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National Education Day: जानें स्कूलों को CBSE ने क्या दिया आदेश?
Sun, 10 Nov 2019 03:39 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Sun, 10 Nov 2019 03:39 PM IST
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ( CBSE ) ने देश के अपने संबद्ध स्कूलों को 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाने के लिए कहा है। राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा बोर्ड में भारत और विदेशों में 20,000 से अधिक स्कूल हैं। बोर्ड ने स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाने के लिए कहा है। बता दें कि मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर ये दिन मनाया जाता है।
सिर्फ इकना ही नहीम बोर्ड ने स्कूलों को हैशटैग '#cbsened' के साथ उत्सव के विवरण को सोशल मीडिया पर डालने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने एक बयान में कहा है कि "राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाने के लिए, स्कूल 11 नवंबर, 2019 को शिक्षा के महत्व और राष्ट्र के सभी पहलुओं पर राष्ट्र की प्रतिबद्धता के लिए बैनर, कार्ड और नारों के साथ संगोष्ठी, निबंध लेखन प्रतियोगिताओं, अभिरुचि प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं और रैलियों का आयोजन कर सकते हैं। ’’
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सिर्फ इकना ही नहीम बोर्ड ने स्कूलों को हैशटैग '#cbsened' के साथ उत्सव के विवरण को सोशल मीडिया पर डालने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने एक बयान में कहा है कि "राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाने के लिए, स्कूल 11 नवंबर, 2019 को शिक्षा के महत्व और राष्ट्र के सभी पहलुओं पर राष्ट्र की प्रतिबद्धता के लिए बैनर, कार्ड और नारों के साथ संगोष्ठी, निबंध लेखन प्रतियोगिताओं, अभिरुचि प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं और रैलियों का आयोजन कर सकते हैं। ’’
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खास बात ये है कि मौलाना अबुल कलाम आजाद AICTE और UGC जैसे उचे निकायों की स्थापना के लिए जिम्मेदार थे। इसे अलावा आईआईटी, आईआईएससी और स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग की भी उनके द्वारा स्थापना की गई थी।
मौलाना आजाद के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि भले ही उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं हुई, लेकिन वे उर्दू, फारसी, अरबी और हिंदी के अच्छे जानकार थे। वह गणित, विश्व इतिहास और विज्ञान के भी विद्वान थे।
मौलाना आजाद भी अपने समय के एक प्रमुख पत्रकार थे और भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन का कारण बने। उन्होंने शिक्षा और राष्ट्र के विकास के बीच संबंध को समझा।
बता दें कि अबुल कलाम ने 1947 से 1958 तक स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका मानना था कि मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने न केवल महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया बल्कि उन्होंने 14 साल की आयु तक सभी बच्चों के लिए निशुल्क सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा की वकालत की।
ये भी पढ़ें- National Education Day: किसकी याद में मनाया जाता है शिक्षा दिवस?
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मौलाना आजाद के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि भले ही उन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं हुई, लेकिन वे उर्दू, फारसी, अरबी और हिंदी के अच्छे जानकार थे। वह गणित, विश्व इतिहास और विज्ञान के भी विद्वान थे।
मौलाना आजाद भी अपने समय के एक प्रमुख पत्रकार थे और भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन का कारण बने। उन्होंने शिक्षा और राष्ट्र के विकास के बीच संबंध को समझा।
बता दें कि अबुल कलाम ने 1947 से 1958 तक स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका मानना था कि मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने न केवल महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया बल्कि उन्होंने 14 साल की आयु तक सभी बच्चों के लिए निशुल्क सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा की वकालत की।
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