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पहल: केरल में छात्र पढ़ेंगे संविधान की प्रस्तावना; राज्य सरकार ने लिया स्कूली पाठ्यपुस्तकों में बदलाव का फैसला

Wed, 17 Jan 2024 03:01 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 17 Jan 2024 03:01 PM IST
सार

Kerala: केरल राज्य के इतिहास में पहली बार स्कूली पाठ्यपुस्तकों में देश के संविधान की प्रस्तावना शामिल होगी। छात्रों की पाठ्यपुस्तकों की शुरूआत में संविधान की प्रस्तावना को प्रिंट किया जाएगा। उक्त फैसला राज्य सरकार ने लिया है।
 

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Kerala Govt makes preamble to the Constitution part of school textbooks
भारत का संविधान - फोटो : amar ujala

विस्तार

Kerala: केरल के इतिहास में पहली बार, केरल में संशोधित स्कूली पाठ्यपुस्तकों में देश के संविधान की प्रस्तावना शामिल होगी। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार ने बच्चों के मन में संवैधानिक मूल्यों को स्थापित करने के प्रयासों के तहत कक्षा 1 से 10 तक की पाठ्यपुस्तकों में प्रस्तावना को शामिल करने का फैसला किया है।

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सामान्य शिक्षा मंत्री और राज्य पाठ्यचर्या समिति के अध्यक्ष वी शिवनकुट्टी ने कल इस महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की। राज्य पाठ्यचर्या संचालन समिति ने हाल ही में एक दशक के बाद लागू किए गए पाठ्यक्रम सुधारों के हिस्से के रूप में कक्षा I, III, V, VII और IX के लिए 173 नई पाठ्यपुस्तकों को मंजूरी दी है।
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शिवनकुट्टी ने कहा, "यह पहली बार है कि संविधान की प्रस्तावना को हर पाठ्यपुस्तक की शुरुआत में शामिल और मुद्रित किया गया है।"

मंत्री ने कहा कि सरकार ने शुरू से ही यह स्पष्ट कर दिया है कि दक्षिणी राज्य संवैधानिक मूल्यों को कायम रखते हुए सुधार गतिविधियों को आगे बढ़ाएगा।

साथ ही एससीईआरटी के डायरेक्टर जयप्रकाश आर के ने कहा कि यदि पाठ्यपुस्तक का माध्यम मलयालम है, तो प्रस्तावना मलयालम में होगी। तमिल पाठ्यपुस्तकों में तमिल में और हिंदी पाठ्यपुस्तकों में हिंदी में होगी।  इससे शिक्षकों और छात्रों दोनों को संविधान की प्रस्तावना के मूल को समझने में मदद मिलेगी।
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सरकार द्वारा प्रस्तावना को स्कूल की पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा बनाने के कारण के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं के बीच संविधान के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना है। इससे बच्चों को कम उम्र से ही संविधान के महत्व को समझने में मदद मिलेगी।

अधिकारी ने आगे कहा, शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के दौरान संविधान और उसकी प्रस्तावना का अर्थ और संदेश देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

एससीईआरटी निदेशक ने कहा कि हालांकि निचली कक्षाओं में बच्चों के लिए संविधान की अवधारणा को समझना कठिन हो सकता है, लेकिन वे कम से कम पांचवीं कक्षा तक आते-आते इसकी मूल बातें समझने में सक्षम हो जाएंगे।


सामान्य शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, संशोधित पाठ्यपुस्तकें अगले शैक्षणिक वर्ष के लिए स्कूल फिर से खुलने से कुछ हफ्ते पहले छात्रों तक पहुंच जाएंगी।

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