्योर को कैसे बनाएं सफलता की सीढ़ी

Sun, 16 Feb 2025 10:35 AM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 16 Feb 2025 10:35 AM IST
सार

परीक्षा पे चर्चा 2025 के छठवें एपिसोड का रविवार (16 फरवरी) को सुबह 10 बजे टेलीकास्ट किया गया। इस एपिसोड में प्रसिद्ध अभिनेता विक्रांत मैसी और भूमि पेडनेकर छात्रों से रूबरू हुए।

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Pariksha Pe Charcha 2025 Sixth Episode, Vikrant Massey, Bhumi Pednekar exam stress tips know update here
Pariksha Pe Charcha 2025 - फोटो : Youtube (Narendra Modi)

विस्तार

Pariksha Pe Charcha 2025: परीक्षा पे चर्चा 2025 के छठवें एपिसोड का रविवार (16 फरवरी) को सुबह 10 बजे टेलीकास्ट किया गया। इस एपिसोड में प्रसिद्ध अभिनेता विक्रांत मैसी और भूमि पेडनेकर छात्रों से रूबरू हुए। अभिनेता विक्रांत मैसी और भूमि पेडनेकर आज छठवें एपिसोड में 'क्रिएटिविटी विद पॉजिटिविटी' यानी अपने काम के प्रति सकारात्मकता बनाए रखते हुए रचनात्मकता को कैसे बढ़ावा दिया जाए, इस विषय पर चर्चा की।
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साथ ही अभिनेता विक्रांत मैसी और भूमि पेडनेकर ने परीक्षा के तनाव और जिंदगी की कहानी से जुड़ी अपने जीवन से जुड़े कई किस्से बताए। दोनों सितारों ने अपने स्कूल के दिनों की यादें ताजा करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने माता-पिता की उम्मीदें, परीक्षा के दबाव और निजी संघर्षों का सामना किया।
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एक ही चीज को गुस्से, खुशी और एक्साइटमेंट में पढ़ें- भूमि पेडनेकर

भूमि पेडनेकर ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज भी बेहद जरूरी हैं। वह खुद एक अच्छी स्टूडेंट थीं, लेकिन इसके साथ ही उन्हें एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में भी बहुत रुचि थी। उन्हें बहुत पहले ही यह समझ में आ गया था कि वह एक्ट्रेस बनना चाहती हैं। परीक्षा के दौरान भी वह दिन में एक घंटे का ब्रेक लेती थीं और बैडमिंटन खेलने का शौक था। 

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उन्होंने छात्रों को बताया कि परीक्षा के दौरान फोकस के लिए ब्रेक लेना बेहद आवश्यक है। शूटिंग के दौरान भी वह 15 मिनट का खाना खा लेती हैं और फिर आधे घंटे की नींद लेती हैं, जिससे उन्हें 8 घंटे तक फोकस के साथ काम करने की ऊर्जा मिलती है। बैडमिंटन खेलना भी उनके लिए ब्रेन को ब्रेक देने का एक तरीका था। उन्होंने यह भी साझा किया कि जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया था, तो वह छोटी थीं, लेकिन उसी समय से उन्होंने यह समझ लिया था कि अपनी ताकत को पहचानना कितना जरूरी है। आज भी जब भी जीवन में कोई चुनौती आती है, वह अपनी ताकत को याद करती हैं, जो उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। आखिरकार, उन्होंने यह कहा कि एक ही चीज को गुस्से, खुशी और एक्साइटमेंट के साथ पढ़ें, तो वह आसानी से याद हो जाती है।

पढ़ने के लिए मत पढ़ो, ज्ञान प्राप्त करने के लिए पढ़ो

अभिनेता विक्रांत मैसी ने कहा कि हमारे समय में इस तरह के प्रोग्राम्स नहीं होते थे, लेकिन पीएम मोदी की पहल के तहत आप लोग काफी खुशकिस्मत हैं। मैं एक औसत छात्र था, खेलकूद में ज्यादा दिलचस्पी थी, लेकिन जब परीक्षा का समय आता था, तो किताबें उठाना ही पड़ता था। मेरी डिश काट दी जाती थी। मैं अपने भतीजे-भतीजियों से हमेशा कहता हूं, "केवल पढ़ने के लिए मत पढ़ो, ज्ञान प्राप्त करने के लिए पढ़ो। खेलोगे तो खिलोगे।"

खुद से संवाद और मेनिफेस्टेशन की आदत डालें

उन्होंने आगे कहा कि अपने दिन में 10 मिनट निकालकर अपनी खुशियों, निराशाओं और लक्ष्यों को लिखें। यह खुद से बातचीत और मेनिफेस्टेशन का तरीका है। साथ ही बच्चों पर अनजाने में दबाव न डालें। उनकी क्षमता को पहचानें और नंबरों के अहंकार में न फंसें। हमेशा अपनी नजरें नीचे और सोच ऊपर रखें।

अच्छे मार्क्स पर अंहकर नहीं करें- विक्रांत मैसी

चर्चा के दौरान विक्रांत मैसी ने छात्रों को किताबों को केवल पढ़ने के बजाय उनका सही तरीके से विज़ुअलाइजेशन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अपने हर प्रयास को सम्मान देना बहुत जरूरी है। विक्रांत ने यह भी बताया कि जब नकारात्मक विचार आएं, तो उन्हें एक बलून में भरकर छोड़ देना चाहिए, ताकि वे हमें परेशान न करें। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप अच्छी नींद नहीं लेते हैं, तो आप संघर्षों का सामना कैसे कर पाएंगे? इसलिए आराम भी बहुत महत्वपूर्ण है।  

विक्रांत ने छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में सफल होने के लिए पढ़ाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अच्छे मार्क्स आने पर अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि सच्ची सफलता विनम्रता में होती है।

परीक्षा का दबाव और माता-पिता की अपेक्षाएं

विक्रांत मैसी ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा, "परीक्षा का तनाव हमेशा मेरे लिए था, लेकिन मैंने इसे अपनी क्षमता साबित करने का अवसर माना। माता-पिता की सहमति से दबाव पैदा हो सकता है, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी मंजिल पर ध्यान केंद्रित करें और खुद पर विश्वास रखें।"



भूमि पेडनेकर ने भी परीक्षा के दौरान तनाव पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, "आजकल के विद्यार्थियों पर बहुत अधिक दबाव होता है, खासकर जब वे माता-पिता की अपेक्षाओं से बचते हैं। लेकिन हमें अपनी आवाज सुननी चाहिए, क्योंकि जब हम खुद पर विश्वास करते हैं, तो कोई भी परीक्षा मुश्किल नहीं लगती।"
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