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HC: हाईकोर्ट ने मुंबई कॉलेज के हिजाब प्रतिबंध के फैसले में दखल देने से किया इंकार! जानें क्या है पूरा मामला

Wed, 26 Jun 2024 12:29 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Wed, 26 Jun 2024 12:29 PM IST
सार

High court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को शहर के एक कॉलेज द्वारा अपने परिसर में हिजाब, बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ ने कहा कि वह कॉलेज द्वारा लिए गए फैसले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है। विसतृत विवरण नीचे पढ़ें। 

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HC refuses to interfere in hijab ban decision of Mumbai college
Bombay High court - फोटो : ANI

विस्तार

High court: बंबई उच्च न्यायालय ने को शहर के एक कॉलेज द्वारा अपने परिसर में हिजाब, बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

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न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ ने कहा कि वह कॉलेज द्वारा लिए गए फैसले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है और इसके खिलाफ नौ छात्राओं द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी, जो विज्ञान डिग्री पाठ्यक्रम के दूसरे और तीसरे वर्ष में हैं।
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चेंबूर ट्रॉम्बे एजुकेशन सोसाइटी के एनजी आचार्य और डीके मराठे कॉलेज द्वारा एक ड्रेस कोड लागू करने के निर्देश को चुनौती देते हुए छात्रों ने इस महीने की शुरुआत में एचसी का रुख किया, जिसके तहत छात्र परिसर के अंदर हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी और बैज नहीं पहन सकते।
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याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि ऐसा निर्देश उनके धर्म का पालन करने के मौलिक अधिकारों, निजता के अधिकार और पसंद के अधिकार के खिलाफ है।

याचिका में कॉलेज की कार्रवाई को "मनमाना, अनुचित, गलत और विकृत" बताया गया।

याचिकाकर्ता के वकील अल्ताफ खान ने पिछले सप्ताह अपने दावे के समर्थन में कुरान की कुछ आयतें उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कीं कि हिजाब पहनना इस्लाम का एक अनिवार्य हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि अपने धर्म का पालन करने के अधिकार के अलावा, याचिकाकर्ता कॉलेज के फैसले का विरोध करते समय अपनी पसंद और निजता के अधिकार पर भी भरोसा कर रहे थे।

कॉलेज ने दावा किया था कि उसके परिसर में हिजाब, नकाब और बुर्का पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय केवल समान ड्रेस कोड के लिए एक अनुशासनात्मक कार्रवाई थी और यह मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं था।

कॉलेज प्रबंधन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अनिल अंतुरकर ने कहा कि ड्रेस कोड हर धर्म और जाति के सभी छात्रों के लिए है।

हालांकि, लड़कियों ने अपनी याचिका में दावा किया कि ऐसा निर्देश "सत्ता के दिखावटी प्रयोग के अलावा और कुछ नहीं" है।

उन्होंने शुरू में कॉलेज प्रबंधन और प्रिंसिपल से नकाब, बुर्का और हिजाब पर प्रतिबंध वापस लेने और इसे "कक्षा में पसंद, गरिमा और गोपनीयता के अधिकार के मामले के रूप में अनुमति देने का अनुरोध किया।"


लड़कियों ने नोटिस के खिलाफ मुंबई विश्वविद्यालय के चांसलर, कुलपति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के समक्ष भी अपनी शिकायत दर्ज कराई और "सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा प्रदान करने की भावना को बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।"

हालांकि, जब छात्रों को कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने HC में याचिका दायर की।

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