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शिक्षा बजट 2020 : विदेशी निवेश मंजूर, टॉप 100 संस्थान वंचितों को देंगे ऑनलाइन डिग्री

Sun, 02 Feb 2020 03:50 AM IST
गौरव पाण्डेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 02 Feb 2020 03:50 AM IST
सार

  • समग्र शिक्षा अभियान के बजट में 6.69 फीसदी की बढ़ोतरी
  • 73332 करोड़ रुपये आईआईटी के लिए आवंटित किए गए
  • 59845 करोड़ रुपये स्कूली शिक्षा के लिए
  • 99311 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे 2020-21 में शिक्षा क्षेत्र पर
  • 39466 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा के लिए

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Education budget 2020: foreign investment approved, underprivileged will get online degrees
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में प्रौद्योगिकी और युवा वर्ग को इस बजट की पृष्ठभूमि बताते हुए नई शिक्षा नीति जल्द लागू करने का एलान किया। उन्होंने पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लाने की घोषणा की है। वहीं, बजट में भारत के शीर्ष 100 की रैंकिंग में आने वाले शिक्षण संस्थानों से समाज के गरीब और वंचित वर्गों को ऑनलाइन डिग्री देने की नई पहल भी की गई है। इसका मकसद वैसे लोगों को पढ़ाई से जोड़ने का भी है जो किसी कारणवश अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

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इससे पहले वित्त मंत्री ने 15-65 आयु वर्ग को उत्पादक करार दिया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण पर जोर देते हुए कहा, उच्च शिक्षा में भी एफडीआई की इजाजत दी जा सकती है। ग्रामीण और दूर-दराज के छात्रों के ऑनलाइन माध्यम से डिग्री लेवल कोर्स कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति को लेकर राज्यों से सुझाव मांगे गए थे। इसे लेकर राज्यों से दो लाख से ज्यादा सुझाव आएं हैं। इस बारे में राज्यों से बात चल रही है और जैसे ही इसकी शुरुआती प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, नई शिक्षा नीति पेश कर दी जाएगी।
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शिक्षा क्षेत्र में बेहतर शिक्षकों और अन्य सुविधाओं के लिए बड़े स्तर पर पूंजी जुटाई जाएगी। इसके अलावा, वित्त मंत्री ने संसद में वित्त वर्ष 2020-21 में शिक्षा पर 99,311 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की। साथ ही कौशल विकास पर 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की बात भी कही है। केंद्रीय विद्यालय को 5516.50 करोड़ रुपये जबकि नवोदय विद्यालय समिति को 3300 करोड़ रुपये मिले हैं। वहीं, यूजीसी को 4693.20 करोड़ और एआईसीटीई को 5109.20 करोड़ रुपये दिए गए हैं। नई शिक्षा नीति को लागू करने के लिए इक्किप नाम से शुरू की गई नई योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए 1413 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है। स्कूली शिक्षा में प्रतिभाशाली छात्रों के लिए प्रधानमंत्री इनोवेटिव लर्निंग प्रोग्राम (ध्रुव) नाम से नई योजना शुरू की गई है।

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राष्ट्रीय शिक्षा आयोग, स्कूलों में तीन भाषाएं पढ़ाने का प्रस्ताव

नई शिक्षा नीति में नीति आयोग की तर्ज पर राष्ट्रीय शिक्षा आयोग बनाए जाने की बात है। इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होंगे। नई शिक्षा नीति में स्कूलों में तीन भाषाएं पढ़ाए जाने का प्रस्ताव है। वर्ष 2025 तक तीन से छह वर्ष की उम्र के सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा मुहैया कराने का लक्ष्य है। 2030 तक तीन से 18 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य स्कूली शिक्षा मुहैया कराना व स्कूलों तक बच्चों की पहुंच सुनिश्चित करना। 2022 तक पाठ्यक्रम और शिक्षण के तरीके में बदलाव होंगे।

गांवों में बरसेंगी नौकरियां : स्किल इंडिया के जरिये रोजगार पर जोर दिया जाएगा। ग्रामीण युवाओं को इंटर्नशिप कराई जाएगी। भविष्य में सरकार गांव में रोजगार देगी।

नई शिक्षा नीति का एलान जल्द : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई शिक्षा नीति जल्द लाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्यों से दो लाख से ज्यादा सुझाव आएं हैं। इस पर काम चल रहा है।

आदिवासी बच्चों की शिक्षा : आदिवासी बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय योजना को बजट में 1313.23 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

150 उच्च शैक्षणिक संस्थान प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएंगे

वित्त मंत्री ने बताया कि मार्च 2021 तक देशभर में कुल 150 उच्च शैक्षणिक संस्थानों में अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम (प्रशिक्षण कार्यक्रम) और डिग्री-डिप्लोमा कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। कौशल विकास के तहत नए युवा इंजीनियरों को शहरी निकायों में एक साल की इंटर्नशिप की सुविधा दी जाएगी, जिससे युवाओं को समाज से जुड़े काम को समझने का मौका मिलेगा और शहरी निकायों को भी कामकाज में मदद मिल सकेगी। विभिन्न सरकारी तथा निजी औद्योगिक इकाइयों, अस्पतालों, गैर सरकारी संगठनों, विमानन कंपनियों तथा विनिर्माण कंपनियों को कुशल युवा मानव संसाधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न ट्रेड्स में डिप्लोमा की पढ़ाई के लिए साल 2021 तक नए संस्थानों की स्थापना की जाएगी। इससे लाखों की संख्या में युवा जनसंख्या को प्रशिक्षण के साथ ही नौकरियां मिलेंगी।

केंद्रीय विवि को 12 फीसदी ज्यादा पैसा : केंद्रीय विश्वविद्यालयों को 8657.90 करोड़ रुपये मिले हैं। पिछले साल के मुकाबले इन विश्वविद्यालयों के बजट में 12.39 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

एनआईटी पर रहम : राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) के बजट में 2.58 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी के साथ 3885 करोड़ रुपये मिले हैं।
आईआईएम पर सितम : भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) के बजट में 24 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। उसे महज  476 करोड़ रुपये मिले हैं।

शिक्षा के बजट में बढ़ोतरी और नई योजनाए पीएम मोदी के नए भारत का सपना  पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बजट में शिक्षा के साथ कौशल विकास को बढ़ावा देने पर फोकस किया गया है।
- डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, मानव संसाधन मंत्री

युवाओं को दक्ष बनाना... बेहतरीन प्रयास

मोदी शिक्षा के साथ युवाओं को कौशल विकास से भी जोड़ रहे हैं। बेहतरीन प्रयास है।  
- डॉ. महेंद्र नाथ पांडे, केंद्रीय मंत्री

 

वार : साक्षरता तो जरूरी है ही नौकरी देना भी लक्ष्य

बड़ी कार्यशील आबादी : 2030 तक भारत के पास विश्व की कार्यशील आयु वर्ग की सबसे बड़ी आबादी होगी। ऐसे में साक्षरता के साथ रोजगार एवं जीवन कौशल की भी जरूरत होगी। राज्यों के शिक्षा मंत्रियों-सांसदों से इस पर चर्चा की गईं। राष्ट्रीय कौशल विकास एजेंसी बुनियादी ढांचे के अवसरों पर जोर देगी।

प्रतिभावान शिक्षकों को बढ़ावा : प्रतिभावान शिक्षकों को आकर्षित व नई खोज करने और बेहतर प्रयोगशालाओं के निर्माण के मकसद से पैसे मुहैया कराने के लिए विदेशी वाणिज्यिक कर्जों व प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर जोर होगा।

डॉक्टरों की कमी पूरी करना मकसद : डॉक्टरों की देश में कमी है। इसके लिए सरकारी निजी भागीदारी से जिला अस्पतालों के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना है। ऐसे 112 जिलों में आयुष्मान भारत को तरजीह दी जाएगी। इससे रोजगार बढ़ेंगे।

व्यूह : दुनिया के छात्र आएंगे, ग्रामीण बच्चों को ट्रेनिंग

उच्च शिक्षा पर फोकस : स्थानीय निकायों में काम करने के लिए युवा इंजीनियरों को इंटर्नशिप की सुविधा दी जाएगी। उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सरकार काम कर रही है, दुनिया के छात्रों को भारत में पढ़ने के लिए सुविधाएं दी जाएंगी। भारत के छात्रों को भी एशिया, अफ्रीका के देशों में भेजा जाएगा।

गांवों में सरकार देगी रोजगार : कौशल विकास के लिए 3000 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। ग्रामीण युवाओं को इंटर्नशिप कराई जाएगी। भविष्य में सरकार गांव में रोजगार देगी।

गरीब के बच्चे घर बैठे पा सकेंगे तालीम : गरीब छात्रों की उच्च शिक्षा तक पहुंच के लिए डिग्री स्तर का सुव्यवस्थित ऑनलाइन कोर्स शुरू किए जाने की घोषणा की गई। इसके तहत दूर-दराज इलाकों के बच्चे तालीम पा सकेंगे।

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