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Hindi News ›   Education ›   CISCE removed red tape Hindi story from 10th class syllabus before board exams

CISCE ने 10वीं के सिलेबस से लाल फीताशाही पर व्यंग्य ‘जामुन का पेड़’ हिंदी की कहानी हटाई

Wed, 06 Nov 2019 02:36 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 06 Nov 2019 02:36 AM IST
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CISCE removed red tape Hindi story from 10th class syllabus before board exams
cisce - फोटो : Social Media

बोर्ड परीक्षा से महज तीन माह पहले मशहूर हिंदी लेखक कृषण चंदर की कहानी ‘जामुन का पेड़’ सीआईएससीई की 10वीं के सिलेबस से हटा दी गई है। यह कहानी लाल फीताशाही पर एक व्यंग्य है।

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काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन ने हालांकि इसे पाठ्यक्रम से हटाने का कोई कारण नहीं बताया है, लेकिन कई कवियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। जामुन का पेड़ शीर्षक वाली कृषण चंदर की कहानी आईसीएसई की दसवीं कक्षा के हिंदी में शामिल थी, लेकिन 2020-21 की बोर्ड परीक्षा में उस चैप्टर से सवाल नहीं पूछा जाएगा। बोर्ड की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों और छात्रों को इसके बारे में सूचित कर दिया जाए।
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परिषद के सचिव गैरी आरथून ने इस फैसले के कारण पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यह भी साफ नहीं है कि यह फैसला केवल 2020-21 शैक्षणिक सत्र के लिए है या आगे भी जारी रहेगा। जामुन का पेड़ 1960 में लिखी गई थी। इस कहानी में बताया गया है कि कैसे एक मशहूर कवि तूफान के दौरान सचिवालय के लॉन में खड़े जामुन के पेड़ के नीचे फंस जाता है।
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कवि के बचाव के लिए उस पेड़ को काटा जाना था, लेकिन रिश्वत के कारण कैसे माली ने इसके बारे में पहले चपरासी को बताया। फिर उसने क्लर्क को बताया और तब जाकर यह मामला संपदा अधीक्षक के पास पहुंचा।

घूमफिर कर यह मामला विदेश मंत्रालय के पास पहुंचा, क्योंकि किसी पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री ने इस पेड़ को लगाया था। हालांकि विदेश मंत्रालय ने पेड़ काटने के प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया कि इससे उस देश से रिश्ते खराब हो जाएंगे।


मामला प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचा, लेकिन वह विदेश दौरे पर थे। लौटने के बाद उनके सामने यह प्रस्ताव रखा गया और आखिरकार कवि को बचाने के लिए पेड़ काटने की मंजूरी दी गई, लेकिन पीएमओ से जब वह आदेश संपदा अधीक्षक के पास पहुंचा, तब तक कवि की मौत हो चुकी थी।

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