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JMI: हाईकोर्ट ने आवासीय कोचिंग अकादमी में ओबीसी प्रवेश को लेकर याचिका पर जामिया से मांगा जबाव, नोटिस जारी

Wed, 22 Jan 2025 05:57 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 22 Jan 2025 05:57 PM IST
सार

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया मिलिया इस्लामिया की आवासीय कोचिंग अकादमी में ओबीसी छात्रों के प्रवेश से संबंधित याचिका पर विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है। कोर्ट ने जामिया और यूजीसी को नोटिस जारी भी किया।
 

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Delhi HC asks Jamia stand on PIL seeks OBC students admissions in coaching academy; Read here
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

Resident Coaching JMI: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को सिविल सेवा उम्मीदवारों के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया की आवासीय कोचिंग अकादमी में ओबीसी (नॉन-क्रीमी लेयर) छात्रों के प्रवेश पर दायर याचिका पर जवाब मांगा। यह याचिका कानून के छात्र सत्यम सिंह ने दाखिल की थी। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने जामिया और यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) को नोटिस जारी किया।

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ओबीसी और ईडब्ल्यूएस को भी मिले लाभ: याचिकाकर्ता

यूजीसी के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए सिंह ने कहा कि जामिया मुफ्त कोचिंग को केवल छात्राओं और एससी/एसटी तथा अल्पसंख्यक समुदायों तक सीमित नहीं कर सकता, क्योंकि उसका दायित्व ओबीसी (गैर-क्रीमी लेयर) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) दोनों को लाभ प्रदान करना है।

हालांकि, अदालत ने बताया कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए यूजीसी के नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका को केवल ओबीसी छात्रों तक सीमित कर दिया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि कोचिंग अकादमी में ओबीसी छात्रों को प्रवेश देने का "अधिकार" कैसे बनता है। अदालत ने कहा कि यह आरक्षण का मामला है, और नीति बनाना अधिकारियों का काम है, न कि कोर्ट का।

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'यूजीसी से मिलती है जामिया को वित्तीय सहायता, भेदभाव नहीं किया जा सकता'

याचिका में कहा गया कि यूजीसी ने जामिया समेत चार केंद्रीय विश्वविद्यालयों को वित्तीय सहायता दी है। इसलिए, जामिया को वंचित छात्रों के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि जामिया की कोचिंग अकादमी की मौजूदा प्रवेश नीति मनमानी और भेदभावपूर्ण है, क्योंकि इसमें ओबीसी और ईडब्ल्यूएस छात्रों को बाहर रखा गया है।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि आवासीय कोचिंग अकादमी का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों के वंचित छात्रों को समान अवसर देना है। लेकिन ओबीसी और ईडब्ल्यूएस छात्रों, जिन्हें यूपीएससी भी आरक्षण देता है, को इससे बाहर रखा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।

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