IIT Bombay: आईआईटी बॉम्बे छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध, कॉमेंसमेंट 2025 में बोले निदेशक शिरीष
IIT Bombay: आईआईटी बॉम्बे ने ‘कॉमेंसमेंट 2025’ आयोजित किया, जिसमें निदेशक शिरीष केदारे ने छात्रों के सर्वांगीण विकास और अत्याधुनिक ढांचे की बात कही। मुख्य अतिथि सुमंत सिन्हा ने छात्रों को जलवायु संकट में सकारात्मक भूमिका निभाने का संदेश दिया।
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IIT Bombay: आईआईटी बॉम्बे के निदेशक शिरीष केदारे ने शनिवार को कहा कि संस्थान एक ऐसा जीवंत परिसर तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है जो छात्रों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा दे। उन्होंने बताया कि अकादमिक प्रगति के साथ-साथ उद्यमिता को भी प्रोत्साहित करने के लिए अत्याधुनिक ढांचागत सुविधाएं तैयार की जा रही हैं।
'कॉमेंसमेंट 2025' का आयोजन
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे ने इस शैक्षणिक वर्ष में स्नातक होने वाले छात्रों के लिए संस्थान के दीक्षांत सभागार में ‘कॉमेंसमेंट 2025’ समारोह आयोजित किया।
यह समारोह पहली बार 2023 में शुरू किया गया था और अब हर साल दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाओं के तुरंत बाद आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य उस वर्ष स्नातक होने वाले सभी छात्रों को एक मंच पर एकत्र करना और संस्थान में उनके समय का उत्सव मनाना है।
समारोह के मुख्य घटक
इस आयोजन में एकेडमिक प्रोसेशन (शैक्षणिक जुलूस), मुख्य अतिथि और निदेशक का संबोधन, प्रतिज्ञा समारोह और एक समान ड्रेस कोड जैसे हिस्से शामिल होते हैं। हालांकि, इसमें डिग्री, मेडल या अन्य सम्मान प्रदान नहीं किए जाते।
नवाचार और सहयोग को बढ़ावा
निदेशक शिरीष केदारे ने कहा, “हम न केवल अकादमिक विकास, बल्कि छात्रों के आवास, मनोरंजन और उद्यमशीलता से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे बताया कि नए छात्रावासों और फैकल्टी रेजिडेंस से लेकर अरबों की वैल्यू वाले स्टार्टअप्स वाले रिसर्च पार्क तक, संस्थान के सभी प्रयास नवाचार और सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हैं।
मुख्य अतिथि का संदेश
समारोह के मुख्य अतिथि सुमंत सिन्हा - जो ReNew के संस्थापक, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं - ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि यह भी जरूरी है कि आप समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालें, खासकर जलवायु संकट और वैश्विक चुनौतियों के दौर में।”
उन्होंने कहा, “भविष्य आपके हाथों में है। दृढ़ संकल्प, सहनशीलता और नैतिक फैसलों के ज़रिए आप एक टिकाऊ, खुशहाल और संतोषजनक दुनिया का निर्माण कर सकते हैं।”
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