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शिक्षा में सुधार: दसवीं क्लास से शुरू हो सकता है आर्ट एजुकेशन, संसदीय समिति का औपनिवेशिक सोच बाहर निकालने पर जोर

Tue, 01 Mar 2022 10:16 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Tue, 01 Mar 2022 10:16 PM IST
सार

समिति ने कला के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के संबंध में कहा कि, सरकार को राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय या एक केंद्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित करने के बारे में विचार करना चाहिए।

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for taking out from colonial thinking Parliamentary committee suggests to start Art education from class tenth
सांकेतिक फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

स्कूल छात्रों को भारतीय परंपरा,नाटक,नृत्य और संगीत से जोड़ने के लिए संसदीय समिति ने केंद्र सरकार को कई अहम सुझाव दिए है। शिक्षा की संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश में आर्ट एजुकेशन को आज गुलामी की मानसिकता से बाहर लाने और ज्यादा से ज्यादा भारत उन्मुख बनने की जरूरत है। इसके लिए छात्रों को दसवीं से आर्ट एजुकेशन पढ़ाया चाहिए।

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राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने परफार्मिंग और फाइन आर्ट की शिक्षा में सुधार लाने के लिए कई अहम सुझाव दिए है। समिति ने अपने सुझावों में कहा है कि, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कला को शिक्षा के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया है। इसलिए संगीत, नृत्य, विजुअल आर्ट और रंगमंच जैसे विषयों को स्कूली शिक्षा में अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। आर्ट एजुकेशन को 10वीं कक्षा तक अनिवार्य विषय बनाया जाना चाहिए। इस विषय के तहत छात्रों को संगीत, नृत्य, विजुअल आर्ट्स और रंगमंच सिखाएं जाने चाहिए। छात्र बेहतर तरीके से इसे सीख सके इसके लिए हर स्कूलों में बुनियादी ढांचा और सुविधाएं भी मुहैया कराई जानी चाहिए।
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7 फरवरी को संसद में पेश इस रिपोर्ट में कहा गया है, आर्ट एजुकेशन के विषयों में भारतीय परंपराओं को लोक कथाओं, कहानियों, नाटकों, चित्रों आदि के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। ताकि छात्र इस पढ़ाई में रुचि ले सके। वहीं आज देश में आर्ट एजुकेशन को लेकर जिस तरह की औपनिवेशिक सोच कायम है, उसे दूर करने के लिए आमूल-चूल परिवर्तन की भी  आवश्यकता है। समिति ने आर्ट एजुकेशन का पाठ्यक्रम तैयार करने पर काम करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और विभिन्न यूनिवर्सिटी के विभागों जैसे निकायों के साथ विचार-विमर्श करने का सुझाव दिया है।
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समिति ने कला के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के संबंध में कहा कि, सरकार को राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय या एक केंद्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित करने के बारे में विचार करना चाहिए। समिति ने देश में आर्ट एजुकेशन में अग्रणी भूमिका निभा रहे मौजूदा संस्थानों का जिक्र करते हुए कहा है कि, सरकार को भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई), पुणे, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) नई दिल्ली, अखिल भारतीय गंधर्व महाविद्यालय मुंबई और सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई जैसे संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों का दर्जा देने पर विचार किया जाना चाहिए। मान्यता मिलने पर इन प्रतिष्ठित संस्थानों को अपने काम और अपने विजन के विस्तार में मदद मिलेगी और उनकी शिक्षा और प्रमाणपत्रों की अहमियत भी बढ़ेगी।

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