Global Village के युग में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई का बढ़ा क्रेज, जानें पिछले 30 साल में कितने युवा गए विदेश
कजाकिस्तान बना मेडिकल एजुकेशन का नया हॉट स्पॉट, कम फीस होने के कारण यहां जाने वाले छात्रों की संख्या में हर वर्ष हो रहा इजाफा, अगर आप भी जाना चाहते हैं शिक्षा के लिए विदेश तो इस टोल फ्री नंबर 1800-571-0202 पर कॉल करके बुक करें अपनी सीट।
विस्तार
नालंदा और तक्षशिला जैसे मशहूर शिक्षण संस्थानों की धरती भारत में विदेश से शिक्षा का चलन काफी पुराना है। देश की आजादी से पहले और उसके बाद भी भारत से युवा विदेश शिक्षा के लिए जाते रहे हैं। लेकिन सन् 1995-2000 के बाद विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा होने लगा। इसे हम इस सारणी से समझ सकते हैं।
| वर्ष | शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या |
| 1995 | 39,625 |
| 2000 | 66713 |
| 2005 | 146,267 |
| 2012 | 189,472 |
| 2019 | 10,90,000 |
| 2022 | 13,20,000 |
| 2023 | 13,18,955 |
| 2024 | 13,35,878 अनुमानित |
| 2025 | 20 लाख अनुमानित |
आमतौर पर पहले भी छात्र कम संख्या में ही सही विदेश उच्च शिक्षा की पढ़ाई के लिये जाया करते थे। हालांकि साधन-संपन्न छात्र या फिर स्कॉलरशिप पाने वाले छात्र ही विदेश में प्रतिष्ठित पढ़ाई के लिये एडमिशन लेते थे। लेकिन पिछले दो दशकों की बात करें तो खासकर मेडिकल और डॉक्टर बनने के लिये विदेश का रुख करना आम बात हो गया है। ऐसे में नीट यूजी में रैंक के मुताबिक और अपने कम बजट को ध्यान में रखते हुए छात्रों के बीच कजाकिस्तान, रुस को लेकर उत्साह है। वहीं कजाकिस्तान के अलावा भारतीय छात्र पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश के मेडिकल कॉलेज जाना भी पसंद करते है। लेकिन हाल के दिनों में बाग्लादेश में उथल-पुथल के कारण एक बार फिर कजाकिस्तान को लेकर छात्र आशान्वित नजर आ रहे हैं।
नीट यूजी में कम रैंक से छात्रों में होती निराशा
दरअसल भारत में छात्रों को जब नीट यूजी में मन-मुताबिक रैंक नहीं मिलती, तो सरकारी कॉलेजों में एडमिशन मिलना ना-मुमकिन होता है। दूसरी तरफ ऐसे छात्र जो साल-भर इस सपने के साथ नीट यूजी की तैयारी करते है कि आगामी परीक्षा में अच्छे अंकों के साथ सरकारी कॉलेजों में एडमिशन ले लेंगे। लेकिन मेडिकल छात्रों की बढ़ती संख्या और देश में कम सरकारी कॉलेजों के कारण उनके मंसूबों पर पानी फिर जाता है। ऐसे में इन छात्रों को सीमित विकल्प के साथ आगे बढ़ना पड़ता है। इसका मुख्य कारण देश के निजी कॉलेजों की भारी भरकम फीस को चुका पाने की आर्थिक स्थिति का न होना है।
खर्च की क्षमता कम है तो क्या करें - क्या न करें
अगर आपका बजट 80 लाख से लेकर 1 करोड़ तक नहीं है और आप 20-25 लाख रुपये के बजट में एमबीबीएस करने की सोच रहे हैं तो आप विदेश जाने के लिए एजेंट्स की मदद न लें। भारत से एजेंट्स के जरिये विदेश जाने वाले कई छात्रों के साथ ठगी के मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा एजेंट्स के जरिये विदेश जाने पर आपको भारत में डॉक्टरी लाइंसेस के लिए जरूरी एग्जाम NExT की तैयारी का कोई आश्वासन नहीं मिलता। जिस कारण भारत वापस आने पर छात्रों को डॉक्टरी प्रैक्टिस की अनुमित नहीं मिल पाती। अगर आप 20 से 25 लाख रुपए में एमबीबीएस की सोच रहे हैं तो सफलता मोक्ष के इस टोल फ्री नंबर 1800-571-0202 पर कॉल कर अपनी सीट बुक कर सकते है।
एजेंट्स के भ्रमजाल से रहें दूर
यही नहीं सफलता मोक्ष के ट्रैक रिकॉर्ड को जब खंगाल कर देखें तो बीते 11 सालों में तकरीबन 5 हजार छात्रों को मोक्ष ने विदेश में मेडिकल एजुकेशन के लिए भेजा है। कॅरिअर के लिहाज से ये छात्र विदेश जाकर संतुष्ट नजर आते हैं। इसलिये आप एजेंट्स के भ्रमजाल से दूर रहें और सफलता मोक्ष के जरिये विदेश में दाखिला कराएं। सफलता काउंसलर छात्रों से उनकी रैंक और बजट पर चर्चा करते हैं। उनके बजट के अनुसार संबंधित देशों के टॉप यूनिवर्सिटीज में दाखिले पर काम किया जाता है। छात्र एमबीबीएस क्लीयर करने के बाद NExT परीक्षा में सफल हो ये सुनिश्चित किया जाता है। अगर विदेश से एमबीबीएस के बाद पोस्ट ग्रेजुएट का प्लान कर रहे हैं तो आपको बेस्ट विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं।
कई देशों में शुरू हुआ अकादमिक सत्र
सितम्बर - अक्टूबर से कई देशों में अकादमिक सत्र की शुरूआत हो रही है। ज्यादातर देशों में 15 सितम्बर से एमबीबीएस क्लासेज शुरू हो रही हैं। वहीं कजाकिस्तान में आप 30 सितम्बर तक दाखिला ले सकते हैं। कजाकिस्तान में अकादमिक सत्र अक्टूबर में शुरू होने जा रहा है। ऐसे में अब समय गंवाए बिना सफलता मोक्ष काउंसलर से सलाह लेकर अपना दाखिला सुनिश्चित कराएं। जहां तक भारत की बात है तो यहां महज 704 मेडिकल कॉलेज उपलब्ध है। जहां 1.09 लाख से ज्यादा छात्रों को एडमिशन मिलना दूर की कौड़ी लगता है। ऐसे में उनके सपने विदेशी यूनिवर्सिटीज में दाखिला लेकर ही पूरे हो सकते हैं।
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