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AI: सीतांशु यशश्चंद्र का अहमदाबाद विश्वविद्यालय में संदेश, एआई कुशल तो करेगा; लेकिन खो देगा सोचने का हुनर
Fri, 16 May 2025 10:01 AM IST
शाहीन परवीन
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शाहीन परवीन
Updated Fri, 16 May 2025 10:01 AM IST
सार
Sitanshu Yashchandra: प्रसिद्ध कवि यशश्चंद्र ने शैक्षणिक संस्थानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरों के बारे में सावधान किया है और बताया कि यह तकनीक छात्रों को कुशल तो बनाएगी, लेकिन सोचने की क्षमता कमजोर कर सकती है।
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Artificial Intelligence(AI), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई)
- फोटो : Freepik
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विस्तार
AI: प्रसिद्ध कवि और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सीतांशु यशश्चंद्र ने गुरुवार को शैक्षणिक संस्थानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खतरों के बारे में आगाह किया। उन्होंने कहा कि यह नई तकनीक छात्रों को तो कुशल बनाएगी, लेकिन उनकी सोचने की क्षमता को कमजोर कर सकती है। यशश्चंद्र अहमदाबाद विश्वविद्यालय के 15वें दीक्षांत समारोह में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने बताया कि एआई के विपरीत, इंसानों के पास यह विकल्प होता है कि वे कोई काम करना चाहते हैं या नहीं, और यह भी सोचने का मौका होता है कि किसी कार्य को करना सही है या नहीं।
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गुजराती साहित्य के प्रसिद्ध शिक्षाविद और विद्वान ने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शेक्सपियर की तरह एक सॉनेट लिख सकता है, अगर हम इसे ऐसा करने के लिए कहें। यह कालिदास की तरह एक कविता भी लिखेगा और यह अंतर करना मुश्किल होगा कि यह कालिदास द्वारा लिखी गई है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा। लेकिन, भारतीयों के रूप में हमें रुककर पूछना चाहिए कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या नहीं कर सकता है।"
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उन्होंने कहा, "यह दो काम नहीं कर सकता। पहला, यह खुद से यह नहीं पूछ सकता कि 'क्या मैं लिखना चाहता हूं' क्योंकि अगर इसे ऐसा करने के लिए कहा जाएगा तो यह लिख देगा। एआई के पास चुनने की स्वतंत्रता नहीं है। इसलिए इस तरह के संस्थान में विभिन्न विषयों को अपने छात्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पैदा करने के खतरे का सामना करना पड़ता है। यह एक बड़ा खतरा है, न केवल भारत में बल्कि अन्य जगहों पर भी।"
उन्होंने आगे पूछा कि क्या विश्वविद्यालय प्रशिक्षण संस्थानों या सर्कस में बदल रहे हैं।
उन्होंने कहा, "क्या हम एक सर्कस हैं जहां कोई रिंग मास्टर हमें बताता है कि क्या करना है? मैंने यूरोपीय विश्वविद्यालयों और अमेरिकी विश्वविद्यालयों को देखा है। वही हो रहा है, वे प्रशिक्षण संस्थानों में बदल रहे हैं, और कोई निर्णय लेता है... (हम) विचारहीन लेकिन कुशल लोगों का उत्पादन कर रहे हैं।"
"क्या मुझे इसे लिखना चाहिए" के दूसरे प्रश्न की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि यह कुछ ऐसा है जिसे "कृत्रिम रूप से बनाए गए स्नातक छात्र और विशेषज्ञ नहीं पूछ सकते हैं"।
विश्वविद्यालय ने एक विज्ञप्ति में कहा, "दीक्षांत समारोह में विभिन्न विषयों में 833 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। छह डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान की गई, जबकि अकादमिक उत्कृष्टता और नेतृत्व के लिए पांच छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।"
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