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Hindi News ›   Education ›   KVS Revised Admission Guidelines MP Quota for Kendriya Vidyalaya Admission is Scrapped

KVS Admissions 2022: केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के नियम बदले, सांसद कोटा खत्म हुआ तो सेना और कोविड कोटा रहे बरकरार

Tue, 03 May 2022 09:14 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Tue, 03 May 2022 09:14 PM IST
सार

KVS Revised Admission Guidelines: सरकार ने इसके तहत केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के लिए सांसद यानी एमपी कोटे और पूर्व कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए निर्धारित कोटे को खत्म कर दिया है। जबकि, शौर्य पुरस्कार विजेता आ कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के लिए विशेष कोटे के तहत दाखिले के प्रावधान किए गए हैं। 

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KVS Revised Admission Guidelines MP Quota for Kendriya Vidyalaya Admission is Scrapped
केंद्रीय विद्यालय संगठन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

KVS Revised Admission Guidelines: केंद्र सरकार ने अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार बड़ा कदम उठाते हुए 2022-23 और उसके बाद के दाखिले संबंधी दिशा-निर्देशों में बदलाव कर दिया है। सरकार ने इसके तहत केंद्रीय विद्यालयों में दाखिले के लिए सांसद यानी एमपी कोटे, पूर्व कर्मचारियों, जिला कलेक्टर और अधिकारियों के लिए निर्धारित कोटे को खत्म कर दिया है। बता दें कि देश भर में 1,248 केंद्रीय विद्यालय हैं। इनमें लगभग 14,35,562 छात्र नामांकित हैं। 

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स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के कोटे को भी हटाया

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत स्वायत्त निकाय केंद्रीय विद्यालय संगठन ने कहा कि दाखिले के लिए विशेष प्रावधानों की समीक्षा के बाद संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। संशोधित अधिसूचना के अनुसार, केंद्रीय विद्यालयों (केवी) में प्रवेश के लिए संसद सदस्य (सांसद) नामों की सिफारिश करने वाले कोटे को खत्म कर दिया है।
इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों, बच्चों और सांसदों के आश्रित पोते और सेवारत या सेवानिवृत्त केवी कर्मचारियों के बच्चों को प्रवेश देने के लिए विशेष प्रावधान, स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के विवेकाधीन कोटे को भी हटा दिया गया है।
 

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क्या था सांसद कोटा और कितनी सिफारिश का था अधिकार?

अभी तक सांसदों के कोटे के माध्यम से, प्रत्येक सांसद द्वारा प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में कक्षा एक से नौवीं तक में प्रवेश के लिए 10 छात्रों की सिफारिश की जा सकती थी। नियमों के तहत, 10 नाम उन बच्चों तक ही सीमित होने चाहिए, जिनके माता-पिता सिफारिश करने वाले सांसद के निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित हैं।  

 

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कई बार पार हुई सालाना कोटे की सिफारिश सीमा

लोकसभा में 543 और राज्यसभा में 245 सांसद होते हैं जो कि व्यक्तिगत कोटे के तहत सामूहिक रूप से प्रति वर्ष 7,880 छात्रों के प्रवेश की सिफारिश कर सकते हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2018-19 में सांसदों के कोटे के तहत 8,164 दाखिले हुए, यानी कि सिफारिश सीमा को पार किया गया।

वहीं, 2019-20 और 2020-21 में इस श्रेणी में क्रमश: 9,411 और 12,295 दाखिले हुए तथा 2021-22 में 7,301 दाखिले सिफारिश से हुए थे। इससे पहले, इस कोटे को अतीत में कम से कम दो बार वापस लिया गया था, लेकिन वापस बहाल कर दिया गया। अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक बार फिर इस विवेकाधीन कोटे के माध्यम से प्रवेश रोक दिए हैं। 

 

लेकिन बरकरार रहेंगे कोरोना से अनाथ और सेना कोटा

हालांकि, दाखिला कोटा में जिन विशेष प्रावधानों को बरकरार रखा गया है उनमें परमवीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र, अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र प्राप्त करने वालों के बच्चों का प्रवेश शामिल है; राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के प्राप्तकर्ता; रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के कर्मचारियों के 15 बच्चे; कोविड-19 के कारण अनाथ हुए बच्चे; केंद्र सरकार के दिवंगत कर्मचारियों के बच्चे; ललित कला में विशेष प्रतिभा दिखाने वाले बच्चे आदि संबंधित कोटे से दाखिला ले सकेंगे। 

 

 

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