फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   National Education Policy 2020 News in Hindi: Option To Conduct Board Examination On Semester Or Modular Model In New Education Policy 2020

Education Policy 2020: बोर्ड परीक्षा सेमेस्टर या मोड्यूलर मॉडल पर कराने का विकल्प नौवीं से विषय चुनने की आजादी

Thu, 30 Jul 2020 11:06 AM IST
संजीव कुमार झा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 30 Jul 2020 11:06 AM IST
विज्ञापन
National Education Policy 2020 News in Hindi: Option To Conduct Board Examination On Semester Or Modular Model In New Education Policy 2020
student at school - फोटो : पीटीआई

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षा को लेकर अभिभावकों और बच्चों का तनाव कम होगा। बोर्ड परीक्षा वार्षिक, सेमेस्टर या मोडयूलर मॉडल पर आधारित होगी। कक्षा तीन, पांच व आठवीं में भी परीक्षाएं होगीं। 10वीं और 12वीं में होने वाली बोर्ड परीक्षा के लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 24 से ज्यादा विषय न हों।

विज्ञापन


एक बार फेल या अच्छा प्रदर्शन न करने पर छात्र को दो या उससे अधिक बार मौका मिलेगा। एनसीईआरटी अगले वर्ष तक नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2020 तैयार करेगी। अब तक स्कूली शिक्षा नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2005 के तहत चल रही है। 2022 की परीक्षा नए पाठ्यक्रम से होगी।
विज्ञापन


ज्ञान और रोजगार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की तैयारी 9वीं से 12वीं कक्षा तक चलेगी। छात्रों के पास नौंवी में विषय चुनने का विकल्प होगा। इसमें वे विज्ञान, गणित के साथ-साथ फैशन डिजाइनिंग विषय भी चुन सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं, 2021 सत्र के लिए सीबीएसई समेत प्रदेश शिक्षा बोर्ड दसवीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा के लिए व्यवहार्य मॉडल तैयार करेंगे। स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल ने कहा कि बोर्ड परीक्षा में बदलाव को लेकर कई सुझाव हैं। इसमें साल में दो बार परीक्षा करना, दो हिस्सों वस्तुनिष्ठ और व्याख्यात्मक श्रेणियों में विभाजित करना आदि शामिल है।

नहीं थोपी जाएगाी कोई भाषा

पांचवीं और राज्य चाहें तो आठवीं तक की पढ़ाई का माध्यम मातृभाषा, स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषा होगी। स्कूल के सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में संस्कृत विकल्प के रूप में चुन सकेंगे। त्रि-भाषा फॉर्मूले में भी यह विकल्प होगा। किसी भी विद्यार्थी पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी।

देश की अन्य भाषायें और साहित्य भी विकल्प के रूप में उपलब्ध होंगे। विदेशी भाषाओं को भी माध्यमिक शिक्षा स्तर पर विकल्प के रूप में चुना जा सकेगा। भारतीय संकेत भाषा यानी साइन लैंग्वेज (आईएसएल) को देश भर में मानकीकृत किया जाएगा।

छात्रों की बुनियादी योग्यता पर जोर

बच्चों को मोटी-मोटी किताबें नहीं पढ़नी पड़ेंगी। नई नीति में बच्चों को हर विषय के मूल सिद्धांत को आसान तरीकों से समझाया जाएगा। ऐसे में पूरा जोर लिखित परीक्षा की जगह प्रयोगात्मक परीक्षा पर होगा। पढ़ाई का फोकस और कांसेप्ट आइडिया, एप्लीकेशन, प्रैक्टिकल, प्राब्लम साल्विंग पर रहेगा। सरकार का मानना है कि दो से आठ साल तक बच्चा सबसे अधिक सीखता है।

इसलिए इस उम्र में सीखने पर जोर दिया जाए। बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को सही से सीखने के लिए जरूरी मानते हुए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन की स्थापना की जाएगी।

एनसीईआरटी आठ वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (एनसीपीएफईसीसीई) के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा विकसित करेगा। एक विस्तृत और मजबूत संस्थान प्रणाली के माध्यम से प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) मुहैया कराई जाएगी। इसमें आंगनबाडी और प्री-स्कूल भी शामिल होंगे जिसमें इसीसीई शिक्षाशास्त्र और पाठ्यक्रम में प्रशिक्षित शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होंगे।

छात्र करेंगे मूल्यांकन, देंगे प्रगति रिपोर्ट 

स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों में मेलजोल बढ़ाने के लिए प्रगति रिपोर्ट कार्ड योजना शुरू होगी। इसमें छात्र पढ़ाई को छोड़कर अन्य एक्टिविटी पर एक-दूसरे का मूल्यांकन करेंगे। इसके आधार पर प्रगति रिपोर्ट बनेगी। प्रगति कार्ड एक बहुआयामी होगा। इसमें प्रत्येक छात्र की विशिष्टता विस्तार से पता चलेगी और संज्ञानात्मकता की जानकारी भी मिलेगी। इसमें छात्र के व्यवहार, बातचीत, मदद, टीम वर्क आदि का आंकलन होगा।

छात्रों के लिए वित्तीय सहायता

एससी, एसटी, ओबीसी और अन्य श्रेणियों से जुड़े हुए छात्रों की योग्यता को प्रोत्साहित किया जाएगा। छात्रवृत्ति पाने के लिए छात्रों को बढ़ावा देने और उसकी प्रगति की निगरानी करने के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल का विस्तार किया जाएगा।

निजी उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों को बड़ी संख्या में मुफ्त शिक्षा और छात्रवृत्तियों की पेशकश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कस्तूरबा गांधी स्कूलों का विस्तार 12वीं कक्षा तक होगा। जिनकी इकलौती संतान बेटी हो और बेटियों को शिक्षा में बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं बनेंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed