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IIMC को चाहिए उर्दू चाहने वालों की मदद, प्रोफेसर ने ट्वीट में की अपील

Fri, 26 Jul 2019 05:30 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Fri, 26 Jul 2019 05:30 PM IST
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IIMC Urdu Journalism Course lacking students, Prof tweets for help in admission
iimc

भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) में हर साल विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए लाखों आवेदन आते हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाला यह संस्थान 1965 में शुरू हुआ। इस संस्थान को देश में पत्रकारिता का सर्वश्रेष्ठ संस्थान माना जाता है। लेकिन सात साल पहले शुरू हुए यहां के एक कोर्स को अब भी छात्रों की तलाश है। वह कोर्स है उर्दू पत्रकारिता।

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अन्य भाषाओं की सफलता को देखते हुए आईआईएमसी में उर्दू पत्रकारिता की शुरुआत साल 2012-13 में की गई। इसमें 15 सीटें हैं। लेकिन 2012 से लेकर अब तक एक बार भी ये सीटें भर नहीं पाईं। 
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इस साल भी अब तक इस कोर्स में सिर्फ तीन छात्रों ने दाखिला लिया है। इस कोर्स के लिए अब आईआईएमसी के प्रोफेसर आनंद प्रधान ने मदद की अपील की है। उन्होंने एक ट्वीट में लिखा है, 'उर्दू के चाहने वालों मदद कीजिए। आप या आपके कोई जानकार नौजवान दोस्त उर्दू पत्रकारिता में डिप्लोमा करना चाहते हैं, तो आईआईएमसी ने एक मौका मुहैया कराया है। दाखिले के लिए फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 29 जुलाई है।'

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हर साल देश भर से सैकड़ों छात्र-छात्राएं आईआईएमसी में हिंदी, अंग्रेजी पत्रकारिता, रेडियो व टीवी पत्रकारिता, एडवर्टाइजिंग और पीआर में डिप्लोमा कोर्स के लिए आते हैं। वजह है इन क्षेत्रों में रोजगार के ज्यादा मौके। हालांकि इस संस्थान में हिंदी, अंग्रेजी के अलावा मलयाली, उड़िया व मराठी भाषाओं में भी डिप्लोमा कराया जाता है। करीब नौ महीने के इस कोर्स के दौरान विद्यार्थियों को उनके संबंधित कोर्स में सैद्धांतिक के साथ-साथ व्यावहारिक चीजें भी सिखाई जाती हैं।

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