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उन आईएएस अधिकारियों की कहानी, जिन्होंने किया देश का नाम रोशन

Wed, 29 Jul 2020 01:04 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Garima Garg Updated Wed, 29 Jul 2020 01:04 PM IST
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IAS officer success stories here Those who made the country proud
आईएएस - फोटो : File Photo

बहुत कम लोग होते हैं जो अपने काम की वजह से जाने जाते हैं। ऐसे लोग अपने क्षेत्र में जो काम करते हैं वही उनकी पहचान बन जाता है। आज हम बात करेंगे कुछ ऐसे ही आईएएस अधिकारियों की जिन्होंने अपने काम से अपनी पहचान बनाई व अपना नाम रोशन किया। उनके कठिन परिश्रम ने कई लोगों को प्रभावित किया है। आइए जानते हैं ऐसे ही आईएएस अधिकारियों के बारे में-

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अशोक खेमका 
अपनी ईमानदारी के लिए देश भर विख्यात आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को कौन नहीं जानता। 1991 बैच के इस अधिकारी का कार्यकाल काफी चर्चित रहा। ये रॉबर्ट वाड्रा की बहुचर्चित डीएलएफ लैंड डील की वजह से चर्चा में आए थे। अपनी 28 साल की नौकरी में इनका 53 बार ट्रांसफर किया जा चुका है। इनकी नौकरी  आईएएस की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। 
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आर्मस्ट्रांग पामे 
इस आईएएस अधिकारी को मिरेकल मैन ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है। मनिपुर के तामेंगलांग जिले से आने वाले इस आईएस अधिकारी ने अपने ग्रेजुएशन की पढ़ाई सेंट स्टीफन कॉलेज दिल्ली से की। साल 2007 में इनका चयन इंडियन रेवन्यु सर्विस (आईआरएस) में हुआ। इन्होंने साल 2008 में यूपीएससी की परीक्षा पास की। मनिपुर को नागालैंड व असम से जोड़ने के लिए इन्होंने 100 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कराया जिसे पीपुल्स रोड के नाम से जाना जाता है। इन्हें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा साल 2018 में यंग ग्लोबल लीडर चुना गया था।  
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सौरभ कुमार 
दंतेवाड़ा जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए इस आईएएस अधिकारी का योगदान अतुलनीय है। नक्सल समस्या से लड़ते हुए इन्होंने इस क्षेत्र के युवाओं व छात्रों के लिए कई कदम उठाए। विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए 2 घंटे का काउंसलिंग सेशन आयोजित किया, जिसे ‘लंच विद कलेक्टर’ कहा जाता था। इन्हें साल 2017 में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के क्षेत्र में प्रधानमंकत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  

स्मिता सबरवाल 
ये साल 2001 बैच की तेलंगाना कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। लोगों की समस्याओं को हल करने का इनका तरीका इनकी अलग पहचान है। म्युनिसिपल कमिश्नर के रूप में कार्य करते हुए इन्होंने फंड योर सिटी नाम से एक प्रोजेक्ट की शुरू किया। इस प्रोजेक्ट के तहत बस स्टॉप, पार्क, पब्लिक टॉयलेट आदि का निर्माण व मरम्मत किया जाता है।   

प्रशांत नायर 
ये एक आईएएस ऑफिसर व मशहूर फिल्म निर्देशक हैं। साल 2006 में इन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में 6वीं रैंक प्राप्त किया। आईएएस अधिकारी बनने के बाद इन्हें कोझीकोड में कलेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया। इस क्षेत्र में गरीबी दूर करने के लिए उठाए गए इनके कदमों को काफी सराहना मिली। इसके अलावा इन्होंने और कई प्रोग्राम जैसे तेरे मेरे बीच में, ऑपरेशन सुलेमानी आदि लॉन्च किया। इस क्षेत्र में इनके द्वारा किए गए कामों की वजह से इन्हें कोझीकोड में कलेक्टर ब्रो के नाम से भी जाना जाता है। 

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