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Uzbekistan: यूक्रेन से रेस्कयू किए गए 1000 से अधिक छात्रों ने फिर से शुरू की मेडिकल की पढ़ाई, सुनाई आपबीती
Wed, 15 Nov 2023 04:22 PM IST
आकाश कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: आकाश कुमार
Updated Wed, 15 Nov 2023 04:22 PM IST
सार
Uzbekistan: यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए भारत सरकार द्वारा ऑपरेशन गंगा चलाया गया था। इस ऑपरेशन के तहत कई भारतीय छात्रों को निकाला गया। इनमें से ज्यादातर छात्रों ने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर दी है।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
Uzbekistan: युद्ध प्रभावित यूक्रेन से 2021 में निकाले गए सैकड़ों भारतीय एमबीबीएस छात्रों ने उज्बेकिस्तान के एक अग्रणी चिकित्सा विश्वविद्यालय में नए जीवन की शुरुआत के साथ अपनी अपनी पढ़ाई फिर से शुरू कर दी है। इन छात्रों ने सोचा था कि उनकी शैक्षणिक यात्रा समाप्त हो गई है।
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यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए भारत सरकार द्वारा ऑपरेशन गंगा चलाया गया था। इस ऑपरेशन के तहत कुल 18,282 भारतीय नागरिकों को निकाला गया। इन्हीं में से एक बिहार के बेगुसराय के छात्र अमित ने कहा, "मैंने सोचा था कि मैं इसमें सफल नहीं हो पाऊंगा और या तो मर जाऊंगा या यूक्रेन में फंस जाऊंगा। एक बार जब मैं भारत में घर वापस आया, तो मुझे और मेरे परिवार को राहत मिली, लेकिन फिर आगे क्या होगा इसके बारे में अनिश्चितता का कभी न खत्म होने वाला चक्र शुरू हुआ।"
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अमित ने आगे कहा, "मैंने यूक्रेन में अपने एमबीबीएस के तीन साल पूरे कर लिए थे और दोबारा शुरू करना या कुछ और करना कोई ऐसा विकल्प नहीं था जिस पर मैं विचार करना चाहता था। बाद में मैंने उज्बेकिस्तान जाने का फैसला किया।" उनका कहना है कि समरकंद में रहने का खर्च यूक्रेन की तुलना में अधिक है लेकिन वह अपनी शिक्षा जारी रखने में सक्षम होने से खुश हैं।
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पंजाब के फिरोजपुर की तन्वी वाधवा, जो यूक्रेन में बुकोविनियन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रही थीं, एक सेमेस्टर के नुकसान के कारण विश्वविद्यालय में शामिल होने को लेकर आशंकित थीं।
वाधवा के साथ उसी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले मेरठ के दिव्यांश ने कहा कि उज्बेकिस्तान के विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी में शिक्षण और सीखने की पेशकश की जाती है और पाठ्यक्रम भी उसी तर्ज पर है।
फरवरी 2021 में जब रूसी आक्रमण शुरू हुआ तो लगभग 19,000 भारतीय छात्र यूक्रेन में पढ़ रहे थे। अनुमान के मुताबिक, लगभग 2,000 भारतीय छात्र यूक्रेन वापस चले गए हैं और वे ज्यादातर पूर्वी यूरोपीय देश के पश्चिमी हिस्से में रह रहे हैं।
यूक्रेन से निकाले जाने और अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए दूसरे देशों के विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित होने के बाद कई भारतीय मेडिकल छात्रों के पास कोई विकल्प नहीं बचा था। कई लोग रूस, सर्बिया और अन्य यूरोपीय देशों में चले गए हैं।
समरकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जफर अमीनोव ने कहा कि जब युद्ध छिड़ गया, तो भारतीय दूतावास ने उनसे संपर्क किया और पूछा कि क्या प्रभावित छात्र स्थानांतरण की मांग कर सकते हैं।
"हमने ऐसे छात्रों की आवश्यकताओं का मूल्यांकन किया और फिर अंततः निर्णय लिया कि उन्हें समकक्षता प्रदान करने के लिए एक सेमेस्टर बैक के साथ नामांकन करना एक व्यवहार्य विकल्प होगा। फिर हमने स्थानांतरण की सुविधा के लिए एक टीम का गठन किया और इन छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था भी की। हमने 30 और छात्रों को काम पर रखा है। भारतीय शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उच्चारण संबंधी कोई समस्या न हो।''
कर्नाटक की एक छात्रा दीपिका कैडाला जयरमैया ने कहा कि युद्ध की स्थिति को सामने देखने के बाद, एक शांतिपूर्ण देश में जाना प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, "मैंने युद्ध के बारे में केवल इतिहास की किताबों में पढ़ा है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस स्थिति को खुद देखूंगी। जब यह स्पष्ट हो गया कि यूक्रेन जाना अब कोई विकल्प नहीं है, तो मैंने उज्बेकिस्तान में अपनी चिकित्सा यात्रा फिर से शुरू करने का फैसला किया।"
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