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Medical Student: स्वास्थ्य शिक्षा में डिजिटल क्रांति! नड्डा ने टेक्नोलॉजी-इंटीग्रेशन की जरूरत बताई, पढ़ें खबर
Thu, 06 Mar 2025 11:33 AM IST
शाहीन परवीन
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: शाहीन परवीन
Updated Thu, 06 Mar 2025 11:33 AM IST
सार
Jagat Prakash Nadda: स्वास्थ्य मंत्रालय के बजट-पश्चात वेबिनार में नड्डा ने ऐसा चिकित्सा पाठ्यक्रम बनाने की मांग की जो जीवंत, सार्थक और आधुनिक चुनौतियों के अनुकूल हो और साथ ही मौजूदा संसाधनों और संकाय का अधिकतम उपयोग कर सके।
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जेपी नड्डा
- फोटो : ANI
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विस्तार
Medical Student: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संशोधित चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रम में नवीनतम तकनीकी प्रगति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवा को शामिल करने की वकालत की है।
बुधवार को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आयोजित बजट-पश्चात वेबिनार श्रृंखला में अपने संबोधन में उन्होंने एक ऐसे पाठ्यक्रम के निर्माण की मांग की जो अधिक जीवंत, सार्थक और वर्तमान चुनौतियों के अनुकूल हो तथा मौजूदा बुनियादी ढांचे और चिकित्सा संकाय का अधिकतम उपयोग कर सके।
उन्होंने मेडिकल छात्रों की सहानुभूति, नैतिकता और संचार कौशल को बढ़ाने के लिए सॉफ्ट स्किल्स को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि "सबसे बड़ा निवेश लोगों में निवेश है"।
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नड्डा ने रेखांकित किया कि सरकार एक "समग्र दृष्टिकोण" के साथ काम कर रही है, जो न केवल उपचारात्मक पहलू पर बल्कि रोगी देखभाल के लिए निवारक और पुनर्वास दृष्टिकोण पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
"हम लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आयुष और अन्य चिकित्सा प्रणालियों को भी इसमें शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं।"
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा, "चूंकि कैंसर का उपचार एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कीमोथेरेपी का लंबा चक्र शामिल है, इसलिए सरकार कीमोथेरेपी सत्रों के बाद रोगियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए बड़े अस्पतालों के बजाय डे केयर कैंसर केंद्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।"
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बुधवार को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आयोजित बजट-पश्चात वेबिनार श्रृंखला में अपने संबोधन में उन्होंने एक ऐसे पाठ्यक्रम के निर्माण की मांग की जो अधिक जीवंत, सार्थक और वर्तमान चुनौतियों के अनुकूल हो तथा मौजूदा बुनियादी ढांचे और चिकित्सा संकाय का अधिकतम उपयोग कर सके।
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उन्होंने मेडिकल छात्रों की सहानुभूति, नैतिकता और संचार कौशल को बढ़ाने के लिए सॉफ्ट स्किल्स को शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि "सबसे बड़ा निवेश लोगों में निवेश है"।
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समग्र स्वास्थ्य देखभाल और डे केयर कैंसर केंद्रों पर जोर
नड्डा ने रेखांकित किया कि सरकार एक "समग्र दृष्टिकोण" के साथ काम कर रही है, जो न केवल उपचारात्मक पहलू पर बल्कि रोगी देखभाल के लिए निवारक और पुनर्वास दृष्टिकोण पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
"हम लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आयुष और अन्य चिकित्सा प्रणालियों को भी इसमें शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं।"
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा, "चूंकि कैंसर का उपचार एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कीमोथेरेपी का लंबा चक्र शामिल है, इसलिए सरकार कीमोथेरेपी सत्रों के बाद रोगियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए बड़े अस्पतालों के बजाय डे केयर कैंसर केंद्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।"
चिकित्सा शिक्षा का विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती
केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि "सरकार अगले तीन वर्षों में सभी जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करेगी। इनमें से 200 सेंटर इसी वर्ष स्थापित किए जाएंगे।"चिकित्सा स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित करते हुए, नड्डा ने नई चिकित्सा सीटें शुरू करने की बजट घोषणाओं को दोहराया और 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2014 में 387 से बढ़कर अब 780 हो गई है और इस दौरान स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए सीटों की संख्या में 130 प्रतिशत और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए सीटों की संख्या में 135 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
कैंसर देखभाल के बुनियादी ढांचे में सुधार
उन्होंने वेबिनार के दौरान दिए गए सुझावों का भी समर्थन किया, जैसे कि चिकित्सा संस्थानों के बीच संकायों की पूलिंग, अव्यवहार्य संस्थानों को व्यवहार्य बनाने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षकों को विजिटिंग फैकल्टी के रूप में नियुक्त करना, योग्यता-आधारित चिकित्सा शिक्षा को शामिल करना, छात्रों के लिए प्रारंभिक नैदानिक अनुभव, और छात्रों और संकाय दोनों के लिए संचार कौशल को बढ़ाना।कैंसर देखभाल के लिए चिकित्सा बुनियादी ढांचे में किए गए विकास पर प्रकाश डालते हुए, नड्डा ने एम्स-झज्जर में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की स्थापना, कोलकाता में चित्तरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के उन्नयन और सभी 22 एम्स में ऑन्कोलॉजी विभागों की स्थापना का उल्लेख किया।
हाल ही में लैंसेट द्वारा किए गए अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि "आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना के कारण समय पर कैंसर उपचार शुरू करने की प्रक्रिया में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एबी-पीएमजेएवाई के तहत नामांकित मरीजों को 30 दिनों के भीतर कैंसर उपचार तक पहुंच में 90 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।"
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