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Hindi News ›   Education ›   Delhi University to Review Faculty Performance, Sparks Concerns Among Teachers

Delhi University: डीयू के शिक्षकों की परफॉर्मेंस पर होगी नजर, समीक्षा को लेकर उठे सवाल

Sat, 24 May 2025 08:25 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Sat, 24 May 2025 08:25 AM IST
सार

DU: डीयू में शिक्षकों के कार्यों की समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार की हालिया अधिसूचना के तहत एक नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जो शिक्षकों के प्रदर्शन और जिम्मेदारियों का मूल्यांकन करेगी। इस कदम पर कुछ शिक्षकों ने आपत्ति जताई है

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Delhi University to Review Faculty Performance, Sparks Concerns Among Teachers
दिल्ली विश्वविद्यालय, Delhi University - फोटो : University Of Delhi

विस्तार

Delhi University Teacher: दिल्ली विश्वविद्यालय समय-समय पर अपने कर्मचारियों की कार्यक्षमता की समीक्षा कर संभावनाओं को जांचेगा। इसके लिए डीयू ने नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। डीयू ने यह निर्णय केंद्र सरकार की अधिसूचना के मद्देनजर लिया है। इसमें काम में लापरवाही या ईमानदारी पर संदेह होने पर कर्मचारी को समय से पहले सेवानिवृत्त करने की बात है।

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समिति का अध्यक्ष डीयू कार्यकारी परिषद के चांसलर नामित सदस्य इंद्र मोहन कपाही को बनाया गया है। डीयू में शुक्रवार को हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव लाया गया। प्रस्ताव में डीओपीटी के जून 2024 में जारी ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला दिया गया। इस मेमोरेंडम में सरकारी और स्वायत निकायों के कर्मचारियों की हर तीन महीने में समीक्षा की बात है। इसमें 50-55 वर्ष की उम्र के बाद वाले या 30 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को जनहित में रिटायर करने की बात है।

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शिक्षकों ने जताई नाराजगी

जहां विश्वविद्यालय इस कदम को प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला कह रहा है। वहीं शिक्षक समुदाय इस पर आपत्ति जता रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि इसका गलत इस्तेमाल होगा और जो लोग विरोध करेंगे उनपर गाज गिर सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए है, लेकिन शिक्षकों के एक वर्ग ने इस पर नाराजगी जताई है।

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कार्यकारी परिषद सदस्य प्रो. मिथुराज धुसिया ने असहमति व्यक्त करते हुए कहा, नियम केवल केंद्रीय सिविल सेवा नियमों (CCS) के तहत आने वाले कर्मचारियों पर लागू होता है, जबकि डीयू के शिक्षक इसके दायरे में नहीं आते।  इंडियन नेशनल टीचर कांग्रेस के चेयरमैन प्रो. पंकज कुमार गर्ग ने कहा, इसे  नौकरशाही तंत्र के लिए तैयार किया गया है।

इस प्रकार के कदम से शैक्षणिक स्वतंत्रता और मनोबल पर  प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मालूम हो कि समिति की सिफारिशों को अगली कार्यकारी परिषद की बैठक में रखा जाएगा।

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