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Delhi University: डीयू में मई की परीक्षा ऑफलाइन मोड में होगी, विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द ही जारी होंगे
Fri, 11 Feb 2022 11:19 PM IST
सुभाष कुमार
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: सुभाष कुमार
Updated Fri, 11 Feb 2022 11:19 PM IST
सार
Delhi University: मालूम हो कि कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020 से दिल्ली विश्वविद्यालय बंद होने के कारण परीक्षाएं ओबीई रुप में ली जा रही हैं।
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Delhi University
- फोटो : Social Media
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विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय में 17 फरवरी से ऑफलाइन पढ़ाई शुरु होने जा रही है। अब डीयू में दो साल बाद परीक्षाएं भी ऑफलाइन होंगी। मई में दूसरे, चौथे, छठे व आठवें सेमेस्टर की परीक्षाएं ऑफलाइन में ही होंगी। जबकि पहले से तय मार्च में होने वाले पहले, तीसरे, पांचवें व सातवें सेमेस्टर की परीक्षा ओपन बुक एग्जाम (ओबीई) आयोजित की जाएगी। डीयू परीक्षा शाखा ने वर्किंग ग्रुप (परीक्षा) की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला लिया है। परीक्षाओं को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द ही जारी किए जाएंगे। उधर, डीयू के शिक्षकों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है।
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इस संबंध में डीयू परीक्षा शाखा की ओर से नोटिस जारी कर दिया गया है। डीयू प्रशासन ने बीते 09 फरवरी को ही 17 फरवरी से कैंपस खोलने की घोषणा की है। इस तरह से अब डीयू में ऑफलाइन कक्षाएं शुरु होंगी। ऐसे में अब परीक्षाओं को भी ऑफलाइन मोड में लिए जाने की जरुरत महसूस हो रही थी। चूंकि मार्च की परीक्षा पहले से ओबीई मोड में तय थी इसलिए फिलहाल विषम सेमेस्टर की परीक्षा तो ओबीई मोड में होगी लेकिन मई की परीक्षाएं ऑफलाइन ली जाएंगी। छात्रों को इस संबंध में पहले से बताया जा रहा है जिससे कि वह इन परीक्षाओं के लिए तैयार हो सकें।
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मालूम हो कि कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020 से दिल्ली विश्वविद्यालय बंद होने के कारण परीक्षाएं ओबीई रुप में ली जा रही हैं। ओपन बुक एग्जाम व्यवस्था के तहत नियमित कॉलेजों, एसओएल(स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग) व नॉन कॉलिजिएयेट वूमेन एजुकेशन बोर्ड(एनसीवेब) के दो लाख से अधिक छात्रों ने घर बैठे परीक्षा दी थी। परीक्षा देने के लिए किताबों नोट्स व अन्य लिखित सामग्री का भी प्रयोग कर रहे थे। उन्हें पेपर डाउनलोड करने, स्कैनिंग व व उत्तर पुस्तिका अपलोड करने के लिए समय दिया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2020 अगस्त से हुई थी। पहली बार ओबीई शुरु करने के बाद काफी छात्रों व शिक्षकों ने परेशानी की शिकायत की थी।
शिक्षकों ने किया विरोध
डीयू के ओबीई मोड में अभी परीक्षा लिए जाने के फैसले पर शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। शिक्षक संगठन इंटेक के अध्यक्ष डॉ पंकज गर्ग का कहना है कि यदि पहले सेमेस्टर की परीक्षा ओबीई मोड में होनी है तो छात्रों को 17 फरवरी से ऑफ लाइन मोड की कक्षाओं में बुलाने का कोई मतलब नहीं है। इन छात्रों की कक्षाएं मार्च के पहले सप्ताह तक हैं। उसके बाद परीक्षा शुरू होनी है। 40 फीसदी से ज्यादा बच्चे दिल्ली से बाहर के हैं। पीजी में रहने के लिए उनको ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। गरीब तबके के छात्रों को इससे बड़ी परेशानी होगी।
डीयू के ओबीई मोड में अभी परीक्षा लिए जाने के फैसले पर शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। शिक्षक संगठन इंटेक के अध्यक्ष डॉ पंकज गर्ग का कहना है कि यदि पहले सेमेस्टर की परीक्षा ओबीई मोड में होनी है तो छात्रों को 17 फरवरी से ऑफ लाइन मोड की कक्षाओं में बुलाने का कोई मतलब नहीं है। इन छात्रों की कक्षाएं मार्च के पहले सप्ताह तक हैं। उसके बाद परीक्षा शुरू होनी है। 40 फीसदी से ज्यादा बच्चे दिल्ली से बाहर के हैं। पीजी में रहने के लिए उनको ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। गरीब तबके के छात्रों को इससे बड़ी परेशानी होगी।
डीयू में स्नातक करिकलुम फ्रेमवर्क के ढांचे को ईसी से भी मिली हरी झंडी
दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार किए गए स्नातक करिकुलम फ्रेमवर्क के ढांचे को कार्यकारी परिषद(ईसी) से भी मंजूरी मिल गई है। इस तरह से आगामी शैक्षणिक सत्र 2022-23 से चार वर्षीय पाठ्यक्रम के आधार पर पढ़ाई होगी। इससे पहले बुधवार को एकेडेमिक काउंसिल की बैठक में ढांचे को मंजूरी दी गई थी। शुक्रवार को ईसी की बैठक में स्नातक करिकुलम फ्रेमवर्क ढांचे पर काफी चर्चा केबाद पास कर दिया गया। बैठक में कुछ सदस्यों ने विरोध भी जताया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार किए गए स्नातक करिकुलम फ्रेमवर्क के ढांचे को कार्यकारी परिषद(ईसी) से भी मंजूरी मिल गई है। इस तरह से आगामी शैक्षणिक सत्र 2022-23 से चार वर्षीय पाठ्यक्रम के आधार पर पढ़ाई होगी। इससे पहले बुधवार को एकेडेमिक काउंसिल की बैठक में ढांचे को मंजूरी दी गई थी। शुक्रवार को ईसी की बैठक में स्नातक करिकुलम फ्रेमवर्क ढांचे पर काफी चर्चा केबाद पास कर दिया गया। बैठक में कुछ सदस्यों ने विरोध भी जताया।
डीयू की कार्यकारी परिषद(ईसी) केसदस्य प्रो वी.एस नेगी ने बताया कि फ्रेमवर्क पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दे दी गई है। वहीं इसमें कुछ बदलाव को भी मंजूरी दी गई है। अब दो सेमेस्टर में छात्रों केलिए पेपर चयन केविकल्प बढ़ाए गए हैं। अब वह चार-पांच पेपर में से पेपर चयन कर सकेंगे। वहीं फर,जिकल एजुकेशन एंड स्पोट्र्स को विषय केरुप में जोड़ा गया है। अब विभिन्न विषय विशेषज्ञ कमेटी पाठ्यक्रम तैयार करने की दिशा में काम शुरु करेगी। जिससे कि यह पाठ्यक्रम जुलाई-अगस्त में शुरु होने वाले सत्र से लागू किया जा सके।
स्नातक करिकुलम फ्रेमवर्क पर तीन सदस्यों अधिवक्ता अशोक अग्रवाल, अधिवक्ता राजपाल, व शिक्षकों की प्रतिनिधि डॉ सीमा दास ने लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई गई। बावजूद इसकेपास कर दिया गया।
स्नातक करिकुलम फ्रेमवर्क पर तीन सदस्यों अधिवक्ता अशोक अग्रवाल, अधिवक्ता राजपाल, व शिक्षकों की प्रतिनिधि डॉ सीमा दास ने लिखित आपत्ति भी दर्ज कराई गई। बावजूद इसकेपास कर दिया गया।
प्रो नेगी ने बताया कि फ्रेमवर्क लागू होने पर तदर्थ शिक्षकों के वर्कलोड के कम होने की संभावना जताई जा रही है। इस पर बैठक में कहा गया है कि इस पर ध्यान रखा जाएगा कि तदर्थ शिक्षकों का वर्कलोड कम ना हो। इसके लिए बैठक में बताया गया है कि वर्कलोड को लेकर प्रिंसिपल केसाथ बातचीत की जाएगी। बैठक में तदर्थ महिला शिक्षकों और अनुबंध पर काम कर रही महिला कर्मचारियों के मातृत्व अवकाश का मुद्दा भी उठाया गया। बैठक में सदस्यों की ओर से कहा गया कि मातृत्व अवकाश का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद भी शिक्षकों को इस अवकाश का लाभ नहीं मिल रहा है।
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