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IIT: आईआईटी ने तीन वर्ष में 1535 पेटेंट दर्ज कराए, इनमें से 69 को उत्पादों में बदला गया

Wed, 06 Jul 2022 06:20 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 06 Jul 2022 06:20 AM IST
सार

संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान सबसे अधिक पेटेंट दर्ज कराए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन पेटेंट का कुल वाणिज्यिक मूल्य 13.21 करोड़ रुपये हैं।

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IIT filed 1535 patents in three years out of which 69 were converted into products
IIT Delhi - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश के सभी 23 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) ने पिछले 3 वर्ष में 1535 पेटेंट दर्ज या पंजीकृत कराए हैं। इनमें से 69 पेटेंट को प्रक्रियाओं और उत्पादों में बदला गया है। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने यह जानकारी शिक्षा, महिला, बाल, युवा व खेल संबंधी स्थायी समिति को दी है। यह रिपोर्ट सोमवार को राज्यसभा के सभापति को सौंपी गई।

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संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान सबसे अधिक पेटेंट दर्ज कराए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन पेटेंट का कुल वाणिज्यिक मूल्य 13.21 करोड़ रुपये हैं। संसदीय समिति को उच्च शिक्षा विभाग ने कहा है कि आईआईटी राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में सबसे अधिक काम करते हैं।
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इनके शोध और नवाचार से उद्योगों के साथ समाज को भी फायदा होता है। आईआईटी के पास नये उद्यमियों के लिए स्टार्टअप नीति भी है। इसके अलावा  पेटेंट सृजन में अग्रणी स्थान रखने वाले इन आईआईटी ने बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ (आईपीआर)/ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, समर्पित आईपीआर नीति या दिशानिर्देश भी बनाए हैं।
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आईआईटी दिल्ली: कीमोथेरेपी दवा संबंधी विशिष्ट अणु का सुगम संश्लेषण किया
आईआईटी, दिल्ली के अनुसंधान कर्ताओं ने कीमोथेरेपी दवाओं से संबंधित विशिष्ट अणु पॉलीएरिलक्विनोन के आसान संश्लेषण के लिए एक नया तरीका खोजा है। पॉलीएरिलक्विनोन एक ऐसा अणु है, जिसका उपयोग विभिन्न उद्योगों जैसे कि औषध, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स और बायो-इमेजिंग में किया जाता है। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय पत्रिका एसीएस कैटलिसिस में प्रकाशित हुआ है।


इसमें लिखा है कि पॉलीएरिलक्विनोन का उपयोग कीमोथेरेपी और ऑप्टो इलेक्ट्रॉनिक्स में एक एंटी ऑक्सीडेंड के रूप में किया जा सकता है। आईआईटी दिल्ली के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर व प्रमुख अनुसंधानकर्ता प्रो. रवि पी सिंह ने कहा, एरिलक्विनोन आधारित कीमोथेरैपी दवाएं बाजार में पहले से मौजूद हैं, लेकिन हमारा अणु पूर्व में खोजे गए एरिक्विनोन डोक्सोरुबिसिन दवा की तुलना में बेहतर रूप से कोशिका को स्वस्थ बनाने में आशाजनक परिणाम देता है।

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