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KIIT: छात्रा की मौत पर विवाद के बाद नेपाली विद्यार्थियों को परिसर लौटने में लग रहा है डर, जानें पूरा मामला

Wed, 19 Feb 2025 01:12 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Wed, 19 Feb 2025 01:12 PM IST
सार

KIIT Suicide case: केआईआईटी, भुवनेश्वर में नेपाली छात्र एक साथी छात्रा की कथित आत्महत्या के बाद हॉस्टल लौटने से डर रहे हैं। केआईआईटी में 20 वर्षीय छात्र की आत्महत्या के विरोध में प्रदर्शन करने वाले करीब 1,000 नेपाली छात्रों को निलंबित कर दिया गया। हालांकि, हस्तक्षेप के बाद केआईआईटी ने माफी मांगी और उन्हें वापस कैंपस में आमंत्रित किया।

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Nepalese students fear returning to KIIT campus after row over student's death
KIIT - फोटो : PTI

विस्तार

KIIT Student Suicide: नेपाली छात्रों ने बुधवार को यहां कलिंगा औद्योगिक प्रौद्योगिकी संस्थान (KIIT) परिसर में लौटने को लेकर डर व्यक्त किया है। यह डर हिमालयी देश के 20 वर्षीय छात्र की कथित आत्महत्या के बाद घटित घटनाओं के बाद पैदा हुआ है।

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प्रकृति लामसाल नामक छात्रा का शव रविवार को उसके छात्रावास के कमरे की छत से लटका पाए जाने के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सोमवार को केआईआईटी में पढ़ रहे लगभग 1,000 नेपाली छात्रों को निलंबन नोटिस जारी कर तत्काल परिसर छोड़ने को कहा गया।
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हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद, केआईआईटी अधिकारियों ने माफी मांगी और नेपाली छात्रों से परिसर में लौटने का अनुरोध किया।

लेकिन छात्रों ने कहा कि नेपाली छात्रों को जो कष्टदायक अनुभव हुए हैं, उनमें उन्हें परिसर से बाहर निकाल कर कटक रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया जाना तथा कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की घटनाएं शामिल हैं, जिससे वे काफी आहत हैं तथा उनमें से कई छात्र वापस लौटने से डर रहे हैं।

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प्रीति ने बताया अपना दर्दनाक अनुभव 

नेपाल की छात्रा प्रीति ने बताया, "हमें बिना किसी गलती के छात्रावास खाली करने के लिए मजबूर किया गया। नेपाल के छात्रा प्रकृति की मौत से नाराज थे, क्योंकि अधिकारियों से उसकी पिछली अपील (उसके पूर्व प्रेमी द्वारा कथित ब्लैकमेल के बारे में) को नजरअंदाज कर दिया गया था। उसने हताश होकर आत्महत्या कर ली।"

सोमवार को हुए दर्दनाक अनुभव को बताते हुए प्रीति ने कहा, "हमें जबरन बस में बिठाया गया और रेलवे स्टेशन के पास ऐसी जगह पर उतार दिया गया, जहां न तो कोई दुकान थी और न ही पानी। हमारा क्या कसूर था? अब वे (केआईआईटी के डीन और अन्य अधिकारी) हमें प्यार से वापस जाने के लिए कह रहे हैं। क्या कोई उन पर विश्वास कर सकता है?"

मंगलवार को निदेशकों सहित पांच कर्मचारी गिरफ्तार 

नेपाली छात्रों को परेशान करने के आरोप में मंगलवार को संस्थान के निदेशकों सहित पांच केआईआईटी कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी-2 की अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।

इससे पहले, 21 वर्षीय केआईआईटी छात्र को महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

सूत्रों ने बताया कि मृतक का शव आज नेपाल ले जाया जाएगा। उसके पिता सुनील लामसाल और परिवार के अन्य सदस्य पिछले दो दिनों से शहर में डेरा डाले हुए हैं।
 

वर्तमान में 100 नेपाली छात्र परिसर में है मौजूद

ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने पहले कहा था कि वर्तमान में 100 नेपाली छात्र परिसर में हैं और लगभग 800 अन्य स्थानों पर हैं।

मंत्री ने कहा, "वे कोलकाता, पटना या रांची चले गए होंगे। उन्हें वापस लाना केआईआईटी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। वे हमारे मेहमान हैं।"

सूत्रों ने बताया कि अधिकांश नेपाली छात्र हिमालयी राष्ट्र में अपने घर लौट चुके हैं। हालांकि, न तो राज्य सरकार और न ही केआईआईटी अधिकारियों ने अब तक परिसर में लौटने वाले छात्रों की संख्या के बारे में जानकारी साझा की है।

ओडिशा सरकार ने छात्र की अप्राकृतिक मौत के बाद छात्रों पर कथित कार्रवाई के संबंध में मंगलवार को कार्रवाई रिपोर्ट जारी की थी।

जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित 

इसने कथित आत्महत्या की परिस्थितियों और विश्वविद्यालय प्राधिकारियों द्वारा नेपाली छात्रों को परिसर से बाहर निकालने की जांच के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है।

इस बीच, कई छात्रों, युवाओं और राजनीतिक संगठनों ने घटना को लेकर परिसर के बाहर अपना आंदोलन जारी रखा।

केआईआईटी ने कहा, "हमारी प्रिय छात्रा प्रकृति लामसाल के असामयिक निधन पर गहरा शोक है। आज केआईआईटी के सभी वरिष्ठ पदाधिकारी अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करने और उनके परिवार, दोस्तों और छात्र समुदाय के साथ एकजुटता दिखाने के लिए एकत्र हुए। हम सभी के लिए न्याय और समर्थन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी आत्मा को शांति मिले।"
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