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KEAM 2025: 'आखिरी समय में प्रोस्पेक्टस में बदलाव करना गलत, इन्हें रद्द करें', हाईकोर्ट ने आदेश को ठहराया सही

Thu, 10 Jul 2025 06:16 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Thu, 10 Jul 2025 06:16 PM IST
सार

KEAM 2025: केरल हाईकोर्ट ने केईएएम 2025 के प्रोस्पेक्टस में आखिरी क्षण में किए गए बदलाव को रद्द करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को सही ठहराया है। खंडपीठ ने भी एकल न्यायाधीश के आदेश को वैध ठहराते हुए कहा है, "हम एकल न्यायाधीश के आदेश की पुष्टि करते हैं।" 
 

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Kerala HC division bench upholds single judge order cancelling last-minute change to KEAM prospectus
केरल उच्च न्यायालय (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

KEAM 2025: केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा केईएएम 2025 प्रवेश परीक्षा के प्रोस्पेक्टस में आखिरी क्षण में किए गए बदलाव को रद्द करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को सही ठहराया है। न्यायमूर्ति अनिल के. नरेन्द्रन और न्यायमूर्ति मुरलीकृष्ण एस की खंडपीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें एकल न्यायाधीश के निर्णय में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती।

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इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जो 9 जुलाई को आए एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी।

अंतिम समय में किए गए बदलाव के विरोध में दायर की गई थी याचिका

यह मामला सीबीएसई बोर्ड के उन छात्रों की याचिका से जुड़ा है जिन्होंने केईएएम (केरल इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और मेडिकल प्रवेश परीक्षा) दी थी। इन छात्रों ने अदालत में दायर अपनी याचिका में कहा कि 1 जुलाई को, जब रैंक सूची जारी होने में केवल एक घंटा बचा था, राज्य सरकार ने अंतिम अंकों की गणना के नियमों में बदलाव कर दिया।

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मूल प्रोस्पेक्टस के आधार पर तैयार करें रैंक सूची

एकल पीठ के रूप में यह मामला सुनने वाले न्यायमूर्ति डी. के. सिंह ने टिप्पणी की थी कि बदलाव का समय "संदिग्ध" प्रतीत होता है। उन्होंने राज्य सरकार के इस कदम को "अवैध, मनमाना और अनुचित" करार दिया और आदेश दिया कि रैंक सूची को 19 फरवरी को जारी किए गए मूल प्रोस्पेक्टस के आधार पर फिर से तैयार किया जाए।

अब खंडपीठ ने भी एकल न्यायाधीश के आदेश को वैध ठहराते हुए कहा है, "हम एकल न्यायाधीश के आदेश की पुष्टि करते हैं।" खंडपीठ ने यह भी बताया कि इस निर्णय का विस्तृत आदेश आने वाले कुछ दिनों में जारी किया जाएगा।

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