CBSE: IIT मद्रास-कानपुर की टीम कर रही शिकायतों की जांच, IIT मद्रास के निदेशक बोले- '72 घंटे से पोर्टल स्थिर'
CBSE: सीबीएसई पोर्टल में पेमेंट फेल, सर्वर गड़बड़ी और आंसर शीट अपलोड शिकायतों की जांच आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर की टीम ने शुरू कर दी है। आईआईटी मद्रास निदेशक वी कामाकोटि ने कहा कि तकनीकी खामी, सिस्टम फेल या साइबर अटैक समेत सभी पहलुओं की जांच होगी।
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CBSE: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर की चार सदस्यीय टीम ने सीबीएसई पोर्टल में आई हालिया तकनीकी गड़बड़ियों की जांच शुरू कर दी है। यह जांच पेमेंट फेल होने, पोर्टल क्रैश और आंसर शीट अपलोड से जुड़ी शिकायतों को लेकर की जा रही है।
वी कामाकोटि ने बताया कि टीम ने सोमवार शाम से काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि आखिर समस्या की असली वजह क्या थी।
उन्होंने कहा, 'करीब दो दिनों तक दिक्कत रही। हमें यह समझना है कि यह तकनीकी खामी थी, डेवलपमेंट से जुड़ी समस्या थी या फिर साइबर अटैक जैसी कोई वजह थी। हम पूरी जांच करेंगे ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो।'
पिछले 72 घंटे से स्थिर है पोर्टल: कामकोटि
कामाकोटि ने बताया कि सीबीएसई का पोर्टल पिछले 72 घंटे से स्थिर है। दरअसल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर को तकनीकी विशेषज्ञ भेजने का निर्देश दिया था, ताकि सीबीएसई की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके।
कामकोटि ने कहा कि सीबीएसई द्वारा शुरू किया गया ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OMS) सिस्टम पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लाया गया है। इसके जरिए छात्र अपनी जांची गई उत्तर पुस्तिका देख सकते हैं और समझ सकते हैं कि उनके अंक कहां कटे।
उन्होंने कहा, 'सीबीएसई ने अच्छी पहल की है। यह सिस्टम ज्यादा पारदर्शिता लाता है। लेकिन कहीं न कहीं पेमेंट सिस्टम या गेटवे में दिक्कत आई है।'
विस्तृत तकनीकी परीक्षण करेगी जांच टीम
जांच टीम अब वेबसाइट और पूरे सिस्टम का विस्तृत तकनीकी परीक्षण करेगी। इसमें यह भी देखा जाएगा कि फीस भुगतान के दौरान सीबीएसई पोर्टल और पेमेंट सिस्टम के बीच तालमेल में कहां समस्या आई।
टीम में आईआईटी मद्रास के दो विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें एक बड़े स्तर पर सॉफ्टवेयर संचालन का अनुभव रखते हैं और दूसरे डेटा एनालिटिक्स से जुड़े विशेषज्ञ हैं। आईआईटी कानपुर की ओर से भी दो फैकल्टी सदस्य टीम में शामिल किए गए हैं।
धुंधली उत्तर पुस्तिका वाली शिकायतों की हो रही जांच
आंसर शीट गलत अपलोड होने या धुंधली दिखाई देने की शिकायतों पर कामकोटि ने कहा कि टीम अभी उस स्तर की जांच तक नहीं पहुंची है। हालांकि स्कैनिंग और अपलोडिंग प्रक्रिया की भी जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा कि फिजिकल आंसर शीट को डिजिटल फॉर्म में बदलने की प्रक्रिया में शुरुआती स्तर पर मैनुअल हस्तक्षेप होता है। ऐसे में मानवीय गलती की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। कामाकोटि ने ओएसएम सिस्टम का समर्थन करते हुए कहा कि इससे छात्रों और अभिभावकों को मूल्यांकन प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है।
उन्होंने कहा, 'अब छात्रों को यह जानने का मौका मिलता है कि उनकी आंसर शीट में क्या हुआ। यह शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है।'
उन्होंने माना कि बड़ी संख्या में छात्रों के एक साथ पोर्टल इस्तेमाल करने से भी तकनीकी दबाव बढ़ा होगा, जिससे बैंडविड्थ और सर्वर पर असर पड़ा।
नीट यूजी पर क्या बोले कामकोटि?
नीट यूजी को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराने की संभावना पर कामाकोटि ने कहा कि सीबीएसई पोर्टल और सीबीटी परीक्षा प्रणाली अलग-अलग चीजें हैं। उन्होंने बताया कि जेईई मेन, जेईई एडवांस्ड और गेट जैसी परीक्षाएं पिछले कई वर्षों से सफलतापूर्वक सीबीटी मोड में आयोजित हो रही हैं।
हालांकि उन्होंने कहा कि नीट यूजी में सबसे बड़ी चुनौती छात्रों की संख्या है। उनके मुताबिक, 24 लाख छात्रों की परीक्षा एक साथ कराना संभव नहीं होगा। इसके लिए कई सत्र आयोजित करने पड़ सकते हैं और बाद में परिणामों को नॉर्मलाइज करना होगा।
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