अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2021: 177 देशों ने भारत के प्रस्ताव पर लगाई थी मुहर, जानिए 21 जून का महत्व
आज दुनिया सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। 21 जून की तारीख ने पिछले कुछ ही बरस में इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है। भारत की पहल पर शुरू हुए इस खास दिन को लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों में खासा उत्साह है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह देशवासियों को संबोधित किया और योग के माध्यम से बीमारियों से दूर रहने का फॉर्मूला दिनचर्या में शामिल करने की बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना काल में योग एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री मोदी ने सातवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर योगी, संत और योग के महत्व को लेकर जानकारी दी। वहीं कोरोना काल के दौरान भी देश और दुनिया में योग कार्यक्रमों की तस्वीरें आ रही हैं।
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वैश्विक संक्रामक महामारी कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण इस बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशाल आयोजन भले ही न हो रहे हों, लेकिन दुनियाभर में घर-घर में योग दिवस मनाया जा रहा है। इस बार दुनियाभर में 7वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उत्सव नई थीम- “योग के साथ रहें, घर पर रहें” के तहत मनाया जा रहा है। वर्तमान कोविड-19 महामारी के चलते अपने अंदर सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर रोग प्रतिशोधक क्षमता विकसित करने के लिए योग की महत्वता और भी अधिक हो चली है। योग की महत्वता को लेकर भारत के प्रयासों के चलते दुनियाभर के देशों ने इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा में स्वीकारा और 21 जून, 2015 में पहली बार इसे विश्व स्तर पर मनाया गया।
योग के लिहाज से 21 जून क्यों है महत्वपूर्ण
भारतीय संस्कृति के अनुसार यह दिन पूरे वर्ष का सबसे लम्बा दिन होता है यानी सूर्योदय से सूर्यास्त होने के बीच के समय का अंतराल सर्वाधिक होता है। इसी दिन से सूर्य की गति की दिशा दक्षिणायन होती है और सूर्य की यह दक्षिणायन स्तिथि योग के द्वारा आध्यात्मिक विधा प्राप्त करने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी गई है। 21 जून को ग्रीष्म ऋतु की संक्रान्ति भी कहा जाता है। यही कारण था कि इस दिन को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में चुना गया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कराने में कैसे सफल हुआ भारत
27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हमारे देश भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले अभिभाषण में इस पर पहल करते हुए प्रस्ताव रखा। जिसे महासभा ने तीन माह से भी कम समय में 11 दिसंबर 2014 को 193 देशों में से 177 देशों के समर्थन से पूर्ण बहुमत के साथ प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
क्या था हमारे प्रधानमंत्री के अभिभाषण का सार
योग भारत की प्राचीन परम्परा का एक अमूल्य उपहार है। यह मस्तिष्क और तन के बीच संतुलन का प्रतीक है; मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है; विचार, संयम और स्फूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है। यह व्यायाम के बारे में नहीं है, लेकिन अपने भीतर आपसी एकता की भावना, दुनिया और प्रकृति की खोज के विषय में है। हमारी बदलती जीवन-शैली में यह चेतना बनकर हमें मदद कर सकता है।
यह है योग दिवस का आधिकारिक नाम
प्रत्येक वर्ष एक नई थीम के साथ यह उत्सव मनाया जाता है। इस साल की थीम बी विथ योग, बी एट होम अर्थात योग के साथ रहिए, घर पर रहिए तय की गई है। जबकि बीते वर्ष “घर में रहकर योग करें” थीम रखी गई थी। गौरतलब है कि विश्व योग दिवस का आधिकारिक नाम- अन्तररो योग दिवस है।
भारत में पहले विश्व योग दिवस का ऐसा रहा उत्सव
भारत में पहला विश्व योग दिवस 2015 अविस्मरणीय बना। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली के राजपथ पर मुख्य आयोजन हुआ था। 84 देशों के नागरिकों सहित रिकॉर्ड 35,985 लोगों ने इस उत्सव में भाग लिया था।
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