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MBBS दाखिले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये चार जरूरी निर्देश

Tue, 17 Dec 2019 11:24 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Tue, 17 Dec 2019 11:24 AM IST
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NEET 2020 MBBS admission supreme court new guidelines in special cases
सांकेतिक तस्वीर

एमबीबीएस कोर्सेज में दाखिले के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने चार नए निर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस प्रवेश के मामले में लागू होंगे। गौरतलब है कि एमबीबीएस कोर्सेज में प्रवेश राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET - National Eligibility cum Entrance Examination) के जरिए मिलता है।

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  • कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए हैं, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू होंगे।
  • ये सुनवाई एस कृष्ण श्रद्धा और आंध्र प्रदेश राज्य व अन्य के बीच के मामले को लेकर की गई।
  • क्या था मामला - स्पोर्ट्स व खेल कोटा के तहत आरक्षण के सही अनिवार्य दस्तावेज जमा करने के बावजूद अभ्यर्थी को कॉलेज ने एमबीबीएस कोर्स में दाखिला नहीं दिया था। जिसके बाद अभ्यर्थी ने तुरंत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन जब तक उसकी याचिका पर सुनवाई शुरू हुई, शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका था। तब हाईकोर्ट ने कहा कि क्योंकि दाखिले का समय खत्म हो चुका है, अब इस मामले पर कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता। फिर कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पांच लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का निर्देश दिया।
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आगे पढ़ें.. सुप्रीम कोर्ट के वो चार निर्देश, जो MBBS में दाखिला चाहने वाले हर अभ्यर्थी के काम आएंगे

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मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने इसे आधार बनाते हुए चार निर्देश दिए जो देशभर में मान्य होंगे।
1. मामलों का तुरंत निपटारा : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'जब कोई अभ्यर्थी बिना देर किए कोर्ट में याचिका लगाता है, तो प्राथमिकता के साथ उसके मामले के निपटारे के लिए हर संभव कोशिश की जानी चाहिए।'

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2. अतिरिक्त सीट जोड़ें : अपवाद की कुछ परिस्थितियों में, अगर कोर्ट याचिका करने वाले अभ्यर्थी को कानूनी तौर पर सही पाता है, तो उसके लिए कॉलेज में सीट बढ़ाए जाने का आदेश दिया जा सकता है। हालांकि एक या दो से ज्यादा सीटें नहीं बढ़ा सकते। साथ ही ये भी ध्यान रखना होगा कि कॉलेज में दाखिले की अंतिम तिथि से एक महीने बाद तक ही सीट बढ़ाकर दाखिला देने का निर्देश दिया जा सकता है। वो भी दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में।

इसके अलावा कोर्ट मेरिट में सबसे नीचे (श्रेणीवार) के अभ्यर्थी का दाखिला रद्द करने का भी आदेश दे सकता है, अगर याचिकाकर्ता उससे ज्यादा मेरिट पर है। हालांकि दाखिला रद्द करने का आदेश देने से पहले संबंधित विद्यार्थी को उसकी बात रखने का अवसर देना जरूरी होगा।

3. अगले साल दाखिला : अगर अभ्यर्थी कानूनी तौर पर सही है, लेकिन कोर्ट को लगता है कि उस साल किसी भी तरीके से याचिकाकर्ता को दाखिले की राहत नहीं दी जा सकती, तो ठीक अगले साल दाखिला दिए जाने का फैसला सुनाया जा सकता है। या फिर अगर ये पाया गया कि मेधावी छात्र को गलत तरीके से प्रवेश देने से मना किया गया है, तो संस्थान के मैनेजमेंट कोटा सीटों की संख्या कम की जा सकती है।

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4. मुआवजा:  सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि संस्थान की गलती के कारण किसी अभ्यर्थी का साल बर्बाद होने पर मुआवजा एक अतिरिक्त सुधार के तौर पर दिया जा सकता है। लेकिन यह पूर्ण सुधार नहीं हो सकता।

इसके साथ-साथ कोर्ट ने कहा कि ये निर्देश मेडिकल के पीजी कोर्सेज में दाखिले के समय लागू नहीं होंगे।

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