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NEP: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले, भारतीय भाषा, कौशल-रोजगार व उद्यमिता पर करें फोकस

Fri, 27 Oct 2023 05:37 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 27 Oct 2023 05:37 AM IST
सार

यूजीसी की ओर से बड़ौदा में आयोजित कार्यक्रम में प्रधान ने गुजरात सरकार की सराहना की। गुजरात ने एनईपी को लेकर 10 साल का रोडमैप तैयार कर लिया है। प्रधान ने कहा कि उच्च शिक्षा में चार करोड़ से अधिक छात्र हैं। इनमें से पश्चिमी जोन के 15 फीसदी हैं।

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Education Minister Dharmendra Pradhan says focus on Indian language skill employment and entrepreneurship
Dharmendra Pradhan - फोटो : Social Media

विस्तार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बृहस्पतिवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के कारण छात्रों को मल्टीपल एंट्री-एग्जिट, बहु विषयक शिक्षा, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से सबसे अधिक फायदा होगा। विश्वविद्यालयों को भारतीय भाषा, ज्ञान परंपरा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता पर खास फोकस करना होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री एनईपी के कार्यान्वयन पर पश्चिमी जोन के कुलपतियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के कारण आज दुनिया छोटी हो रही है। इसलिए उभरते कौशल के मैपिंग की जरूरत है। वहीं, बेस्ट प्रैक्टिस से सभी शिक्षण संस्थानों को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।

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यूजीसी की ओर से बड़ौदा में आयोजित कार्यक्रम में प्रधान ने गुजरात सरकार की सराहना की। गुजरात ने एनईपी को लेकर 10 साल का रोडमैप तैयार कर लिया है। प्रधान ने कहा कि उच्च शिक्षा में चार करोड़ से अधिक छात्र हैं। इनमें से पश्चिमी जोन (महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा समेत अन्य केंद्र शासित प्रदेश) के 15 फीसदी हैं। यानी करीब 65 लाख से अधिक छात्र इन राज्यों से आते हैं। पश्चिमी जोन के विश्वविद्यालय देश के अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों से काफी अलग हैं।

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उन्होंने पश्चिमी जोन के विश्वविद्यालयों से भारत 2047 और भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए रोडमैप बनाने का आग्रह किया। इसमें उन्होंने केस स्ट्डी के आधार पर काम करना होगा ताकि उसके आधार पर देश के अन्य विश्वविद्यालयों में काम हो सके। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. एम जगदीश कुमार, एआईसीटीई के अध्यक्ष प्रोफेसर टीजी सीताराम समेत अन्य लोग भी मौजूद रहे।

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भारत और इंडिया में कोई फर्क नहीं
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने एनसीईआरटी की समिति द्वारा स्कूली पाठ्यक्रम में इंडिया की जगह भारत शब्द के प्रयोग के प्रस्ताव पर उपजे विवाद पर कहा कि भारत और इंडिया में कोई फर्क नहीं। हमने संविधान में भारत और इंडिया दोनों को स्वीकृति दी है। आज बौद्धिक जगत में कुंठित मन वाले कुछ लोगों में इसे    विवाद बनाने की प्रतिस्पर्धा लगी हुई है।

यूजीसी, एआईसीटीई का चार विषयों पर फोकस
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि यूजीसी और एआईसीटीई ने एनईपी के तहत चार विषयों पर फोकस करने को प्राथमिकता दी है। इसमें भारतीय भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता शिक्षा शामिल हैं।

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