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Hindi News ›   Education ›   Delhi Govt Preschools Outshine Private Ones in Infrastructure, Safety and Teaching Quality: Jamia Study

Report: दिल्ली में निजी स्कूलों पर भारी सराकरी प्री-विद्यालय; जामिया की ताजा स्टडी में खुलासा

Wed, 08 Oct 2025 07:38 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 08 Oct 2025 07:38 PM IST
सार

Research: जामिया मिलिया इस्लामिया द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित प्री-स्कूल (बाल पूर्व शिक्षा केंद्र) ने निजी स्कूलों की तुलना में बेहतर हैं। यह स्टडी 45 स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर की गई।
 

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Delhi Govt Preschools Outshine Private Ones in Infrastructure, Safety and Teaching Quality: Jamia Study
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

Research: आमतौर पर भारत के लोगों में यह अवधारणा है कि प्राइवेट स्कूलों में सरकारी स्कूलों की तुलना में अच्छी पढ़ाई और सुविधाएं होती हैं। लेकिन इसके विपरीत, जामिया मिलिया इस्लामिया द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया है कि दिल्ली सरकार द्वारा संचालित प्री-स्कूल (बाल पूर्व शिक्षा केंद्र) ने निजी स्कूलों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। 

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छह प्रमुख मानकों के आधार पर हुआ मूल्यांकन

अध्ययन में यह बढ़त छह प्रमुख मानकों पर दर्ज की गई है, जिसमें शामिल हैं- भौतिक ढांचा, वॉश (जल, स्वच्छता और हाइजीन) प्रथाएं, बाल-अनुकूल वातावरण, पाठ्यक्रम क्रियान्वयन, कक्षा प्रक्रिया और सुरक्षा।

  1. भौतिक ढांचा
  2. जल, स्वच्छता और हाइजीन (WASH) प्रथाएं
  3. बाल-अनुकूल वातावरण
  4. पाठ्यक्रम क्रियान्वयन
  5. कक्षा प्रक्रिया
  6. सुरक्षा मानक


इसके लिए ‘आंगनवाड़ी असेसमेंट स्केल’ नामक मानक का इस्तेमाल किया गया, जिसके आधार पर संस्थानों को तीन श्रेणियों ‘कमजोर’, ‘औसत’ और ‘अच्छा’ में विभाजित किया गया।

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ऐसा रहा स्कूलों का प्रदर्शन

अध्ययन के मुताबिक, सभी छह घटकों को मिलाकर देखा जाए तो सरकारी प्री-स्कूल समग्र रूप से सबसे बेहतर रहे। इनमें से आधे से अधिक संस्थान ‘गुड’ श्रेणी में पाए गए। निजी प्री-स्कूल उनके ठीक पीछे रहे, जबकि आंगनवाड़ी केंद्रों का प्रदर्शन अधिकतर ‘औसत’ स्तर का रहा और एक आंगनवाड़ी को ‘कमजोर’ रेटिंग दी गई। यह अध्ययन वर्ष 2025 में प्रकाशित हुआ।

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कुल 45 स्कूलों पर हुआ अध्ययन

जामिया के शिक्षा विभाग के शोधकर्ताओं ने वर्ष 2023 में दिल्ली के कुल 45 प्री-स्कूलों का अध्ययन किया, जिनमें 15 सरकारी, 15 निजी और 15 आंगनवाड़ी केंद्र शामिल थे।

यह अध्ययन “A quantitative study on quality of physical infrastructure, WASH practices, preschool education and safety in Anganwadi centers, government preschools and private preschools in Delhi” शीर्षक से Discover Education (2025) में प्रकाशित हुआ।

1. भौतिक ढांचा: सरकारी स्कूल आगे

अध्ययन के अनुसार, 15 में से 13 सरकारी प्री-स्कूलों का भौतिक ढांचा ‘गुड’ पाया गया, जबकि निजी स्कूलों में आठ और आंगनवाड़ी केंद्रों में केवल चार को ‘गुड’ रेटिंग मिली। दस आंगनवाड़ी ‘औसत’ और एक ‘कमज़ोर’ पाई गई।

शोधकर्ताओं ने बताया कि अधिकतर आंगनवाड़ी किराए या स्वतंत्र इमारतों में चलती हैं, जिनमें पर्याप्त जगह, रोशनी और सुविधाओं की कमी होती है। दूसरी ओर, सरकारी प्री-स्कूल प्रायः सरस्वती या सर्वोदय विद्यालयों से जुड़े होते हैं, जिससे उन्हें बेहतर संसाधन और इन्फ्रास्ट्रक्चर मिलता है।

2. वॉश प्रथाएं: सरकारी स्कूलों में सुधार की गुंजाइश

इस घटक में किसी भी सरकारी प्री-स्कूल को ‘गुड’ रेटिंग नहीं मिली। सभी 15 ‘औसत’ स्तर पर रहे। निजी स्कूलों में 12 ‘औसत’ और तीन ‘गुड’ रहे। वहीं, आंगनवाड़ी केंद्रों में 11 ‘औसत’, तीन ‘गुड’ और एक ‘कमजोर’ पाई गई।

अध्ययन में पाया गया कि टॉयलेट, डस्टबिन और पानी की सुविधाएं तो अधिकतर जगह मौजूद थीं, लेकिन उनका नियमित और सही उपयोग नहीं हो रहा था।

3. बाल-अनुकूल वातावरण: सीमित रचनात्मकता

अधिकांश प्री-स्कूल इस श्रेणी में ‘औसत’ स्तर पर रहे। चार आंगनवाड़ी और पांच निजी स्कूल ‘कमजोर’ पाए गए। केवल छह सरकारी प्री-स्कूल और दो आंगनवाड़ी केंद्र ‘गुड’ श्रेणी में आए। अध्ययन ने बताया कि कई केंद्रों में बच्चों के खेल या रचनात्मक गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं था।

4. पाठ्यक्रम क्रियान्वयन: योजनाबद्धता की कमी

इस श्रेणी में भी अधिकतर संस्थान ‘औसत’ रहे। 10 आंगनवाड़ी, 11 सरकारी और 11 निजी प्री-स्कूल इस श्रेणी में शामिल थे। अध्ययन के अनुसार, अधिकांश जगह शिक्षण गतिविधियां बिना योजना के होती थीं, कक्षाओं के बीच संक्रमण असंगत था और केवल आधे बच्चे ही सक्रिय रूप से भाग लेते थे।

5. कक्षा प्रक्रिया: सरकारी और निजी स्कूलों का अच्छा प्रदर्शन

इस घटक में सभी 15 सरकारी प्री-स्कूल और 13 निजी स्कूल ‘गुड’ श्रेणी में पाए गए। जबकि 11 आंगनवाड़ी ‘औसत’, तीन ‘गुड’ और एक ‘कमजोर’ रही।

शोधकर्ताओं ने बताया कि सरकारी शिक्षिकाएं बच्चों के नाम लेकर संवाद करती हैं, उन्हें बोलने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और मातृभाषा का उपयोग करती हैं, जिससे कक्षा में भागीदारी बढ़ती है।

6. सुरक्षा मानक: सरकारी स्कूल सबसे सुरक्षित

सुरक्षा के मामले में 14 सरकारी और 13 निजी स्कूल ‘गुड’ पाए गए। आंगनवाड़ी में 11 ‘औसत’, दो ‘गुड’ और दो ‘कमजोर’ रही। कई आंगनवाड़ी केंद्रों में फर्स्ट एड किट नहीं थी, खुले नाले थे और बच्चों के आने-जाने की स्पष्ट प्रक्रिया नहीं थी।

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