शिक्षा मंत्रालय: बच्चों के घर आधारित शिक्षण में अभिभावकों की भागीदारी के लिए दिशा-निर्देश जारी
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शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने विद्यालय बंद होने और उसके बाद घर-आधारित शिक्षण में माता-पिता की भागीदारी के लिए शनिवार को दिशानिर्देश जारी किए। ये दिशा-निर्देश इसलिए जारी किए गए हैं ताकि छात्रों को मदद मिल सके। मंत्रालय का कहना है कि घर आधारित शिक्षण के दिशा-निर्देश माता-पिता के लिए एक सुरक्षित व आकर्षक वातावरण और एक सकारात्मक सीखने का माहौल बनाने की जरूरत पर जोर देते हैं । इसमें बच्चे से वास्तविक अपेक्षाएं रखते हुए उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने के साथ खानपान एवं खुशनुमा माहौल पर जोर दिया गया है ।
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ये दिशानिर्देश केवल माता-पिता के लिए ही नहीं, बल्कि देखभाल करने वालों, परिवार के अन्य सदस्यों, दादा-दादी, समुदाय के सदस्यों, बड़े भाई-बहनों के लिए भी हैं, जो बच्चों की बेहतरी को बढ़ावा देने के काम में लगे हुए हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने ट्वीट में कहा, ‘महामारी के इस समय में माता-पिता की भूमिका को बच्चों के विकास और सीखने के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए ये दिशा-निर्देश जारी किये गए हैं ।’उन्होंने कहा कि घर पहला विद्यालय है और माता-पिता पहले शिक्षक हैं।
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ये दिशानिर्देश बच्चों के घर पर शिक्षण की सुविधा को लेकर माता-पिता और अन्य लोगों के लिए कई सरल सुझाव प्रदान करते हैं। ये सुझाव योग्य गतिविधियां राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)2020 के तहत स्कूली शिक्षा के विभिन्न चरणों के अनुरूप हैं। ये गतिविधियां सरल और सुझाव योग्य हैं, जिन्हें स्थानीय जरूरतों और संदर्भों के लिए अनुकूलित किया जा सकता और अपनाया जा सकता है। ये दिशा-निर्देश तनाव या आघात के तहत बच्चों के लिए एक चिकित्सा के रूप में कला की भूमिका को प्रोत्साहित करते हैं।
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