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Bombay HC: गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को आरटीई के तहत 25 प्रतिशत कोटे से सशर्त छूट देने वाली अधिसूचना पर रोक

Mon, 06 May 2024 07:09 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 06 May 2024 07:09 PM IST
सार

Bombay HC: मुंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना पर रोक लगा दी है। इसमें निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों को एक किलोमीटर के दायरे में सरकारी स्कूल होने पर शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कोटा के तहत छात्रों को प्रवेश देने से छूट दी गई थी।

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HC stays notification giving conditional exemption from 25 pc RTE quota to pvt unaided schools
मुंबई उच्च न्यायालय - फोटो : ANI

विस्तार

Bombay HC: मुंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी उस अधिसूचना पर रोक लगा दी, जिसमें निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों को एक किलोमीटर के दायरे में सरकारी स्कूल होने पर शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कोटा के तहत छात्रों को प्रवेश देने से छूट दी गई थी।

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मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने कहा कि यह मुद्दा "भारी सार्वजनिक हित" से संबंधित है और 9 फरवरी को जारी की गई अधिसूचना, बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, जिसे आरटीई के रूप में भी जाना जाता है, के प्रावधानों का उल्लंघन है।
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आरटीई अधिनियम के तहत, निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश बिंदु - कक्षा 1 या पूर्व-प्राथमिक खंड - में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों के लिए आरक्षित होनी चाहिए। इन छात्रों को मुफ्त शिक्षा मिलती है, जबकि सरकार स्कूलों को उनकी ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति करती है।
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हालांकि, अधिसूचना में सरकार द्वारा संचालित या सहायता प्राप्त स्कूल के 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाले निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने से छूट दी गई है।


पीठ ने सोमवार को कहा कि इस तरह की अधिसूचना से बच्चों को दी जाने वाली मुफ्त शिक्षा में बाधा आएगी। अदालत ने कहा, "कोई भी अधीनस्थ कानून मूल अधिनियम के उल्लंघन में नहीं बनाया जा सकता है, यहां तक कि आरटीई अधिनियम में लागू प्रावधान जोड़कर भी नहीं बनाया जा सकता है।"

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