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UGC: आर्थिक रूप से पिछड़े प्रतिभाशाली छात्रों को विदेशी विवि देंगे छात्रवृत्ति, पढ़िए क्या बोले यूजीसी अधिकारी

Sat, 04 Nov 2023 05:43 AM IST
जलज मिश्रा सीमा शर्मा, नई दिल्ली
सीमा शर्मा, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 04 Nov 2023 05:43 AM IST
सार

यूजीसी ने विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस स्थापित करने और भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर कैंपस खोलकर डिग्री ऑफर करने की मंजूरी का मसौदा बना लिया है। यूरोप, सिंगापुर और आस्ट्रेलिया के कई विश्वविद्यालयों ने यहां अपना कैंपस खोलने में दिलचस्पी दिखाई है।

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Foreign universities will give scholarships to economically backward talented students
UGC

विस्तार

पैसों की किल्लत की वजह से विदेशी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई न कर पाने वाले छात्रों का सपना अब जल्द पूरा होने वाला है। दरअसल, भारत में अपना कैंपस स्थापित करने वाले विदेशी विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को मेरिट के आधार पर उच्च शिक्षा में स्कॉलरशिप देंगे। यही नहीं, कुछ विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस में ट्यूशन फीस में भी राहत देंगे।

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले दिनों यूजीसी काउंसिल की बैठक में विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस स्थापित करने का रास्ता खोल दिया गया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) जल्द ही भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस करने और उनके परिचालन संबंधी रेग्यूलेशन 2023 लेकर आ रहा है। इससे विदेश में जाकर पढ़ाई करने का सपना देखने वाले छात्रों को यहीं पर विदेशी डिग्री पाने का मौका मिलेगा। इससे उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने की प्रतिस्पर्द्धा बढ़ेगी और रिसर्च, इनोवेशन पर भी काम होगा। इससे छात्रों को तो फायदा होगा ही, शिक्षकों व अन्य कर्मियों की नियुक्ति से रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे।

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एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से मिलेगा फायदा
अधिकारी का कहना है कि यूजीसी ने पहले ही एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) लागू कर रखा है। विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस स्थापित करने से इसका सबसे अधिक लाभ होगा। विदेशों में क्रेडिट ट्रांसफर नियम लागू हैं। इससे विदेशी छात्रों के भारत आने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

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विदेशी शिक्षकों के साथ शोध का मौका 
विदेशी विश्वविद्यालयों के आने से सिर्फ डिग्री प्रोग्राम में पढ़ाई के फायदे के साथ शोधार्थियों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। अभी भारत और विदेशी विश्वविद्यालयों के कुछ प्रोफेसर कुछ क्षेत्रों में ही एक साथ शोध पर काम करते हैं। हालांकि विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खोलने से शोध क्षेत्र में काफी काम होगा। इससे भारतीय रैंकिंग में भी सुधार होगा।

विदेशों से कम होगी फीस
बेशक, विदेशी विश्वविद्यालय भारत सरकार से वित्त पोषित संस्थान न होने के कारण उनकी दाखिला प्रक्रिया, आरक्षण नियम, फीस ढांचे के निर्धारण में यूजीसी का दखल नहीं होगा। लेकिन फीस और दाखिले में पारदर्शिता रखनी होगी। कुल मिलाकर नियम बेशक विदेशी विश्वविद्यालय तय करेंगे, लेकिन विदेशों में जाकर उच्च शिक्षा के मुकाबले भारत में रहकर पढ़ाई करना सस्ता होगा।

कई विश्वविद्यालय कैंपस खोलने के इच्छुक
यूजीसी ने विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस स्थापित करने और भारतीय विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर कैंपस खोलकर डिग्री ऑफर करने की मंजूरी का मसौदा बना लिया है। यूरोप, सिंगापुर और आस्ट्रेलिया के कई विश्वविद्यालयों ने यहां अपना कैंपस खोलने में दिलचस्पी दिखाई है।

लाखों छात्र विदेश जाते हैं पढ़ने
भारत से हर वर्ष करीब सात से आठ लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाते हैं। यदि इन देशों के बड़े विश्वविद्यालय भारत में कैंपस स्थापित करते हैं तो छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तो उपलब्ध होगी ही, घर बैठे कम खर्चे पर विदेशी डिग्री हासिल करने का भी मौका मिलेगा।

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