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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Digvijaya Singh urges PM Modi to put 3-language policy implementation on hold

CBSE: दिग्विजय सिंह ने PM को लिखा पत्र, तीन-भाषा नीति को स्थगित करने की मांग, कहा- 'गंभीर व्यवधान की आशंका'

Sun, 07 Jun 2026 11:10 AM IST
Shahin Praveen एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Shahin Praveen Updated Sun, 07 Jun 2026 11:10 AM IST
सार

CBSE Three-Language Policy: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बीच लागू किए जाने पर चिंता जताई है। 

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Digvijaya Singh urges PM Modi to put 3-language policy implementation on hold
दिग्विजय सिंह - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक

विस्तार

NEP 2020: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बीच कक्षा 9 के छात्रों के लिए इस नीति को अनिवार्य रूप से लागू करने पर आपत्ति दर्ज कराते हुए सरकार से इसके क्रियान्वयन को स्थगित करने का आग्रह किया है।

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संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष सिंह ने कहा कि पर्याप्त शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों या संक्रमणकालीन समय के बिना सत्र के मध्य में अचानक इस नीति को लागू करने से गंभीर व्यवधान उत्पन्न होने की संभावना है, "ठीक उसी तरह की अराजकता जैसी जो सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को जल्दबाजी में लागू करने के दौरान देखी गई थी"।
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उन्होंने कहा, "मैं इसके साथ सीबीएसई कक्षा नौ के छात्रों के कुछ चिंतित अभिभावकों से प्राप्त अभ्यावेदन भेज रहा हूं, जो वर्तमान मध्य सत्र में तीन-भाषा नीति के अनिवार्य कार्यान्वयन का विरोध कर रहे हैं।"
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आगे उन्होंने कहा, "अभिभावकों की शिकायतों और मांगों को पढ़ने के बाद मुझे लगता है कि उनकी चिंताएं सही हैं और उन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। यदि पर्याप्त शिक्षक, किताबें और तैयारी के लिए समय उपलब्ध नहीं होगा, तो सत्र के बीच में इस नीति को लागू करने से बड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इससे वैसी ही अव्यवस्था हो सकती है जैसी सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को जल्दबाजी में लागू करने के दौरान हुई थी, जिससे देशभर के लाखों छात्र प्रभावित हुए थे।"

सीबीएसई के फैसले पर दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने कहा कि दिसंबर 2025 में सीबीएसई की बैठक में यह तय किया गया था कि जब तक एनसीईआरटी नई भाषा की किताबें जारी नहीं करता, तब तक स्कूल पुरानी व्यवस्था के अनुसार पढ़ाई जारी रखें। उनका कहना है कि इस फैसले के बावजूद सीबीएसई ने नई भाषा नीति लागू करने का निर्देश दे दिया।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि सीबीएसई ने 15 मई 2026 को जारी एक आदेश में 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीसरी भाषा पढ़ाना अनिवार्य कर दिया। जबकि एनसीईआरटी ने अभी तक इसके लिए नई किताबें जारी नहीं की हैं। ऐसे में स्कूलों को कक्षा 6 की किताबें इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे स्कूलों और छात्रों को परेशानी हो सकती है और उनकी पढ़ाई की योजना प्रभावित हो सकती है।

दिग्विजय सिंह की मुख्य दलीलें

  • दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह नीति दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्व के राज्यों के छात्रों के लिए ज्यादा परेशानी पैदा कर सकती है, क्योंकि वहां हिंदी आमतौर पर नहीं बोली जाती।
  • उन्होंने कहा कि कई स्थानीय और आदिवासी भाषाएं सीबीएसई की मान्यता प्राप्त भाषाओं की सूची में शामिल नहीं हैं, जिससे छात्रों के सामने भाषा चुनने की समस्या आ सकती है।
  • सिंह के अनुसार, कई स्कूलों में संस्कृत तीसरी भाषा के रूप में लोकप्रिय है, लेकिन योग्य संस्कृत शिक्षकों और उचित पाठ्यपुस्तकों की कमी है।
  • उनका कहना है कि संसाधनों की कमी के कारण संस्कृत को बढ़ावा देने का उद्देश्य भी प्रभावित हो सकता है।

नीति को रोकने की मांग

  • दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से कक्षा 9 के मौजूदा छात्रों के लिए इस नीति को तुरंत रोकने की अपील की है।
  • उन्होंने कहा कि इस मामले पर अदालत में सुनवाई चल रही है और फैसला 15 जुलाई 2026 को आने की संभावना है।
  • जबकि स्कूलों में तीसरी भाषा की पढ़ाई 1 जुलाई 2026 से शुरू होनी है। ऐसे में उनका मानना है कि अदालत के फैसले से पहले इस नीति को लागू करना उचित नहीं होगा।

छात्रों के हित में तुरंत फैसला लेने की अपील

दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से इस मुद्दे पर जल्द और संवेदनशीलता के साथ विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य सही और सोच-समझकर लिए गए नीतिगत फैसलों पर निर्भर करता है। सिंह ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने हाल ही में NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था और NTA की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की थी।

उन्होंने कहा कि छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि 3 मई को हुई NEET-UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था और इसकी जांच CBI कर रही है, जबकि दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है।

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