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खुशखबरी : नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की 2022 सत्र से मिल सकती है मंजूरी
Tue, 23 Nov 2021 06:16 AM IST
योगेश साहू
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Tue, 23 Nov 2021 06:16 AM IST
सार
विशेषज्ञ समिति ने अंतराष्ट्रीय व देश के बाजार में इंजीनियरिंग की घटती मांग को देखते हुए अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि 2020 सत्र में नए इंजीनियरिंग कालेजों में बीटेक प्रोग्राम में दाखिले नहीं हों।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
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विस्तार
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) शैक्षिक सत्र 2022-23 से नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की अनुमति दे सकती है। एआईसीटीई ने अपनी विशेषज्ञ समिति से नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के मसले पर राय मांगी है। इससे पहले एआईसीटीई ने इसी कमेटी के सुझाव पर 2019 में नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने पर रोक लगा दी थी।
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कमेटी ने पारंपरिक के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, रोबोटिक जैसे बाजार की मांग वाले या रोजगार देने वाले कोर्स को शुरू करने की सिफारिश की थी। एआईसीटीई के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, समिति के सुझाव पर वर्ष 2021 में किसी भी नए इंजीनियरिंग कॉलेज को पढ़ाई की अनुमति नहीं दी गई थी। हालांकि समिति ने दो साल बाद मार्केट डिमांड के आधार पर रिव्यू की सिफारिश भी की थी।
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इसी के चलते दोबारा सुझाव मांगे जा रहे हैं। विशेषज्ञ समिति ने अंतराष्ट्रीय व देश के बाजार में इंजीनियरिंग की घटती मांग को देखते हुए अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि 2020 सत्र में नए इंजीनियरिंग कालेजों में बीटेक प्रोग्राम में दाखिले नहीं हों। इसके अलावा 2019 सत्र में भी उन्हीं इंजीनियरिंग कालेजों में दाखिले की अनुमति दी जाए, जिनकी सीट पिछले सालों में भरती रही हैं।
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पाठ्यक्रम में भी बदलाव संभव
सूत्रों के मुताबिक, इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीटेक प्रोग्राम में कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल कोर्स में बदलाव हो सकता है। इसके लिए भी विशेषज्ञ कमेटी रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसमें नई शिक्षा नीति के तहत कुछ कोर्स शामिल किए जाएंगे। इन कोर्स में जो विषय मार्केट डिमांड के आधार पर प्रचलन या मांग में नहीं होंगे, उन्हें हटा दिया जाएगा।
50 फीसदी इंजीनियरों को नहीं मिलती नौकरी
इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद भी करीब 50 फीसदी छात्रों को नौकरी नहीं मिल रही थी। इसी कारण 2017 में एआईसीटीई ने आईआईटी हैदराबाद के बोर्ड ऑफ गवर्नर के चेयरमैन प्रो. बीवीआर मोहन रेड्डी की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित की थी। इसमें आईआईटी, फिक्की, नैसकॉम, एसोचैम, सेंटर फॉर मैनेजमेंट एजुकेशन आदि के विशेषज्ञ भी शामिल थे।
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