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जानिए कौन हैं मीना गुरुंग, जिन्होंने की युवाओं के लिए 'स्ट्रीट लाइब्रेरी' की शुरुआत

Thu, 17 Sep 2020 03:46 PM IST
शुभांगी गुप्ता एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शुभांगी गुप्ता Updated Thu, 17 Sep 2020 03:46 PM IST
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meena gurung free street library initiative for teenagers in arunachal pradesh
मीना गुरुंग 'स्ट्रीट लायब्रेरी' - फोटो : social media

अरुणाचल प्रदेश के एक छोटे से कस्बे निर्जुली की मीना गुरुंग ने पाठकों के लिए 'स्ट्रीट लायब्रेरी'  की शुरुआत की है। इतना ही नहीं उन्होंने यहां पाठकों के लिए बैठकर पढ़ने का इंतजाम भी किया है। मीना गुरुंग एक सरकारी स्कूल में टीचर हैं। उनका कहना है कि ''इस स्ट्रीट लाइब्रेरी को शुरू हुए सिर्फ 10 ही दिन हुए हैं और पाठकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है''। इसके अलावा मीना ने इस बात की खुशी भी जताई है कि यहां दस दिन से बिना किसी ताले के बावजूद किताबें चोरी नहीं हुई हैं। उन्हें इस बात की भी कभी फिक्र नहीं होती है कि इस लायब्रेरी से किताबें चोरी भी हो सकती हैं। उनका कहना है कि ''अगर कभी ये किताबें चोरी हो भी जाएं तो मुझे खुशी होगी क्योंकि जो भी इसे चुराकर ले जाएगा, वो इसका इस्तेमाल पढ़ने के लिए ही करेगा''।

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कहां से मिली प्रेरणा -
मीना को अपनी स्ट्रीट लायब्रेरी की प्रेरणा मिजोरम की 'मिनी वे साइड लायब्रेरी'  से मिली थी। उनकी एक दोस्त दीवांग होसाई ने इंग्लिश ऑनर्स से ग्रेजुएशन किया है, अपनी इसी दोस्त के साथ मिलकर स्ट्रीट लायब्रेरी को शुरू करने का विचार आया।
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लोगों ने भी की सहायता -

मीना की इस लायब्रेरी से किताबें पढ़ने वाले लोगों में सबसे अधिक महिलाएं और टीनएजर्स हैं। गुरुंग ने ये महसूस किया है कि खुले स्थान में बैठकर किताबें पढ़ना टीनएजर्स को कम पसंद है इसलिए वे अब इन किताबों को घर ले जाने के लिए उधार भी देंगी। वे अपने प्रयासों से टीनएजर्स में पढ़ाई का शौक पैदा करना चाहती हैं। मीना का सपना है कि इसी तरह की लायब्रेरी अरूणाचल प्रदेश के हर छोटे और बड़े शहर में खुले। उनके इस प्रयास को देखते हुए कई लोगों ने अपने घर में रखी किताबें यहां रखने के लिए भी दी हैं जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इन्हें पढ़ सकें।
 
आर्थिक सहायता भी मिली –
गांव के कुछ लोगों ने आर्थिक रूप से भी मीना की मदद की जिससे कि वे इस लायब्रेरी में रखने के लिए अच्छी किताबें खरीदे सकें। मीना कहती हैं ''मुझे उम्मीद है कि मेरे प्रयासों को देखते हुए दूसरे राज्यों के लोग भी इसी तरह की स्ट्रीट लायब्रेरी की शुरुआत करेंगे''।
मीना ने बताया कि वे महिलाओं और विधवाओं की भलाई के लिए काम करने की इच्छुक हैं। इसके अलावा वे बाल विवाह के खिलाफ भी अपनी आवाज उठाना चाहती हैं।

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