हैदराबाद: शून्य-त्रुटि परीक्षा तंत्र स्थापित करने की दिशा में काम कर रही सरकार, उच्च स्तरीय समिति ने दिए सुझाव
Zero-Error Exam: सरकार शून्य-त्रुटि प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। पूर्व इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन के नेतृत्व में गठित उच्चस्तरीय समिति ने इस संबंध में कई सुझाव पेश किए हैं।
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Amit Shah: पिछले साल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने में सरकार को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। ऐसे में प्रवेश परीक्षा प्रणाली में त्रुटि रहितता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार सुधार सहित विभिन्न उपाय कर रही है। इस दिशा में पहल करते हुए केंद्र ने पूर्व इसरो प्रमुख के राधाकृष्णन के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति का भी गठन किया था।
समिति ने दिए हैं, ये सब सुझाव
हैदराबाद में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "समिति ने कई बहुआयामी सुधार, एनटीए का पुनर्गठन, प्रवेश प्रक्रिया के लिए नया दृष्टिकोण, परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति पर विचार करने आदि का सुझाव दिया है।"
उन्होंने कहा कि मोटे तौर पर सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के नए नेतृत्व को इन सभी क्षेत्रों पर विचार करने का निर्देश दिया है। हाल ही में राज्य सरकारों के सचिवों की एक बैठक में सभी से सुधार प्रक्रिया में भागीदार बनने की अपील की गई थी।
उन्होंने कहा कि कई राज्यों की अपनी प्रवेश और अलग-अलग परीक्षाएं हैं और किसी भी तरह की परीक्षा में शामिल होने वाले युवाओं की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
इस बात पर ध्यान दिलाते हुए कि केंद्र ने पिछले साल परीक्षाओं में धोखाधड़ी और कदाचार को रोकने के लिए एक नया अधिनियम बनाया था, उन्होंने कहा कि अनुचित व्यवहार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, "कुछ प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधारों और कड़े कानूनों के साथ, केंद्र सभी राज्य सरकारों के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि प्रवेश परीक्षा छात्रों के लिए त्रुटि-मुक्त हो।"
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