अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस: संयुक्त राष्ट्र में बोले महात्मा गांधी; स्कूल-कॉलेज सरकारी क्लर्क बनाने के कारखाने
Gandhi Jayanti International Day of Non Violence: महात्मा गांधी की जयंती पर प्रतिवर्ष दो अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है। लेकिन यह साल इस मायने में विशेष है, क्योंकि पहली बार संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम में महात्मा गांधी की विशेष उपस्थिति एचडी होलोग्राम के तौर पर दर्ज की गई है।
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Gandhi Jayanti International Day of Non Violence: प्रतिवर्ष दो अक्तूबर को महात्मा गांधी की जयंती को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। लेकिन यह साल इस मायने में विशेष है, क्योंकि पहली बार संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम में महात्मा गांधी की विशेष उपस्थिति एचडी होलोग्राम के तौर पर दर्ज की गई है। पहली बार महात्मा गांधी के आदमकद होलोग्राम ने पैनल चर्चा का नेतृत्व भी किया। गांधी होलोग्राम के साथ एक वॉयस-ओवर ने शिक्षा पर उनके विचारों को साझा किया।
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन और यूनेस्को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (MGIEP) द्वारा अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को आयोजित एक पैनल चर्चा के दौरान गांधी का एक विशेष आदमकद होलोग्राम पेश किया गया। यह अहिंसा व्याख्यान यूनेस्को एमजीआईईपी के 10 साल पूरे होने के उत्सव श्रृंखला की शुरुआत थी। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने भी महात्मा गांधी के शिक्षा से जुड़े संदेश साझा किए।
स्कूल- कॉलेज सरकारी क्लर्क बनाने के कारखाने : महात्मा गांधी
पैनल चर्चा के दौरान गांधी होलोग्राम को बैठे और खड़े दोनों मुद्राओं में तीन बार दिखाया गया। होलोग्राम ने गांधी के विचार रखते हुए कहा कि हम शिक्षा के मूल्य का आकलन उसी तरह करते हैं जैसे हम शेयर बाजार में जमीन या शेयर के मूल्य का आकलन करते हैं। हम केवल ऐसी शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं जिससे छात्र अधिक कमा सकें। स्कूल और कॉलेज वास्तव में सरकार के लिए क्लर्क बनाने का कारखाना है। इसके विपरीत, वास्तविक शिक्षा में अपने आप को सर्वश्रेष्ठ से बाहर निकालना शामिल है। इससे बेहतर किताब और क्या हो सकती है।
शांतिपूर्ण दुनिया के लिए राह दिखाता है गांधी का जीवन : गुतारेस
पैनल चर्चा से पहले, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस का एक संदेश पढ़ा गया। उन्होंने गांधीजी के वचन आध्यात्मिक शिक्षा से मेरा तात्पर्य हृदय की शिक्षा से है, को दोहराते हुए कहा कि साक्षरता शिक्षा का अंत या शुरुआत भी नहीं है। गुतारेस ने कहा कि गांधी का जीवन और उदाहरण शांतिपूर्ण और सहिष्णु दुनिया के लिए राह दिखाता है।
उतार-चढ़ाव से निपटना सीखना होगा : कंबोज
वहीं, संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने शिक्षा के लचीलेपन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा को पहुंच, समानता, गुणवत्ता और सामर्थ्य प्रदान करना चाहिए। समग्र विकास के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति के उत्थान के लिए गरिमा भी बहुत महत्वपूर्ण है। जीवन में हमेशा सब अच्छा नहीं होता, आपको उतार-चढ़ाव से निपटना सीखना होगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है।
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