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डीटीयू: ड्रोन, 5जी और वर्चुअल रियलिटी का कमाल, छात्रों ने खोजा टावरों की जांच का सुरक्षित तरीका
Mon, 12 Oct 2026 09:46 AM IST
शिवम तिवारी
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: शिवम तिवारी
Updated Mon, 12 Oct 2026 09:46 AM IST
सार
दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की टीम ने ड्रोन, पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल तकनीक और आभासी वास्तविकता की मदद से टेलीकॉम टावरों की जांच का नया तरीका विकसित किया है। इस नवाचार को पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल तकनीक हैकाथॉन 2026 में पहला स्थान और ढाई लाख रुपये मिले। वहीं, इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसरों को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में जगह मिली है।
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दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
- फोटो : AI Generated
विस्तार
टेलीकॉम टावरों पर जंग और नुकसान की जांच के लिए अब कर्मचारियों को ऊंचाई पर चढ़कर जोखिम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) की टीम बिटक्वेस्ट ने ड्रोन, पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल तकनीक (5जी) और आभासी वास्तविकता (वीआर) पर आधारित एक तकनीक विकसित की है। इससे दूर से ही टावरों की जांच करने में मदद मिलेगी। इस नवाचार के लिए टीम को दूरसंचार विभाग के 5जी इनोवेशन हैकाथॉन 2026 में पहला स्थान मिला है। टीम को ढाई लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया।
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इस परियोजना में डीटीयू के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की डॉ. अनामिका चौहान और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग विभाग के कौस्तुभ रंजन सिंह ने टीम का मार्गदर्शन किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रतीक शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि वेल्डसाइट परियोजना पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल तकनीक, ड्रोन और आभासी वास्तविकता को एक साथ जोड़ती है। इससे दूरसंचार ढांचे के निरीक्षण को सुरक्षित और प्रभावी बनाने की संभावनाएं सामने आती हैं।
उपलब्धि पर विश्वविद्यालय ने गर्व जताया है।
किस क्षेत्र में मिला सम्मान? सत्यव्रत महापात्र को अनुप्रयुक्त भौतिकी के क्षेत्र में लगातार सातवें वर्ष इस सूची में जगह मिली है। वहीं, प्रो. गगनदीप शर्मा को प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार दूसरी बार शामिल किया गया है। यह उपलब्धि उनके शोध और अकादमिक योगदान को दर्शाती है।
विश्वविद्यालय ने क्या कहा? ईपीयू के कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा ने दोनों प्रोफेसरों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान अन्य शिक्षकों और शोधार्थियों को अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही, विश्वविद्यालय में शोध की संस्कृति को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
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कैसे काम करेगा वेल्डसाइट समाधान?
डीटीयू की टीम ने वेल्डसाइट नाम से एक तकनीकी समाधान तैयार किया है। इसमें ड्रोन पर लगाए जाने वाले उपकरणों के साथ 5जी तकनीक और आभासी वास्तविकता आधारित दूरस्थ निरीक्षण प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से टेलीकॉम टावरों पर जंग और अन्य नुकसान की पहचान की जा सकेगी। इससे कर्मचारियों को जांच के लिए टावरों पर चढ़ने की जरूरत कम होगी। यह तकनीक निरीक्षण को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।
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टीम को पुरस्कार किसने दिया?
डीटीयू की टीम को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 के दौरान केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी टीम को बधाई दी। टीम में हर्ष भाटिया बतौर टीम लीडर शामिल हैं। इनके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अर्पित मदान और कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग की विनीता कुमारी मीना ने भी इस नवाचार में योगदान दिया।
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इस परियोजना में डीटीयू के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की डॉ. अनामिका चौहान और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग विभाग के कौस्तुभ रंजन सिंह ने टीम का मार्गदर्शन किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रतीक शर्मा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि वेल्डसाइट परियोजना पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल तकनीक, ड्रोन और आभासी वास्तविकता को एक साथ जोड़ती है। इससे दूरसंचार ढांचे के निरीक्षण को सुरक्षित और प्रभावी बनाने की संभावनाएं सामने आती हैं।
किन प्रोफेसरों को मिली जगह?
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) के दो प्रोफेसरों को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की वर्ष 2026 की सूची में शामिल किया गया है। इनमें प्रो. सत्यव्रत महापात्र और प्रो. गगनदीप शर्मा शामिल हैं। यह सूची अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एलसेवियर की ओर से जारी की गई है। दोनों प्रोफेसरों कीउपलब्धि पर विश्वविद्यालय ने गर्व जताया है।
किस क्षेत्र में मिला सम्मान? सत्यव्रत महापात्र को अनुप्रयुक्त भौतिकी के क्षेत्र में लगातार सातवें वर्ष इस सूची में जगह मिली है। वहीं, प्रो. गगनदीप शर्मा को प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार दूसरी बार शामिल किया गया है। यह उपलब्धि उनके शोध और अकादमिक योगदान को दर्शाती है।
विश्वविद्यालय ने क्या कहा? ईपीयू के कुलपति पद्मश्री प्रो. डॉ. महेश वर्मा ने दोनों प्रोफेसरों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान अन्य शिक्षकों और शोधार्थियों को अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगा। साथ ही, विश्वविद्यालय में शोध की संस्कृति को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
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