फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Education: The government has set the target of making India completely literate in the next six years, Read h

Education: अगले छह साल में भारत बनेगा पूर्ण साक्षर, सरकार ने तय किया लक्ष्य; जानें क्या-क्या होगा बदलाव

Sun, 08 Sep 2024 02:50 PM IST
शाहीन परवीन सीमा शर्मा, अमर उजाला
सीमा शर्मा, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Sun, 08 Sep 2024 02:50 PM IST
सार

Education: सरकार ने वर्ष 2030 तक भारत को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अब स्कूल, कॉलेज और बीएड की पढ़ाई करने वाले छात्रों को साक्षरता अभियान से जुड़ने पर क्रेडिट और देशसेवा में सहयोग का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। 

विज्ञापन
Education: The government has set the target of making India completely literate in the next six years, Read h
Education - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक

विस्तार

Education: सरकार ने अगले छह साल में भारत को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य तय किया है। अब 15 साल से 60 साल तक के ऐसे व्यक्ति, जिन्होंने दूसरी कक्षा तक पढ़ाई की है, लेकिन अब लिखना-पढ़ना भूल चुके हैं, वे निरक्षर माने जाएंगे। 
विज्ञापन


साक्षरता अभियान "उल्लास" में साक्षर होने की परिभाषा भी बदल दी गई है। अब सिर्फ हस्ताक्षर करना आ जाने से काम नहीं चलेगा। बल्कि, हजार तक गिनती, जोड़-घटा, गुणा, भाग के साथ ओपन बोर्ड की 150 अंकों की फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी असेसमेंट (एफएलनेट) की परीक्षा पास करने पर ही साक्षर बन सकते हैं। इसके अलावा नोट की पहचान और टेलीफोन का उपयोग आदि भी सिखाया जा रहा है। साक्षर होने के बाद उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए वोकेशनल और स्किल की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाएगी।
विज्ञापन


शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव अर्चना शर्मा अवस्थी ने बताया कि वर्ष 2022 की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की साक्षरता दर 80.3 फीसदी है। इसमें महिलाओं की साक्षरता दर 74.2 फीसदी और पुरुषों की 86.2 फीसदी है। इस अंतर को मिटाने के लिए उल्लास में निरंतर बदलाव हो रहे हैं। पहले साक्षर होने का मतलब हस्ताक्षर करना और नाम लिखना या पढ़ना होता था। लेकिन अब केंद्र सरकार ने पूर्ण साक्षरता के लिए एक बेंचमार्क निर्धारित किया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अब 15 साल से 60 साल तक के ऐसे व्यक्ति, जिन्होंने दूसरी कक्षा तक पढ़ाई की है, लेकिन अब लिखना-पढ़ना भूल चुके हैं, वे निरक्षर माने जाएंगे। एनसीईआरटी ने 22 भारतीय भाषाओं में प्राइमर बनाए हैं, ताकि वे अपनी मातृभाषा में साक्षर बन सकें। 

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल (NIOS) की एफएलनेट की तीन घंटे की 150 अंकों परीक्षा होगी। इसमें रीडिंग, राइटिंग और नंबर से जुड़े 50-50 अंक की लिखित परीक्षा होगी। 2022 में शुरू साक्षरता मिशन के दूसरे चरण में 77 लाख ने पंजीकरण और करीब 66 लाख को पास होने पर साक्षरता सर्टिफिकेट मिला है।

अब 95 फीसदी पर पूर्ण साक्षर का दर्जा
सरकार ने नियम में बदलाव किया। अब किसी राज्य की साक्षरता दर 95 फीसदी हुई तो उसे पूर्ण साक्षर का दर्जा मिल जाएगा। इसके तहत लद्दाख को पूर्ण साक्षर का दर्जा मिल गया है।


हाईब्रिड के साथ अब डिजिटल लिटरेसी को जोड़ा
साक्षरता अभियान हाईब्रिड मोड से चल रहा है। नई शिक्षाा नीति में माना गया है कि साक्षरता और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसीलिए अब न्यू इंडिया और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के तहत साक्षरता मिशन में रीडिंग, राइटिंग और न्यूमरेसी के साथ डिजिटल लिटरेसी भी जोड़ा है। इसमें मोबाइल, एप का प्रयोग, अपना बैंक अकाउंट चेक करना समेत अन्य जानकारियां दी जाती हैं।

बिहार, बंगाल अब तक अभियान से दूर
अधिकतर राज्य सरकार अपने प्रदेश के नागरिकों को पूर्ण साक्षर बनाने में लगी हैं। जबकि दो राज्य बिहार और पश्चिम बंगाल सरकार ने दूरी बना रखी है। इन दोनों राज्यों में साक्षरता अभियान अब तक शुरू नहीं हो पाया है। जबकि तेलंगाना अब इस अभियान से जुड़ने जा रहा है। केंद्र ने तेलंगाना को फंड जारी कर दिया है।


छत्तीसगढ़, एमपी जम्मू-कश्मीर रोल मॉडल
छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्ण साक्षरता अभियान के लिए निरक्षरों को साक्षर बनाने में जुड़ने वाले छात्रों को 10 अंक देने का फैसला लिया है। मध्य प्रदेश सरकार भी स्वयंसेवी छात्रों के लिए अतिरिक्त अंक देने की योजना ला रही है। जबकि जम्मू-कश्मीर ने हर छात्र को आगे 10 निरक्षरों को पढ़ाने का नियम बनाया है। अन्य प्रदेश शिक्षा बोर्ड से स्वयंसेवी छात्रों को निरक्षरों को पढ़ाने के बदले क्रेडिट देने पर बात हो रही है। यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई अपने बीएड के स्वयंसेवी छात्रों को साक्षरता मिशन में जुड़ने पर क्रेडिट व प्रमाण देगा।


बबई ने 76 की उम्र में थामीं किताबें
सतारा जिले के कन्हेर बांध से विस्थापित गांव चिंचनी में ऐसे तो हर घर से लोग तहसीलदार से लेकर ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं। लेकिन गरीबी के कारण इसी गांव की 1945 को जन्मी बबई रामचंद्र म्हस्कर ने पढ़ाई के सपने को 76 साल की उम्र में आकर पूरा किया। 

वे भजन और धार्मिक किताबें पढ़ना चाहती थीं। लेकिन हिम्मत और जज्बे के कारण बबई को नियमों से परे साक्षरता अभियान में दाखिला मिला। पहले दिन कुछ अक्षर और अंक स्लेट पर लिखे। उन्होंने कहा, मैं अपने चेहरे की हंसी को शब्दों में बयां नहीं कर सकती हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed