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NEET: आईएएस बनने का सपना देखने वाली आकांक्षा को बनना है न्यूरो सर्जन 

Mon, 19 Oct 2020 11:03 AM IST
दीप्ति मिश्रा दीप्ति मिश्रा, नई दिल्ली 
दीप्ति मिश्रा, नई दिल्ली  Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Mon, 19 Oct 2020 11:03 AM IST
सार

  • आठवीं तक आईएएस बनने का सपना देखा
  • नौवीं कक्षा से डॉक्टर बनने की राह पकड़ ली 

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Neet result 2020 Akanksha who dreams of becoming an IAS, hope to become a neurosurgeon
akansha singh - फोटो : social media

विस्तार

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की बेटी आकांक्षा सिंह ने नीट-2020 की परीक्षा में देश में दूसरा स्थान हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। आकांक्षा नीट परीक्षा में 100 फीसदी अंक लाकर कुछ कर दिखाने के सपने देखने वाली देश की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। अमर उजाला डिजिटल ने आकांक्षा से बात की, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पसंद-नापसंद जैसे कई मुद्दों पर बात हुई। पढ़िए इन मुद्दों पर क्या कहा आकांक्षा सिंह ने ....

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डॉक्टर बनने की प्रेरणा ऐसे मिली : 
आकांक्षा ने बताया, मेरे पिता राजेंद्र कुमार राव वायुसेना में कार्यरत थे। अब सेवानिवृत्त हो चुके है। पिता से देश सेवा के बारे में सुनकर पली-बढ़ी। मैं भी चाहती थी कि देश के लिए कुछ करूं, इसलिए आठवीं तक सिविल सर्विसेज की तैयारी करने और आईएएस बनने का सपना देखती थी। लेकिन नौवीं कक्षा में आने पर एम्स दिल्ली का एक वीडियो देख रही थी, जिसमें न्यूरो सर्जन क्षेत्र के बारे में बताया जा रहा था। उसी पल मन में विचार आया कि मैं आईएएस नहीं डॉक्टर बनूंगी। इसके बाद मैंने चिकित्सा क्षेत्र में आने की तैयारी शुरू कर दी। 10वीं तक की पढ़ाई कुशीनगर से की। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई प्रगति पब्लिक स्कूल, दिल्ली से की। इस दौरान मैं नीट की तैयारी भी करती रही। शायद वो वीडियो ही है, जिसने मुझे डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित किया है। 
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पिता ने कहा, देश सेवा करो : 
पिता वायुसेना में और मां शिक्षिका हैं, ऐसे में घर का माहौल हमेशा अनुशासित रहा है। हमेशा पढ़ाई-लिखाई पर विशेष ध्यान दिया गया। मुझे करियर में क्या चुनना है, इसमें मम्मी-पापा ने कभी दखलअंदाजी नहीं की। उन्होंने मुझ पर अपने सपने नहीं थोपे। मुझे सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी आजादी दी। पापा ने कहा कि देशहित के काम करो, देश की सेवा करो, देश के काम आओ फिर वो चाहें किसी भी तरह करो, सैनिक बनकर या फिर डॉक्टर बनकर उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जब कभी अंक कम आए और मैं निराश हुई, तब उन्होंने मुझे और मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। 

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Neet result 2020 Akanksha who dreams of becoming an IAS, hope to become a neurosurgeon
परिवार के साथ आकांक्षा - फोटो : Amar Ujala

परीक्षा की तारीख बढ़ाने के पक्ष में नहीं थी : 
आकांक्षा ने कहा कि कोरोना काल में नीट परीक्षा आयोजित कराए जाने का देश भर में विरोध हो रहा था। हालांकि, विरोध करने वालों की अपनी चिंताएं थीं। लेकिन सच कहूं, तो मैं चाहती थी कि नीट की परीक्षा जल्द से जल्द आयोजित कराई जाए। बार-बार रिवीजन करना मुश्किल हो रहा था। कुछ भूल न जाऊं यह दबाव बना रहता था और फिर सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा कराए जाने के पक्ष में फैसला सुनाया, तब मैंने थोड़ी राहत महसूस की थी। 

मेरा सपना रैंक लाना नहीं था : 
नीट की दूसरी टॉपर ने कहा कि उनके और शोएब आफताब के अंक समान थे, लेकिन ट्राई ब्रेकर नीति के चलते मुझे दूसरे नंबर पर रखा गया। आकांक्षा ने कहा, ''टॉपर कोई एक ही बन सकता है। मेरा सपना रैंक नहीं दिल्ली एम्स में पढ़ने का था, जो पूरा हो जाएगा। मेरे लिए रैंक मैटर नहीं करती। रही नियमों की बात, तो बनाने वालों ने बहुत सोच-समझ कर बनाए हैं, अगर कभी बदलाव की जरूरत महसूस होगी, तो वे इसमें बदलाव करेंगे।''

Neet result 2020 Akanksha who dreams of becoming an IAS, hope to become a neurosurgeon
माता पिता के साथ आकांक्षा - फोटो : Amar Ujala

न्यूरो सर्जन बनना चाहती हैं आकांक्षा : 
उन्होंने कहा कि उन्हें दिल्ली एम्स मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर न्यूरो सर्जन बनना है। उसके बाद न्यूरो फील्ड में रिसर्च करनी है ताकि गरीबों की मदद कर सकूं।

अगर मौका मिला तो ग्रामीण क्षेत्र में सेवा दूंगी : 
आकांक्षा ने बताया कि वह ग्रामीण परिवेश से आती हैं। इसलिए ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं। अगर डॉक्टर बनने के बाद उन्हें ग्रामीण क्षेत्र या शहरी क्षेत्र में चुनने का मौका मिला, तो वह ग्रामीण क्षेत्र में डॉक्टर के तौर पर सेवाएं देना चुनेंगी। 

डॉक्टर्स से अपील, अपने प्रोफेशन के साथ ईमानदारी बरतें : 
आकांक्षा ने कहा, वह इस बात से अवगत हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी अस्पतालों की हालत अच्छी नहीं है। दवाएं हैं, तो डॉक्टर नहीं। वह सरकारी अस्पतालों की हालत सुधारने के पक्ष में हैं। आकांक्षा ने सरकारी डॉक्टर्स से अपील की कि आप नोबेल प्रोफेशन में हैं। आपका कर्तव्य लोगों का इलाज करना है। मेरा आप लोगों से अनुरोध है कि अपने प्रोफेशन के साथ ईमानदारी बरतें। मरीजों के प्रति अपना फर्ज निभाएं।

फेवरिट लिस्ट में अरजीत सिंह : 
पसंद-नापसंद के मुदृदे पर बात करते हुए आकांक्षा सिंह ने बताया कि भारत में उनकी पसंदीदा जगह अंडमान निकोबार है। यहां जाना और वक्त बिताना उनका सपना है। वह पढ़ाई के दौरान मूड फ्रेश करने के लिए गाने सुनती है। अरजीत सिंह के गाने उनकी फेवरिट लिस्ट में रहते है। 

दबाब में न आएं, सेल्फ स्टडी करें : 
तैयारी करने वाले छात्रों के लिए आकांक्षा सिंह ने कहा कि मेहनत करें, सफलता जरूरी मिलेगी। अगर सफलता नहीं मिलती है, तो दोबारा प्रयास करें। कोचिंग के बिना भी परीक्षा पास की जा सकती है, इसलिए किसी तरह के दबाव में आए बिना सेल्फ स्टडी करें।

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