14 से भी अधिक देशों ने किया था आयोग का दौरा : जानिए कितना ताकतवर है भारतीय निर्वाचन आयोग
- 25 जनवरी 1950 में हुई थी भारतीय निर्वाचन आयोग की स्थापना
- राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तीनों आयुक्तों की नियुक्ति
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गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावी राज्यों में रैली के दौरान मास्क पहनने को सुनिश्चित करने के अनुरोध संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस भेजा है। बता दें चुनाव आयोग द्वारा पंचायत चुनाव कराने के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों में कोविड-19 से बचाव के लिए जरूरी उपाय करने की बात कही गई है। किंतु इन गाइडलाइन्स का पालन न होने पर भी आयोग द्वारा कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। आखिरकार हाईकोर्ट को डॉ विक्रम सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई में आयोग से जवाब मांगना पड़ा।
बीते महीने में ईवीएम खरीदने को लेकर भारत निर्वाचन आयोग और बिहार राज्य चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद पर बिहार हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए सख्त निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि भारत निर्वाचन आयोग का यह नीतिगत फैसला है, इसमें कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए लेकिन अनावश्यक हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। इससे पहले भी चुनाव आयोग से संबंधित कई मामले कोर्ट पहुंचे हैं।
अब सवाल यह है कि क्या संवैधानिक और कानूनी तौर पर भारतीय निर्वाचन आयोग के पास वास्तव में कोई ऐसा अधिकार है जिसके जरिए वह राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों और राज्य चुनाव आयोग पर कोई लगाम कस सके? आइए जानते हैं…
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान होता है मुख्य निर्वाचन आयुक्त का दर्जा
25 जनवरी 1950 को चुनाव आयोग की स्थापना की गई थी। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग का काम राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति, संसद और राज्य के विधानमंडल के कार्यालयों के चुनाव को संचालित करना है। साथ ही चुनाव से जुड़े दिशा-निर्देशों को जारी करना और उसके नियंत्रण का कार्य भी चुनाव आयोग द्वारा ही देखा जाता है।
1950 से 1987 तक भारतीय निर्वाचन आयोग में केवल एक ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त हुआ करते थे। पहली बार 16 अक्टूबर 1989 को दो अतिरिक्त आयुक्तों की नियुक्ति की गई थी। हालांकि दो अतिरिक्त निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति का प्रावधान 01 अक्टूबर 1993 से शुरू हुआ। इन तीनों आयुक्तों का चुनाव राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त का दर्जा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान होता है और उन्हें उनके ही समतुल्य सुविधाएं व वेतन मिलता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उनके पद से केवल संसद द्वारा महाभियोग के माध्यम से ही हटाया जा सकता है।
10वें मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन.शेषन ने दिखाई थी भारतीय निर्वाचन आयोग की ताकत
टी.एन.शेषन के मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभालने से पहले तक चुनाव में बूथ कैप्चरिंग, सत्ता का दुरुपयोग, मतदाताओं के बीच पैसे और चीजें बांटकर लुभाना जैसी हरकतें आम थीं। लेकिन पदभार संभालने के बाद उन्होंने असरदार ढंग से आचार संहिता को लागू किया। चुनाव के दौरान भुजाबल और धनबल के इस्तेमाल पर लगाम लगाई। साथ उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जिन्होंने इन नियमों का उल्लंघन किया था। उदाहरण के तौर पर वर्ष 1993 में हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल गुलशेर अहमद द्वारा अपने बेटे के लिए चुनावी प्रचार अभियान में हिस्सा लेने पर शेषन ने सतना में होने वाले मतदान को ही रद्द कर दिया था। साथ ही गुलशेर अहमद पर सख्त कार्रवाई भी की थी। नतीजतन अहमद को राज्यपाल पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
अन्य देशों के निर्वाचनों के लिए भारतीय चुनाव आयोग ही भेजता है विशेषज्ञ
भारत, लोकतंत्र और निर्वाचन सहायता हेतु अंतरराष्ट्रीय संस्थान इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (आईडीईए) स्टॉकहोम, स्वीडन का एक संस्थापक सदस्य है। पूर्व में रूस, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश, थाईलैंड, नेपाल, नामीबिया, भूटान, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और अफगानिस्तान जैसे देशों के राष्ट्रीय निर्वाचन निकायों के अधिकारी और अन्य प्रतिनिधि-मंडल भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया को बेहतर रूप देखने और समझने के लिए आयोग का दौरा भी कर चुके हैं। अतीत में आयोग ने संयुक्त राष्ट्र संघ और राष्ट्रमंडल सचिवालय के सहयोग से कई अन्य देशों के निर्वाचनों के लिए प्रेक्षकों और विशेषज्ञों को भी उपलब्ध कराया है।
पिछले कुछ समय में आयोग द्वारा शुरू की गई नई पहल -
- राजनीतिक दलों द्वारा रेडियो प्रसारण/दूरदर्शन प्रसारण के लिए राज्य के स्वामित्व वाली इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रयोग की योजना बनाई।
- राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाई।
- निर्वाचक नामावलियों का कंप्यूटरीकरण किया।
- निर्वाचकों को पहचान-पत्र उपलब्ध करवाया।
- अभ्यर्थियों द्वारा लेखा-जोखा रखने और उन्हें प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को सरल बनाया।
- आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से अनुपालन करने हेतु विविध उपाय किए।
- निर्वाचनों के दौरान अभ्यर्थियों को एक-समान अवसर उपलब्ध हों यह सुनिश्चित किया।
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