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चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला,कोविड ड्यूटी पर रहे पीजी छात्रों को चयन में मिलेगा ये फायदा

Thu, 16 Nov 2023 05:59 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली Published by: सौरभ पांडेय Updated Thu, 16 Nov 2023 05:59 PM IST
सार

Madras High Court: मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि स्नातकोत्तर छात्र, जो सरकारी अस्पतालों में कोविड-19 ड्यूटी पर थे, सहायक सर्जन के पद पर चयन के लिए प्रोत्साहन अंकों के लिए भी पात्र होंगे।

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Madras high court held pg students on Covid-19 duty in government hospitals eligible for incentive marks
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विस्तार

Madras High Court: मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि स्नातकोत्तर छात्र, जो सरकारी अस्पतालों में कोविड-19 ड्यूटी पर थे, सहायक सर्जन के पद पर चयन के लिए प्रोत्साहन अंकों के लिए भी पात्र होंगे। मुख्य न्यायाधीश एसवी गंगापुरवाला और न्यायमूर्ति डी भरतचक्रवर्ती की पहली पीठ ने डॉ. डी. हरिहरन और तीन अन्य डॉक्टरों की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।

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नियमित सरकारी नियुक्तियों में कोविड-19 संबंधित ड्यूटी करने वाले स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रोत्साहन अंक देने के 17 अगस्त, 2023 के सरकारी आदेश को बरकरार रखते हुए,पीठ ने डॉ.टी अजय और 26 अन्य डॉक्टरों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया,जिसमें जी.ओ.की वैधता को चुनौती दी गई थी।
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पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ताओं और अन्य समान स्थिति वाले आवेदकों, जिन्होंने कोविड-19 ड्यूटी निभाई,को भी जी.ओ.के तहत प्रोत्साहन अंक देने के उद्देश्य से "चिकित्सा अधिकारी" माना जाना चाहिए।
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अदालत ने क्या कहा

अदालत ने कहा कि यह सच है कि पीजी छात्रों द्वारा प्रदान की गई सेवाएं उनके 36 महीने की अवधि के प्रशिक्षण का हिस्सा थीं, जिससे वे गुजरते हैं। उक्त अवधि को उस विषय के प्रति व्यावहारिक प्रशिक्षण माना जाता था जिसका वे अध्ययन करते हैं। महामारी से उत्पन्न असामान्य स्थिति के कारण,उन्हें सरकारी अस्पतालों में संबंधित वार्डों में कोविड-19 ड्यूटी के लिए भी नियुक्त किया गया था।


इसमें कोई विवाद नहीं है कि वे राज्य सरकार द्वारा भर्ती किए गए अन्य चिकित्सा अधिकारियों के समान ही ड्यूटी करते थे और समान कठोरता से गुजरते थे। वास्तव में,जिन व्यक्तियों को आपदा प्रबंधन के हिस्से के रूप में स्थापित किए गए इन वार्डों में कोविड-19 ड्यूटी करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा भर्ती किया गया था, उन्हें "चिकित्सा अधिकारी" के रूप में वर्गीकृत किया गया था।

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