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Shaurya Doval: पाठ्यपुस्तकों में बदलाव से भारत के इतिहास पर गर्व पैदा होगा, भगवाकरण नहीं; शौर्य डोभाल ने कहा

Sat, 10 Aug 2024 04:52 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Sat, 10 Aug 2024 04:52 PM IST
सार

Shaurya Doval: भाजपा नेता शौर्य डोभाल का तर्क है कि भारत के इतिहास और भूगोल को उजागर करने के उद्देश्य से पाठ्यपुस्तकों में किए गए बदलावों को राष्ट्रीय गौरव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि ये बदलाव तथ्य-आधारित होने चाहिए और सुझाव दिया कि इस तरह के अपडेट भारतीय आत्म-गौरव से रहित औपनिवेशिक आख्यानों का मुकाबला करते हैं।

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Changes in textbooks to generate pride about India's history not saffronisation: Shaurya Doval
Shaurya Doval - फोटो : एएनआई

विस्तार

Shaurya Doval: भाजपा नेता और थिंक टैंक इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक शौर्य डोभाल के अनुसार देश के इतिहास या भूगोल के प्रति गर्व पैदा करने वाले अंशों को उजागर करने के लिए पाठ्यपुस्तकों में बदलाव करने के किसी भी प्रयास को "भगवाकरण" के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलाव तथ्यों पर आधारित होने चाहिए।

पीटीआई के संपादकों के साथ एजेंसी के मुख्यालय में बातचीत में डोभाल ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि मौजूदा पाठ्यपुस्तकों में जो कुछ भी है, वह सुनी-सुनाई बातों पर आधारित नहीं है और उस पर अच्छी तरह से शोध किया जाना चाहिए। लेकिन अगर बाद में कुछ तथ्य सामने आते हैं और यह सोचा जाता है कि उन्हें छात्रों को पढ़ाया जाना चाहिए, तो इसे "भगवाकरण" के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, उन्होंने कहा।
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उन्होंने कहा, "उदाहरण के लिए, मुगल साम्राज्य 1700 के आसपास खत्म हो गया और 1857 में अंग्रेज आए, फिर बीच के समय में किसी ने हम पर शासन किया होगा, लेकिन हम सुनते आ रहे हैं कि हम 1,000 साल से भी ज्यादा समय तक पहले मुगलों ने और फिर अंग्रेजों गुलाम रहे। हो सकता है कि 100 साल से भी ज्यादा समय के दौरान भारत का पुनरुत्थान हुआ हो, लेकिन जैसे ही यह विचार सामने आता है, आलोचक कहते हैं कि भगवाकरण हो गया है।" बैंकर से राजनीतिक विचारक बने इस व्यक्ति ने कहा कि औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली का एक हिस्सा ऐसे लोगों को तैयार करना था जो आत्म-गौरव में विश्वास नहीं करते। 
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आगे कहा, "मैं यह नहीं कह रहा कि बदलाव तथ्य आधारित नहीं होने चाहिए, लेकिन अगर देश के इतिहास या भूगोल के बारे में कोई ऐसा हिस्सा है जो गर्व पैदा करता है, तो उसे क्यों नहीं उजागर किया जाना चाहिए। मुझे नहीं लगता कि यह भगवाकरण है।"


डोभाल की यह टिप्पणी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव पर चल रही बहस के बीच आई है, जिसमें विपक्ष ने भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर इतिहास बदलने का आरोप लगाया है।

डोभाल ने कहा, "मैं शिक्षाविद् नहीं हूं, लेकिन मैं देश की शिक्षा प्रणाली का हिस्सा रहा हूं।"

हटाए गए विषयों के नाम
पाठ्यपुस्तकों में हाल ही में हटाए गए विषयों में: गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक भाजपा की 'रथ यात्रा'; कारसेवकों की भूमिका; बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद सांप्रदायिक हिंसा; भाजपा शासित राज्यों में राष्ट्रपति शासन; और भाजपा द्वारा "अयोध्या में हुई घटनाओं पर खेद व्यक्त करना" शामिल हैं।

हुमायूं, शाहजहां, अकबर, जहांगीर और औरंगजेब जैसे मुगल सम्राटों की उपलब्धियों के बारे में बात करने वाले अंश भी हटा दिए गए हैं।

भारतीय विचारों और भारत की संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने में उनके थिंक-थैंक की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर, डोभाल ने कहा, "योग, आयुर्वेद और बाजरा देखिए... ये सभी भारत की संस्कृति का हिस्सा हैं और अब वैश्विक मंच पर हैं। हमने पहले कभी भारत की कूटनीति के हिस्से के रूप में सांस्कृतिक वकालत नहीं की है"।

उन्होंने कहा, "इसका विचार केवल भारत की सॉफ्ट पावर को आगे ले जाना नहीं है, बल्कि देश के सांस्कृतिक ज्ञान को विश्वसनीयता और वैधता प्रदान करना भी है और यहीं पर हमारे थिंक टैंक ने भी योगदान दिया है।"

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