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Report: पहली बार एक करोड़ हुई स्कूली शिक्षकों की संख्या, ड्रॉपआउट दर में आई कमी; मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े

Thu, 28 Aug 2025 05:34 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Thu, 28 Aug 2025 05:34 PM IST
सार

Number Of Teachers In India: एक ऐतिहासिक जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि सत्र 2024-25 में देश भर में स्कूली शिक्षकों की संख्या पहली बार एक करोड़ के आंकड़े को पार कर गई। रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 के दौरान स्कूलों में छात्रों के स्कूल में बने रहने की दर, यानी रिटेंशन रेट और सकल नामांकन अनुपात (GER) में वृद्धि हुई।
 

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Number of school teachers crossed one crore for first time in 2024-25, Education Ministry shared data
UDISE+ Report 2024-25 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

UDISE+ Report 2024-25: शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि सत्र 2024-25 में देश भर में स्कूली शिक्षकों की संख्या पहली बार एक करोड़ के आंकड़े को पार कर गई। आंकड़े शिक्षा मंत्रालय के यूडीआईएसई प्लस प्लेटफॉर्म द्वारा साझा किए गए हैं। UDISE Plus, यानी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन, एक डेटा संग्रहण प्लेटफॉर्म है, जिसे शिक्षा मंत्रालय संचालित करता है। यह देशभर के स्कूल शिक्षा संबंधी आंकड़े एकत्रित करने और उनका विश्लेषण करने में मदद करता है।

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शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, किसी भी शैक्षणिक वर्ष में पहली बार देश भर में स्कूली शिक्षकों की कुल संख्या 2024-25 के दौरान एक करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।

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2022-23 से लगातार बढ़ हही शिक्षकों की संख्या

रिपोर्ट के अनुसार, "शिक्षकों की संख्या में यह वृद्धि छात्र-शिक्षक अनुपात सुधारने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय शिक्षक असमानताओं को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 2022-23 से यह संख्या लगातार बढ़ रही है। 2022-23 की तुलना में रिपोर्टिंग वर्ष में शिक्षकों की संख्या में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।"

छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार

छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) पर नजर डालें तो UDISE Plus के आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न शैक्षिक स्तरों पर PTR इस प्रकार है:

  • प्राथमिक स्तर: 1:10
  • तैयारी/प्रिपरेटरी स्तर: 1:13
  • मध्यम स्तर: 1:17
  • माध्यमिक स्तर: 1:21


ये अनुपात राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) द्वारा सुझाए गए 1:30 के मानक की तुलना में काफी बेहतर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि, "सुधरे हुए PTR से शिक्षकों और छात्रों के बीच व्यक्तिगत ध्यान और मजबूत संवाद संभव होता है, जो सीखने के अनुभव और शैक्षणिक परिणामों को बेहतर बनाता है।"
 

स्कूल छोड़ने की दर में कमी आई

साल 2024-25 में ड्रॉपआउट दर में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई है। प्रिपरेटरी स्तर पर यह 3.7 प्रतिशत से घटकर 2.3 प्रतिशत, मध्य स्तर पर 5.2 प्रतिशत से घटकर 3.5 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 10.9 प्रतिशत से घटकर 8.2 प्रतिशत हो गई। 
 

स्तर पिछले वर्ष रिपोर्टिंग वर्ष
प्रारंभिक 3.7% 2.3%
मध्य 5.2% 3.5%
माध्यमिक 10.9% 8.2%


रिपोर्ट में कहा गया है कि, "यह गिरावट छात्रों के स्कूल में बने रहने में सुधार और बच्चों को शिक्षा में जुड़े रखने के लिए उठाए गए कदमों की सफलता को दर्शाती है। सभी स्तरों पर लगातार कमी यह संकेत देती है कि स्कूल अब छात्रों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील और सहायक बन रहे हैं।"

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छात्रों की स्कूल में बने रहने की दर भी सुधरी

छात्रों की स्कूल में बने रहने की दर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। 2024-25 में विभिन्न स्तरों पर रिटेंशन दर इस प्रकार रही:

  • प्राथमिक स्तर: 98.0% से बढ़कर 98.9%
  • प्रिपरेटरी स्तर: 85.4% से बढ़कर 92.4%
  • मध्यम स्तर: 78.0% से बढ़कर 82.8%
  • माध्यमिक स्तर: 45.6% से बढ़कर 47.2%


रिपोर्ट के अनुसार, "माध्यमिक स्तर पर विशेष रूप से छात्रों की रिटेंशन दर में सुधार का एक प्रमुख कारण अधिक स्कूलों में माध्यमिक शिक्षा की उपलब्धता है। इससे पहुंच बढ़ी और निरंतर नामांकन को प्रोत्साहन मिला। कुल मिलाकर, बढ़ती रिटेंशन दर शिक्षा प्रणाली में प्रगति का स्पष्ट संकेत है और लक्षित पहलों के प्रभाव को दर्शाती है।"

शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या घटी

आंकड़े यह भी बताते हैं कि शून्य नामांकन (Zero Enrolment) वाले स्कूलों और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में लगातार गिरावट आई है। विशेष रूप से, एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या पिछले साल की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत कम हुई, जबकि शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 38 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।

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