भाग-3: पाक को सता रही है PoK खोने की चिंता, जानें भारत के इस हिस्से का पूरा इतिहास
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- पाकिस्तान के विपक्षी नेता ने कहा- अब पीओके पर भी संकट है
- पीओके के पास है अपना राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री
- दो हिस्सों में बंटा हुआ है पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK)
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विस्तार
पाकिस्तान को इन दिनों पीओके खोने की चिंता सता रही है। पाकिस्तान के विपक्षी नेता बिलावल भुट्टो ने वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान पर इस बात को लेकर निशाना भी साधा है। बिलावल ने कहा है कि 'पहले हमारी कश्मीर पर क्या पॉलिसी थी? पहले पाकिस्तान की पॉलिसी थी कि हम श्रीनगर कैसे लेंगे। अब इमरान खान सरकार इसे लेने में नाकामयाब रही है। जिसकी वजह से अब पाकिस्तान की ये स्थिति हो गई है कि हम मुजफ्फराबाद (Pok) को कैसे बचाएंगे, ये सोचना पड़ रहा है। अब POK पर संकट है'।
अब सवाल है कि क्यों पाकिस्तान के लिए कश्मीर से भी ज्यादा जरूरी है पीओके? क्या है भारत के इस हिस्से का पूरा इतिहास? पाकिस्तान ने कैसे इस पर कब्जा कर लिया था? इन सवालों के जवाब हम आपको आगे बता रहे हैं।
- पीओके यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan Occupied Kashmir) जम्मू कश्मीर का हिस्सा है। 1947 में ही पाकिस्तान ने धोके से भारत के इस हिस्से पर अपना कब्जा जमा लिया था।
- यूनाइटेड नेशन के साथ-साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इसे पाकिस्तानी नियंत्रित कश्मीर (Pakistani controlled Kashmir या Pakistan Administered Kashmir) का नाम दिया है।
- मोदी सरकार ने पीओके को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर (Pakistan occupied Jammu-Kashmir) का नाम दिया है।
दो भागों में बंटा है पीओके
- पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को दो भागों में बांटा गया है - आजाद जम्मू कश्मीर और गिलगिट बाल्टिस्तान (इसे अगस्त 2009 तक उत्तरी क्षेत्रों के नाम से पुकारा जाता था)।
- आजाद जम्मू कश्मीर को आजाद कश्मीर के नाम से भी पुकारा जाता है। यह भारत के कश्मीर के पश्चिमी हिस्से से जुड़ा है।
- वहीं, बाल्टिस्तान पश्चिमी लद्दाख का हिस्सा रहा है जिसे 1947 में पाकिस्तान ने अपने कब्जे में कर लिया था।
पाकिस्तान ने ऐसे किया कब्जा और पैदा हुआ पीओके
- भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के समय जम्मू कश्मीर को यह विकल्प दिया गया था कि वह भारत के साथ जाना चाहता है या पाकिस्तान के साथ। लेकिन प्रदेश के तत्कालीन शासक महाराजा हरि सिंह ने जम्मू कश्मीर को स्वतंत्र राज्य रखने का फैसला लिया।
- फिर साल 1947 में ही पाकिस्तान के पश्तून आदिवासियों ने जम्मू कश्मीर पर हमला कर दिया। इससे निपटने के लिए महाराजा हरि सिंह ने भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल माउंटबेटेन से सेना की मदद मांगी।
- इसके जवाब में माउंटबेटेन ने हरि सिंह से कहा कि 'हमारी सरकार चाहती है कि जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था सही होने और वहां से हमलावरों को भगाने के बाद राज्य किसके पक्ष में होगा इसका फैसला वहां की जनता करे।'
- ऐसा ही हुआ। सरकार ने जनमत संग्रह की कोशिश की लेकिन ये नहीं हो सका। क्योंकि पाकिस्तानी सरकार और कश्मीरियों ने कश्मीर पर भारत के कानूनी अधिकार पर सवाल खड़ा कर दिया। यह सवाल आज तक विवाद का मुद्दा बना हुआ है।
- इसके बाद महाराजा हरि सिंह न 26 अक्टूबर को जम्मू के अमर पैलेस में 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (राज्यप्राप्ति)' पर हस्ताक्षर किए, जिसे भारत के अंतिम गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटेन ने 27 अक्टूबर को स्वीकार कर लिया।
- इस इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन ने कश्मीर विवाद का बीज बोया।
जम्मू कश्मीर के बारे में जानें ये 9 बातें
- जम्मू कश्मीर कभी भी ब्रिटिश शासन के अधीन नहीं आया। उस दौरान भी यहां महाराजा हरि सिंह का शासन रहा।
- भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हो चुका था। लेकिन महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ रहने की सहमति 26 अक्टूबर 1947 को दी।
- जम्मू कश्मीर में एक्सेशन डे यानी 26 अक्टूबर को होलीडे के रूप में मनाते हैं। ये वो तारीख है जब 1947 में महाराजा हरि सिंह ने जम्मू के अमर पैलेस में इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन साइन किया था। इस समझौते में स्वतंत्र जम्मू कश्मीर को भारत के साथ रखने की सहमति बनी थी।
- हालांकि एक्सेशन की तारीख को लेकर भी विवाद है। भारतीय इतिहासकार प्रेम शंकर झा के अनुसार इंस्टूमेंट ऑफ एक्सेशन पर 25 अक्टूबर को हस्ताक्षर किए गए थे। जबकि ब्रिटिश रिसर्चर एंड्रू व्हाइहेट कहते हैं कि यह 26 अक्टूबर को हुआ।
- कश्मीर के अलगाववादियों ने एक्सेशन डे को ब्लैक डे करार दिया है।
- 27 अक्टूबर 1947 को भारतीय सेना के सिख बटालियन को वायु मार्ग के जरिए सीधे श्रीनगर में उतारा गया। यहां सेना ने पठानों की घुसपैठ रोकी और कश्मीर को भारत के साथ सुरक्षित किया।
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- पीओके के पास अपना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी है।
- 1963 में पाकिस्तान ने हुंजा गिलगिट नामक पीओके का एक हिस्सा चीन को दे दिया था। इसे ट्रांस काराकोरम ट्रैक के नाम से भी जाना जाता है।
- वर्तमान में पीओके के राष्ट्रपति मसूद खान और प्रधानमंत्री राजा फारुख हैदर हैं।
क्यों इतना खास है पीओके?
पीओके अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण बेहद खास है। यह क्षेत्र कई देशों की सीमा से सटा है। पश्चिम में पाकिस्तान में पंजाब, उत्तर-पश्चिम में अफगानिस्तान के वाखन कॉरिडोर, उत्तर में चीन के शिनजियांग और पूर्व में भारत के जम्मू कश्मीर से पीओके की सीमा जुड़ी है।
1947 से कैसी है पीओके की स्थिति?
- एक्सेशन के बाद से भारत के हिस्से में जो जम्मू कश्मीर है वह अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार संचालित होता आया। हालांकि अब अनुच्छेद 370 को खत्म किया जा चुका है और यहां केंद्र के नियम लागू होते हैं।
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- जबकि पीओके का आजाद जम्मू कश्मीर 1974 में बने अंतरिम संविधान कानून के तहत संचालित होता है। यहां तक कि आजाद जम्मू कश्मीर के पास अपना राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, काउंसिल और पूरा सरकारी ढांचा भी है। हालांकि यहां की सरकार के पास कोई शक्ति नहीं है। छोटे से छोटे मुद्दे के लिए भी वह पूरी तरह पाकिस्तान पर निर्भर है।
- 1949 में हुए करांची समझौते के तहत आजाद जम्मू कश्मीर के नेताओं ने उत्तरी क्षेत्रों को पाकिस्तान को सरेंडर कर दिया था। गिलगिट बाल्टिस्तान पर शासन के बारे में बताने वाला यह करांची समझौता आजाद कश्मीर के राष्ट्रपति, मुस्लिम कॉन्फ्रेंस और पाकिस्तान के मंत्री मुश्ताक अहमद गुरमानी के बीच साइन किया गया था।
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